
नई दिल्ली : लश्कर-ए-तैयबा (LeT) पाकिस्तान में अपने संगठनात्मक नेटवर्क को फिर से मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों से मिली जानकारी के मुताबिक, संगठन ने पिछले एक साल के दौरान अकेले सिंध प्रांत में सात मरकज और मस्जिदें स्थापित की हैं। अधिकारियों का दावा है कि इन गतिविधियों के लिए पाकिस्तान के सरकारी तंत्र से आर्थिक मदद मिलने के साथ-साथ विदेशों से भी फंड जुटाया जा रहा है।
खुफिया अधिकारियों के अनुसार, लश्कर-ए-तैयबा बड़े पैमाने पर फंड जुटाने के अभियान भी चला रहा है। संगठन को कथित तौर पर कुछ विदेशी स्रोतों से धर्मार्थ संस्थाओं के नाम पर धन प्राप्त हुआ है। अधिकारियों का मानना है कि इतने कम समय में बड़ी संख्या में धार्मिक और संगठनात्मक केंद्रों का निर्माण संगठन के दोबारा विस्तार की कोशिश का संकेत है।
सिंध में संगठन का नेटवर्क बढ़ाने पर जोर
अधिकारियों के मुताबिक लश्कर-ए-तैयबा के वरिष्ठ कमांडर पाकिस्तान के अलग-अलग इलाकों का दौरा कर रहे हैं। सैफुल्लाह कसूरी, तल्हा हाफिज सईद और नदीम फैसल जैसे संगठन से जुड़े प्रमुख लोगों के इन गतिविधियों में शामिल होने की बात कही गई है।
बताया जा रहा है कि ये नेता विभिन्न स्थानों पर जाकर संगठन के सदस्यों के साथ बैठकें करते हैं। सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि नए मरकज और मस्जिदों का इस्तेमाल युवाओं तक पहुंच बनाने, धन जुटाने और संगठनात्मक गतिविधियों के लिए लोगों को एकजुट करने के लिए किया जा रहा है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद ढांचे को फिर खड़ा करने की कोशिश
अधिकारियों के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान लश्कर-ए-तैयबा के ठिकानों को नुकसान पहुंचने के बाद संगठन अपने नेटवर्क को दोबारा मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। इस अभियान में मुरीदके स्थित उसके एक प्रमुख प्रशिक्षण केंद्र को भी निशाना बनाए जाने की बात कही गई थी।
भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, अब संगठन का फोकस पाकिस्तान के भीतर अपनी सामाजिक और संगठनात्मक पहुंच बढ़ाने पर है। शुरुआत में सिंध पर जोर दिया जा रहा है, लेकिन आने वाले समय में पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह के कार्यक्रम चलाए जाने की आशंका जताई गई है।
राजनीतिक और सामाजिक नेटवर्क के इस्तेमाल का आरोप
सुरक्षा अधिकारियों का दावा है कि लश्कर-ए-तैयबा अपनी गतिविधियों को सामान्य और वैध दिखाने के लिए राजनीतिक रूप से जुड़े संगठनों और अन्य समूहों का भी सहारा ले रहा है। संगठन के सदस्यों के चुनावी रैलियों और बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल होने की बात भी सामने आई है।
अधिकारियों के अनुसार, इसका उद्देश्य स्थानीय लोगों के बीच संपर्क बढ़ाना और संगठन की गतिविधियों को मुख्यधारा का हिस्सा दिखाने की कोशिश करना हो सकता है। साथ ही, कुछ राजनीतिक दलों और नेताओं के साथ संपर्क बढ़ाने की कोशिश किए जाने का भी दावा किया गया है।
ISI और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप
भारतीय अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI संगठन से जुड़े कुछ लोगों को सुरक्षा उपलब्ध करा रही है। अधिकारियों के मुताबिक तल्हा हाफिज सईद और सैफुल्लाह कसूरी जैसे लोगों के काफिलों को पुलिस सुरक्षा मिलने की जानकारी सामने आई है।
अधिकारियों का दावा है कि अगर प्रतिबंधित आतंकी संगठन से जुड़े लोगों को इस तरह सुरक्षा मिलती है, तो यह पाकिस्तान के सरकारी तंत्र और आतंकवादी नेटवर्क के बीच संभावित संबंधों को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। हालांकि, इन आरोपों पर पाकिस्तान की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का उल्लेख नहीं किया गया है।
PoK में आतंकियों की मौजूदगी बढ़ने का दावा
भारतीय सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, लश्कर-ए-तैयबा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में भी अपनी गतिविधियां जारी रखे हुए है। दावा है कि बड़ी संख्या में आतंकवादी वहां मौजूद हैं और जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ के अवसर तलाश रहे हैं।
अधिकारियों का कहना है कि लश्कर अपने पुराने संपर्कों तक भी पहुंच बनाने की कोशिश कर रहा है और उन्हें स्थानीय स्तर पर संपर्क अभियान चलाने के लिए प्रेरित कर रहा है। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, राजनीतिक और सामाजिक समूहों के बीच घुलने-मिलने की ऐसी कोशिशें सुरक्षा के लिहाज से चिंता का विषय हैं।
खुफिया अधिकारियों का आकलन है कि संगठन की रणनीति केवल अपने पुराने ढांचे को बहाल करने तक सीमित नहीं है, बल्कि नए सदस्यों की भर्ती, फंडिंग नेटवर्क मजबूत करने और युवाओं तक पहुंच बढ़ाने पर भी केंद्रित है। इससे भारत की सुरक्षा एजेंसियों के लिए पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा की गतिविधियों पर निगरानी और भी महत्वपूर्ण हो गई है।













