उत्तर प्रदेश से बिहार में शराब की तस्करी को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर वाराणसी-सियालदह अमृत भारत एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 22588) का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो शेयर करने वाले व्यक्ति का दावा है कि इस प्रीमियम ट्रेन के स्लीपर कोचों के बाथरूम में शराब की पेटियों को भरकर बिहार भेजा जा रहा है। यात्रा के दौरान आरपीएफ (RPF) की अनुपस्थिति और टीटीई (TTE) की कथित मिलीभगत के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
इस पूरे प्रकरण के बाद सामने आए एक स्टिंग ऑपरेशन और मीडिया रिपोर्ट्स ने ट्रेन के जरिए चल रहे शराब तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश कर दिया है। इससे बिहार में लागू पूर्ण शराबबंदी कानून और रेलवे में यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
कोच के टॉयलेट से छतों तक: जानिए कहां-कहां छिपाई जाती है अवैध शराब
रिपोर्ट्स और सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, बनारस और उत्तर प्रदेश के अन्य स्टेशनों से बिहार जाने वाली ट्रेनों में तस्कर बेहद शातिराना तरीका अपनाते हैं। तस्कर शराब की खेप को मुख्य रूप से लावारिस बैगों, कोच के टॉयलेट, छतों के पैनल और सीटों के बीच बनी गुप्त जगहों में छिपा देते हैं।
पकड़े जाने के डर से तस्कर ट्रॉली बैग या बोरियों में शराब भरकर जनरल या स्लीपर कोच में रख देते हैं और खुद दूर किसी अन्य सीट पर बैठ जाते हैं या अगले स्टेशन पर उतर जाते हैं। बिहार सीमा के पास पहुंचते ही सुनसान इलाकों या छोटे स्टेशनों पर चेन पुलिंग (ACP/वैक्यूम प्रेशर) करके शराब को नीचे उतार लिया जाता है।
स्टिंग ऑपरेशन में खुलासा: थानों में सेटिंग, महिला तस्करों का इस्तेमाल और ₹30,000 की ‘पहुंच’
न्यूज़ एजेंसी द्वारा किए गए एक स्टिंग ऑपरेशन में तस्करी के इस पूरे खेल के कई परतें उघड़ी हैं:
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फोन पर ऑर्डर और रेट: यूपी के गोदाम संचालक और कारोबारी सीधे फोन पर ऑर्डर लेकर बिहार के लिए शराब की डिलीवरी सेट करते हैं।
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हफ्ता वसूली का खेल: रिपोर्ट का दावा है कि शराब की खेप के आधार पर संबंधित इलाकों या थानों तक ₹10,000 से लेकर ₹30,000 तक की रकम पहुंचाई जाती है।
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महिला तस्करों का गिरोह: एक महिला तस्कर ने खुलासा किया कि इस धंधे में 18 से 50 साल की महिलाएं और युवतियां शामिल हैं। ये सुबह-सुबह ठेका खुलते ही बैगों में बोतलें भर लेती हैं।
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रोजाना 300 पेटियां: प्लेटफॉर्म और ट्रेन के अंदर जांच न होने का फायदा उठाकर तस्कर रोजाना लगभग 300 पेटी शराब बिहार के दरभंगा समेत अलग-अलग जिलों में पहुंचा रहे हैं।
अखबारों में लिपटी बोतलें और सोशल मीडिया पर उठते तीखे सवाल
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दिख रहा है कि कांच की बोतलें टूटे नहीं, इसके लिए उन्हें अखबारों में लपेटकर पिट्ठू बैगों और बोरियों में रखा गया था। वीडियो सामने आने के बाद आम जनता रेलवे प्रशासन से सवाल पूछ रही है कि सुरक्षा जांच और कैमरों के बावजूद इतनी बड़ी मात्रा में शराब ट्रेन के अंदर कैसे पहुंच गई?
हालांकि, इस पूरे मामले पर रेलवे अधिकारियों का कहना है कि पुलिस और आरपीएफ की टीमें समय-समय पर विशेष चेकिंग अभियान चलाती रहती हैं और मुखबिरों की सूचना के आधार पर कई तस्करों को पहले भी रंगे हाथ पकड़ा जा चुका है।











