लखनऊ: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान होने में अभी भले ही कुछ समय बाकी हो, लेकिन सियासी गलियारों में बयानबाजी की तपिश चरम पर पहुंच चुकी है. कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच छिड़ी जुबानी जंग ने राज्य के राजनीतिक पारे को अचानक बढ़ा दिया है. गठबंधन की चर्चाओं के बीच दोनों दलों में सीटों के बंटवारे को लेकर शह-मात का खेल शुरू हो गया है. कांग्रेस ने अब सपा के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाते हुए फ्रंट फुट पर खेलने की रणनीति बनाई है.
‘सपा को बोलने वाले मुस्लिम नेता पसंद नहीं’ – इमरान मसूद का तीखा हमला
गठबंधन की बातचीत के बीच कांग्रेस के राज्य प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने जब सीट बंटवारे में बराबरी का दावा ठोका, तो सपा नेता उदयवीर सिंह ने तंज कसते हुए कहा था कि उनसे क्या बात की जाएगी, सब कुछ हाईकमान तय करेगा. इस बयान पर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने पलटवार करने में देर नहीं लगाई. उन्होंने सपा पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी को मुखर होकर बोलने वाले मुसलमान नेता रास नहीं आते हैं. मसूद ने सपा को आईना दिखाते हुए यहां तक कह दिया कि 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ गठबंधन के कारण ही सपा को 37 सीटें हासिल हुई थीं. उन्होंने साफ लफ्जों में कहा कि जमीनी हकीकत यह है कि आज कांग्रेस से ज्यादा समाजवादी पार्टी को इस गठबंधन की जरूरत है.
अखिलेश यादव की ‘चुप्पी’ पर मसूद ने खड़े किए बड़े सवाल
सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने 22 जून, 2026 को दिए अपने एक बयान में सपा प्रमुख अखिलेश यादव की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए थे. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे अन्याय पर सपा नेतृत्व की चुप्पी समझ से परे है. मसूद ने तंज कसा कि सपा नेता राम मंदिर के चंदे से जुड़े मुद्दों पर तो खुलकर बोलते हैं, लेकिन जब बात मुसलमानों पर हो रहे कथित जुल्म और बुलडोजर एक्शन की आती है, तो वे पूरी तरह मौन साध लेते हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मसूद का यह इशारा सीधे तौर पर जेल में बंद आजम खान और हालिया प्रशासनिक कार्रवाइयों की तरफ था, जिसके जरिए कांग्रेस मुस्लिम मतदाताओं के बीच सपा की घेराबंदी करना चाहती है.
आजम खान के जेल जाने के बाद मुस्लिम नेतृत्व पर कांग्रेस की नजर
उत्तर प्रदेश की सियासत को करीब से समझने वाले जानकारों का कहना है कि सपा के कद्दावर नेता आजम खान के जेल में होने के कारण फिलहाल समाजवादी पार्टी के पास कोई बड़ा और आक्रामक मुस्लिम चेहरा मौजूद नहीं है. हालांकि अफजाल अंसारी सपा के वरिष्ठ सांसद हैं, लेकिन कानूनी अड़चनों और सियासी समीकरणों के चलते इन दिनों उनके सुर काफी संभले हुए नजर आ रहे हैं. ऐसे में मुस्लिम राजनीति में पैदा हुए इस खालीपन को भरने के लिए कांग्रेस ने सोची-समझी रणनीति के तहत इमरान मसूद को आगे कर दिया है. मसूद अपनी बेबाक और फायरब्रांड छवि के लिए जाने जाते हैं, जिससे सपा के लिए भी उन पर पलटवार करना आसान नहीं हो रहा है.
150 ‘ए-ग्रेड’ सीटों पर कांग्रेस का दावा, बढ़ेगी सपा की टेंशन
कांग्रेस के रणनीतिकारों ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश और अन्य मुस्लिम बहुल इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए एक खास प्लान तैयार किया है. इसी योजना के तहत कांग्रेस अब आगामी विधानसभा चुनाव में करीब 150 सीटों को अपने लिए ‘ए-ग्रेड’ (मजबूत स्थिति वाली) मानकर चल रही है. पार्टी का मानना है कि मुस्लिम बहुल सीटों पर यदि उसे चुनाव लड़ने का मौका मिलता है, तो वह सपा से बेहतर प्रदर्शन कर सकती है. इमरान मसूद के जरिए दबाव बनाकर कांग्रेस गठबंधन की मेज पर ज्यादा से ज्यादा सीटें झटकने की जुगत में है, जिससे आने वाले दिनों में सपा नेतृत्व की मुश्किलें बढ़ना तय माना जा रहा है.













