अयोध्या। रामलला के चढ़ावे में हुए ‘महागबन’ के खुलासे के बाद अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़े स्तर पर प्रशासनिक उथल-पुथल मची हुई है। पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद अब ट्रस्ट के भीतर अंदरूनी व्यवस्थाओं को पूरी तरह बदलने की कवायद शुरू हो गई है। इसी कड़ी में ट्रस्ट के प्रमुख सदस्य महंत दिनेंद्र दास को एक बहुत बड़ी और नई जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिससे मंदिर प्रशासन में उनका कद और अधिकार काफी बढ़ गया है।
एक्शन में ट्रस्ट: चंपत राय और अनिल मिश्रा की डिजिटल ID ब्लॉक
चढ़ावा चोरी मामले में हर दिन हो रहे खुलासों के बीच ट्रस्ट ने बेहद कड़ा प्रशासनिक रुख अख्तियार किया है। गुरुवार को एक बेहद अहम फैसले के तहत ट्रस्ट ने पूर्व महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी अनिल मिश्रा और गोपाल राव की डिजिटल आईडी को पूरी तरह से निष्क्रिय (Deactivate) कर दिया। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि ये लोग अब भविष्य में मंदिर के लिए कोई भी वीआईपी (VIP) पास जारी न कर सकें। इसके ठीक एक दिन बाद, शुक्रवार को महंत दिनेंद्र दास की शक्तियों को बढ़ाते हुए उनके नाम से एक नई डिजिटल आईडी जनरेट की गई है। अब मंदिर के सभी VIP पास केवल महंत दिनेंद्र दास की आईडी से ही आधिकारिक तौर पर जारी किए जा सकेंगे।
आरोपी टिन्नू यादव ने इसी लूपहोल का उठाया था फायदा
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जांच एजेंसियों की पड़ताल में यह बात सामने आई है कि चढ़ावा चोरी कांड के मुख्य आरोपियों में से एक, टिन्नू यादव ने मंदिर की इसी पुरानी पास व्यवस्था की कमियों का जमकर फायदा उठाया था। उसने सिस्टम का दुरुपयोग करते हुए फर्जी तरीके से बड़ी संख्या में वीआईपी पास जारी करवाए थे। इस सुरक्षा चूक और धांधली के सामने आने के बाद ही ट्रस्ट को यह सख्त कदम उठाना पड़ा है। फिलहाल जांच एजेंसियां इस पूरे डिजिटल पासिंग सिस्टम की गहराई से पड़ताल कर रही हैं।
22 जुलाई को ट्रस्ट की महाबैठक: बदल जाएगी पूरी व्यवस्था
आगामी 22 जुलाई को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की एक बेहद अहम और निर्णायक बैठक होने जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक के बाद राम मंदिर में दर्शन व्यवस्था, पूजा-पद्धति, राग-भोग, चढ़ावा प्रबंधन, सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधाओं में आमूल-चूल बदलाव लागू किए जाएंगे। संतों और रामानंदीय परंपरा के प्रकांड विद्वानों के सुझावों के आधार पर पूरी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, अनुशासित, आधुनिक और श्रद्धालु-अनुकूल बनाया जाएगा। इस बैठक में ट्रस्ट के नए महासचिव और खाली पड़े पदों पर नए सदस्यों के चयन पर भी अंतिम मुहर लगना तय माना जा रहा है।
पूजा-पद्धति से लेकर एंट्री नियमों तक में बड़े बदलाव की तैयारी
ट्रस्ट का मुख्य उद्देश्य अब मंदिर की प्रशासनिक प्रणाली को पूरी तरह आधुनिक और जवाबदेह बनाना है, ताकि भविष्य में ऐसी किसी वित्तीय अनियमितता की गुंजाइश न रहे। इसके लिए दर्शन व्यवस्था को अधिक सुगम बनाने, चढ़ावा प्रबंधन (Donation Management) को 100% पारदर्शी करने, और मंदिर की सुरक्षा व भीड़ प्रबंधन को अपग्रेड करने पर काम शुरू हो चुका है। राग-भोग और पूजा-पद्धति को पूरी तरह से रामानंदीय परंपरा के अनुरूप और अधिक व्यवस्थित किया जाएगा।
13 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में होगी इस मामले की बड़ी सुनवाई
इस पूरे घटनाक्रम के बीच देश की सर्वोच्च अदालत से भी एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। आगामी 13 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में हुई कथित वित्तीय अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग करने वाली विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई करेगा। यह बेहद महत्वपूर्ण सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ (Bench) के समक्ष सूचीबद्ध की गई है। इस सुनवाई पर अब पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं।














