संसद में गूंजा पेपर लीक का मुद्दा: भारी हंगामे के बीच लोकसभा में पेश हुआ संशोधन विधेयक; 10 साल तक की जेल और ₹50 लाख जुर्माने का कड़ा प्रावधान

नीट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली को लेकर विपक्ष के जोरदार हंगामे और नारेबाजी के बीच सोमवार को केंद्र सरकार ने लोकसभा में ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पेश कर दिया. केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह द्वारा बिल पेश किए जाने के दौरान सदन में ध्वनि मत से वोटिंग कराई गई. हालांकि, विपक्षी सांसद लगातार ‘मोदी-शाह छात्रों से माफी मांगें’ के नारे लगाते रहे और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े रहे. लगातार जारी शोर-शराबे के चलते लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई.

3 महीने में फास्ट ट्रैक ट्रायल और 10 साल तक की सख्त सजा का प्रावधान

लोकसभा में पेश किए गए नए संशोधन विधेयक के मसौदे में परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने और पेपर लीक माफिया पर लगाम कसने के लिए बेहद सख्त कानूनी प्रावधान किए गए हैं:

  • कड़ी सजा व जुर्माना: प्रश्नपत्र लीक करने या अनुचित साधनों (चीटिंग) का इस्तेमाल कराने वालों को कम से कम 5 साल और अधिकतम 10 साल तक की जेल हो सकती है, साथ ही ₹50 लाख तक के भारी-भरकम जुर्माने का प्रावधान है.

  • समयबद्ध जांच: बिल के तहत पेपर लीक या गड़बड़ी से जुड़े मामलों की जांच एजेंसियों को अधिकतम 2 महीने के भीतर अपनी जांच पूरी करनी होगी.

  • फास्ट ट्रैक अदालतें: राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को त्वरित (फास्ट-ट्रैक) अदालतें स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं, जो चार्जशीट दाखिल होने के महज 3 महीने के अंदर मुकदमे का निपटारा करेंगी.

संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू की विपक्ष से अपील

सदन में गतिरोध के बीच संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने विपक्षी दलों और कांग्रेस से हंगामा बंद करने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता देश की परीक्षा प्रणाली में सुधार लाना और करोड़ों युवाओं व छात्रों के भविष्य की सुरक्षा करना है. उन्होंने विपक्ष से अपील की कि वे छात्रों के हित में लाए गए इस अत्यंत महत्वपूर्ण बिल पर बहस से ध्यान न भटकाएं और चर्चा में हिस्सा लें.

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