
मस्कट (ओमान)। ओमान के सलालाह शहर में सोमवार को ईरान और खाड़ी देशों (GCC) के बीच प्रस्तावित उच्चस्तरीय बैठक को ऐन मौके पर स्थगित कर दिया गया है। ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल-बुसैदी और ईरानी सरकारी मीडिया ने क्षेत्रीय सहमति का हवाला देते हुए इस स्थगन की पुष्टि की है। यह बैठक रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) में व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही और नियमों को तय करने के उद्देश्य से बुलाई गई थी। बैठक टलने के पीछे खाड़ी देशों की आपत्तियां और जलडमरूमध्य में एक ईरानी कार्गो शिप पर हुआ भीषण हमला मुख्य वजह माना जा रहा है।
क़ेश्म द्वीप के पास ईरानी जहाज पर बड़ा हमला, 1 की मौत, 4 घायल
ओमान वार्ता टलने से महज कुछ घंटे पहले होर्मुज जलडमरूमध्य में क़ेश्म द्वीप के निकट एक ईरानी कार्गो जहाज को मिसाइल/प्रोजेक्टाइल से निशाना बनाया गया। इस हमले में जहाज में भीषण आग लग गई, जिससे एक व्यक्ति की मौत हो गई और चार अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। ब्रिटेन के मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने भी इस हमले की पुष्टि की है। जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से इस हमले में अमेरिका की भूमिका को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कोई भी सीधा जवाब देने से इनकार कर दिया। इस घटना के बाद से फारस की खाड़ी में सैन्य तनाव और अधिक गहरा गया है।
सऊदी अरब ने जताई आपत्ति, बहरीन का शामिल होने से इनकार
कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, सऊदी अरब ने ईरान और ओमान के बीच प्रस्तावित समझौते के कुछ मसौदों पर गहरा एतराज जताया था। सऊदी अरब का मानना है कि इस समझौते से होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का नियंत्रण बढ़ेगा, जिससे GCC देशों के दीर्घकालिक आर्थिक और सुरक्षा हित प्रभावित हो सकते हैं। ईरान इस मार्ग से गुजरने वाले विदेशी जहाजों से ‘ट्रांजिट शुल्क’ (Transit Fee) वसूलने की योजना बना रहा था। इस बैठक के लिए केवल इराक ने सार्वजनिक पुष्टि की थी, जबकि बहरीन ने तेहरान के साथ कूटनीतिक संबंध न होने का हवाला देकर पहले ही इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया था।
ब्रिक्स सम्मेलन में दिखे थे सुलह के संकेत, पर ओमान वार्ता से बढ़ा सस्पेंस
उल्लेखनीय है कि इस तनाव के बीच हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित ’18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन’ के दौरान ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और यूएई (अबू धाबी) के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद के बीच बेहद सकारात्मक मुलाकात हुई थी। दोनों देशों ने पुरानी कड़वाहट भुलाकर आगे बढ़ने का संकल्प लिया था। हालांकि, ओमान वार्ता के अचानक रद्द होने और समंदर में जहाजों पर बढ़ते हमलों से यह साफ हो गया है कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए सबसे महत्वपूर्ण माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य का विवाद इतनी आसानी से सुलझने वाला नहीं है।















