
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपनी चुनावी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में कांग्रेस के भीतर भी भारी सरगर्मी देखी जा रही है। प्रदेश स्तरीय संगठन में चुनाव से ठीक पहले एक बड़े राजनीतिक फेरबदल की पटकथा लिखी जा चुकी है। सबसे ज्यादा सस्पेंस प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय की कुर्सी को लेकर बना हुआ है। सियासी गलियारों में चर्चा जोरों पर है कि क्या पार्टी आलाकमान ऐन चुनाव के मुहाने पर यूपी में नेतृत्व का चेहरा बदलने जा रहा है। हाल ही में यूपी कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने भी इस बात के संकेत दिए थे कि प्रदेश अध्यक्ष के पद को लेकर अंतिम फैसला पूरी तरह केंद्रीय नेतृत्व के अधिकार क्षेत्र में है।
अजय राय के भविष्य पर क्यों गहराया संशय?
अजय राय को करीब तीन साल पहले अगस्त 2023 में यूपी कांग्रेस की कमान सौंपी गई थी। इसके बाद उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में वाराणसी सीट से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ मोर्चा भी संभाला था। हालांकि, पार्टी के भीतर एक धड़े का मानना है कि चूंकि मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में ही पिछले काफी समय से चुनावी तैयारियां चल रही हैं, ऐसे में ऐन वक्त पर संगठन का मुखिया बदलना एक बड़ा और जोखिम भरा फैसला हो सकता है। वहीं दूसरी ओर, पार्टी आलाकमान आगामी चुनाव के मद्देनजर राज्य में सामाजिक और जातीय समीकरणों को नए सिरे से साधने की गंभीर योजना बना रहा है, जिसके चलते बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है।
रेस में सबसे आगे आराधना मिश्रा ‘मोना’ का नाम
यदि आलाकमान अजय राय की जगह नए चेहरे पर दांव लगाता है, तो इस दौर में सबसे मजबूत दावेदार के रूप में कांग्रेस विधायक और विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा ‘मोना’ का नाम सामने आ रहा है। प्रतापगढ़ की चर्चित रामपुर खास सीट से तीन बार की विधायक आराधना मिश्रा कांग्रेस के दिग्गज व वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी की बेटी हैं। उनके पास यूपी की जमीनी राजनीति और संगठन का लंबा अनुभव है। उनकी दावेदारी को उस वक्त और बल मिला जब यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम की प्रमोद तिवारी और आराधना मिश्रा से हुई हालिया मुलाकात की तस्वीरें और खबरें सुर्खियों में आईं।
ब्राह्मण चेहरे के साथ OBC और मुस्लिम बैलेंस का नया मॉडल
कांग्रेस आलाकमान सिर्फ एक ब्राह्मण चेहरे पर दांव लगाने तक सीमित नहीं रहना चाहता। जून में राजेंद्र पाल गौतम के यूपी प्रभारी बनने के बाद से ही संगठन में ओबीसी और मुस्लिम चेहरों को अहम भूमिका देने पर मंथन चल रहा है। इस सिलसिले में इमरान प्रतापगढ़ी और सीतापुर से सांसद राकेश राठौर के नामों पर भी विचार हो चुका है। पार्टी एक नए सांगठनिक फार्मूले पर काम कर सकती है, जिसके तहत एक प्रदेश अध्यक्ष (ब्राह्मण चेहरा) के साथ-साथ एक ओबीसी और एक मुस्लिम नेता को ‘कार्यकारी अध्यक्ष’ बनाया जा सकता है। इस त्रिस्तरीय मॉडल के जरिए कांग्रेस एक ही झटके में सभी प्रमुख सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व देकर एक बड़ा राजनीतिक संदेश देने की फिराक में है।
क्या होगा अजय राय का अगला कदम?
अगर संगठन में यह बड़ा बदलाव होता है, तो सबसे बड़ा सवाल यही है कि अजय राय की अगली भूमिका क्या होगी। कयास लगाए जा रहे हैं कि उन्हें राष्ट्रीय टीम या एआईसीसी (AICC) में कोई अहम जिम्मेदारी दी जा सकती है या फिर वे पूरी तरह विधानसभा चुनाव पर ध्यान केंद्रित करेंगे। हाल ही में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अजय राय से व्यक्तिगत मुलाकात की थी, जिसके बाद इन चर्चाओं ने और जोर पकड़ लिया है। इस बीच, अजय राय ने खुद वाराणसी की अपनी परंपरागत सीट से विधानसभा चुनाव लड़ने की मंशा जाहिर कर साफ कर दिया है कि वे मैदान में पूरी तरह डटे रहने वाले हैं।













