अब आपकी जमीन का भी बनेगा Aadhaar! हर प्लॉट की होगी डिजिटल पहचान, सरकार ने लॉन्च की नई स्कीम

नई दिल्ली देशभर में जमीनों के स्वामित्व को स्पष्ट करने और धोखाधड़ी पर पूर्ण विराम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। ‘डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम’ (DILRMP) के तीसरे चरण की विस्तृत गाइडलाइन जारी कर दी गई है। इसके तहत अब ग्रामीण ही नहीं, बल्कि शहरी क्षेत्रों की जमीनों का भी पूरी तरह से डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। गुरुवार को इस योजना की घोषणा करते हुए केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि भूमि केवल मिट्टी का टुकड़ा नहीं, बल्कि किसानों का गौरव और पीढ़ियों की पहचान है।

2026-31 के लिए 565.5 करोड़ रुपये का बजट आवंटित सरकार ने DILRMP 3.0 के क्रियान्वयन के लिए वर्ष 2026 से 2031 की अवधि हेतु 565.5 करोड़ रुपये का बड़ा बजट मंजूर किया है। इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य जमीनों के नक्शों, अधिकारों के रिकॉर्ड (RoR), संपत्ति पंजीकरण और संबंधित अदालती मामलों के आंकड़ों को एक अत्याधुनिक जीआईएस-आधारित (GIS-enabled) डिजिटल फ्रेमवर्क पर एकीकृत करना है। इससे किसानों और आम नागरिकों को बैंकों से संस्थागत ऋण (Loan) मिलने में आसानी होगी और उन्हें सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।

‘भू-आधार’ से पहचान और GIS-इनेबल्ड ‘लैंड स्टैक’ योजना के तहत देश के हर जमीन के टुकड़े को एक 14-अंकों का यूनिक आइडेंटिफायर नंबर (भू-आधार) प्रदान किया जाएगा, जिससे संपत्ति की पारदर्शी पहचान हो सकेगी। इसके साथ ही, राज्य स्तर पर ‘लैंड स्टैक’ विकसित किया जाएगा जो बाद में नेशनल लैंड स्टैक का रूप लेगा। यह सिस्टम API के जरिए भूमि संबंधी विभिन्न डेटासेट को आपस में जोड़ेगा, जिससे किसी भी जमीन का मालिकाना हक और इतिहास चुटकियों में देखा जा सकेगा।

पासपोर्ट केंद्र की तर्ज पर बनेंगे आधुनिक रजिस्ट्रेशन सेंटर प्रशासनिक सुधारों के तहत देश के अत्यधिक भीड़-भाड़ वाले 75 सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों को ‘पासपोर्ट सेवा केंद्रों’ की तर्ज पर डिजिटल सुविधाओं से लैस आधुनिक सर्विस सेंटर में बदला जाएगा। इसके अलावा, पुश्तैनी संपत्तियों के विवाद खत्म करने के लिए पुराने ऐतिहासिक और विरासत संबंधी सभी दस्तावेजों की स्कैनिंग कर सुरक्षित डिजिटल रिपॉजिटरी बनाई जाएगी। इससे संपत्ति की खरीद-बिक्री के पुराने इतिहास की जांच करना बेहद सरल हो जाएगा।

पेपरलेस रेवेन्यू कोर्ट्स और ‘नक्शा’ प्रोजेक्ट से शहरी मैपिंग राजस्व अदालतों में लंबित मामलों के जल्द निपटारे के लिए ‘राजस्व न्यायालय मामला प्रबंधन प्रणाली’ (RCCMS) को सीधे भूमि रिकॉर्ड से जोड़ा जाएगा। वहीं, शहरी क्षेत्रों के लिए ‘नक्शा’ (NAKSHA) पायलट प्रोजेक्ट में तेजी लाते हुए सटीक GIS-आधारित शहरी भूमि रिकॉर्ड तैयार किए जाएंगे और नागरिकों को ‘अर्बन प्रॉपर्टी कार्ड’ (UrPro Card) जारी किए जाएंगे। सरकार का यह कदम देश में यूनिफाइड लैंड मैनेजमेंट सिस्टम स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

 

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