रूस से तेल खरीद पर अमेरिका का नया दांव पड़ेगा उल्टा! भारतीय सामानों पर 100% टैरिफ से खुद अमेरिका में बढ़ेगी महंगाई

रूस से रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर नकेल कसने के लिए अमेरिकी संसद (कांग्रेस) ने एक नया कानून पारित किया है। ‘लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट’ नाम के इस विवादास्पद बिल के तहत भारत और चीन जैसे देशों से आने वाले उत्पादों पर 100 फीसदी तक का भारी-भरकम टैरिफ लगाने का प्रस्ताव है। हालांकि, प्रथम दृष्टया इसे भारत पर दबाव बनाने की अमेरिकी रणनीति माना जा रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय व्यापार विशेषज्ञों का दावा है कि यह दांव वाशिंगटन पर ही भारी पड़ेगा। अगर यह कानून लागू होता है, तो भारत से ज्यादा आर्थिक नुकसान खुद अमेरिका को उठाना पड़ेगा।

महंगाई की आग में झुलसेगी अमेरिकी जनता और रसोई अमेरिका वर्तमान में पहले से ही गंभीर आर्थिक मंदी और ऊंची मुद्रास्फीति (महंगाई) की मार झेल रहा है। टीटी लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर संजय के जैन के अनुसार, भारतीय सामानों पर 100% टैक्स लगाना जलती आग में घी डालने जैसा होगा। अमेरिका बड़े पैमाने पर भारत से कपड़े, टेक्सटाइल, घरेलू इस्तेमाल के सामान और जरूरी दवाओं का आयात करता है। यदि इन पर दोगुना टैक्स लगाया गया, तो अमेरिकी बाजारों में आम जरूरत की चीजें रातों-रात बेहद महंगी हो जाएंगी, जिससे अमेरिकी नागरिकों का बजट पूरी तरह बिगड़ जाएगा।

दबाव बनाकर अनुचित डील थोपने की अमेरिकी चाल होगी फेल वैश्विक व्यापार विशेषज्ञों और थिंक-टैंक जीटीआरआई (GTRI) का मानना है कि अमेरिका इस कड़े कानून का डर दिखाकर भारत से अपने पक्ष में व्यापारिक समझौते (Trade Deals) हड़पना चाहता है। अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के चेयरमैन ए शक्तिवेल ने स्पष्ट किया कि यह बिल केवल भारत को डराकर रूसी तेल की खरीद रुकवाने और रियायतें ऐंठने का एक जरिया है। लेकिन वाशिंगटन यह भूल रहा है कि किफायती और गुणवत्तापूर्ण भारतीय आयात के बिना उसकी अपनी आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) पूरी तरह ध्वस्त हो सकती है।

अंतिम मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास पहुंचा बिल, भारतीय निर्यातक सतर्क फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस (FIEO) के महानिदेशक अजय सहाय के मुताबिक, ऐसे विधेयकों से व्यापारिक गलियारों में अनिश्चितता का माहौल जरूर बनता है। अमेरिकी संसद से पारित होने के बाद अब यह बिल अंतिम मंजूरी के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति के पास भेजा गया है। इस बीच, भारतीय निर्यातक सतर्क हैं और संभावित नुकसान से बचने के लिए समय से पहले ही अपने शिपमेंट भेजने की रणनीति बना रहे हैं।

वैश्विक बाजार में भारत के पास मौजूद हैं कई विकल्प आज के दौर में भारत किसी एक देश के बाजार पर निर्भर नहीं है। यदि अमेरिका भारतीय उत्पादों के आयात को महंगा बनाकर अपने दरवाजे बंद करने की कोशिश करता है, तो भारत के पास यूरोप, मध्य पूर्व और एशिया के अन्य बड़े बाजारों में अपने सामान को निर्यात करने के पर्याप्त विकल्प मौजूद हैं। ऐसे में भारत को आर्थिक रूप से ब्लैकमेल करने की अमेरिकी कोशिश उसी के लिए गले की हड्डी साबित हो सकती है।

 

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