
नई दिल्ली। कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेज उछाल देखने को मिला है। ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध दोबारा शुरू होने की खबरों का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दिखाई दे रहा है। तनाव बढ़ने के साथ ही तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी तेज हो गया है।
ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष शुरू होने के बाद से ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर लगातार दबाव देखने को मिल रहा है। पिछले कुछ दिनों में स्थिति अपेक्षाकृत शांत रहने के बाद अब एक बार फिर संघर्ष बढ़ने से तेल बाजार में हलचल तेज हो गई है।
105 डॉलर प्रति बैरल पहुंचा कच्चा तेल
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़े तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 105 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। बाजार में आशंका है कि अगर संघर्ष लंबे समय तक जारी रहता है तो कच्चे तेल की सप्लाई पर असर पड़ सकता है।
ईरान दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक देशों में शामिल है। ऐसे में क्षेत्र में किसी भी तरह के सैन्य तनाव का सीधा असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ सकता है। निवेशक भी संघर्ष से जुड़े घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
युद्ध बढ़ा तो और महंगा हो सकता है तेल
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर केवल अंतरराष्ट्रीय बाजार तक सीमित नहीं रहता। तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी होने पर दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्था पर इसका असर पड़ सकता है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए भी अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी महत्वपूर्ण है।
कच्चे तेल के दाम बढ़ने से आयात लागत बढ़ सकती है और इसका असर परिवहन से लेकर कई अन्य क्षेत्रों पर देखने को मिल सकता है। हालांकि, घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर असर कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करता है।
फिलहाल बाजार की नजर ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और आगे होने वाले घटनाक्रम पर है। अगर संघर्ष और बढ़ता है या तेल आपूर्ति को लेकर कोई बड़ा व्यवधान पैदा होता है, तो कच्चे तेल की कीमतों में आगे भी तेजी देखने को मिल सकती है।















