कहां खर्च हुआ 86 करोड़? जौहर यूनिवर्सिटी केस में ED की जांच तेज, आजम खां समेत ठेकेदार निशाने पर

जौहर यूनिवर्सिटी पर ईडी की 16 घंटे की छापेमारी, देर रात दस्तावेज लेकर लखनऊ लौटीं टीमें - Hello UP

रामपुर : रामपुर की जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच तेज हो गई है। बुधवार को यूनिवर्सिटी, जौहर ट्रस्ट और उससे जुड़े कई लोगों के ठिकानों पर हुई छापेमारी के दौरान एजेंसी को सरकारी धन और ट्रस्ट की गतिविधियों से जुड़े कई दस्तावेज मिले हैं। जांच में सांसद-विधायक निधि समेत विभिन्न सरकारी विभागों से मिली करीब 86 करोड़ रुपये की रकम को कथित तौर पर निजी कंस्ट्रक्शन फर्मों के जरिए यूनिवर्सिटी के निर्माण में इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।

ईडी की कार्रवाई करीब 16 घंटे तक चली। टीम ने यूनिवर्सिटी और ट्रस्ट के कार्यालय समेत कई ठिकानों से निर्माण, जमीन खरीद, इंफ्रास्ट्रक्चर और चंदे से जुड़े दस्तावेज जुटाए। जांच एजेंसी करीब 11 फर्मों से संबंधित रिकॉर्ड भी अपने साथ ले गई है।

सरकारी फंड के इस्तेमाल पर सवाल

जांच के दौरान आरोप सामने आया है कि जल निगम, पीडब्ल्यूडी, ग्राम्य विकास, संस्कृति, पिछड़ा वर्ग, नगर विकास और सिंचाई विभाग से जुड़े विकास कार्यों के लिए जारी धन का कथित तौर पर यूनिवर्सिटी निर्माण में इस्तेमाल किया गया। सूत्रों के मुताबिक, सांसद-विधायक निधि से जुड़े कामों के लिए छह ठेकेदार भी ईडी की जांच के दायरे में हैं।

आरोप है कि निजी कंस्ट्रक्शन फर्मों को सरकारी ठेके मिले, लेकिन उनके जरिए ट्रस्ट की संपत्तियों में निर्माण कराया गया। जौहर एसोसिएट्स और सीके एसोसिएट्स के जरिए करीब 86 करोड़ रुपये के सरकारी धन के कथित दुरुपयोग की जांच की जा रही है।

आजम खां समेत कई लोग जांच के दायरे में

मामले में पूर्व मंत्री आजम खां, जौहर ट्रस्ट से जुड़े लोग, संबंधित विभागों के तत्कालीन अधिकारी और ठेकेदारों से पूछताछ की तैयारी है। ईडी सरकारी धन के लेन-देन, बैंक से निकाली गई रकम, निर्माण खर्च और ठेकों से जुड़े दस्तावेजों का मिलान कर रही है।

चंदे के रिकॉर्ड की भी जांच

ईडी की जांच अब जौहर ट्रस्ट को मिले चंदे तक भी पहुंच गई है। एजेंसी ने दानदाताओं और उनसे जुड़े दस्तावेजों की जानकारी जुटाई है। कुछ संस्थाओं के अस्तित्व और उनके जरिए दिए गए कथित चंदे की भी जांच की जा रही है। करीब 11 फर्मों और संस्थाओं से जुड़े रिकॉर्ड ईडी के कब्जे में लिए जाने की बात सामने आई है।

जांच में यूनिवर्सिटी के निर्माण पर करीब 494 करोड़ रुपये खर्च होने से संबंधित रिकॉर्ड भी अहम माना जा रहा है। वहीं, सरकारी बजट से मिले करीब 88 करोड़ रुपये और दान की रकम के इस्तेमाल का हिसाब भी खंगाला जा रहा है।

फिलहाल ईडी की जांच जारी है। सरकारी धन के कथित दुरुपयोग, ठेकों, चंदे और यूनिवर्सिटी निर्माण में रकम के इस्तेमाल से जुड़े आरोपों पर एजेंसी दस्तावेजों और संबंधित लोगों के बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।

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