
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। कांग्रेस द्वारा उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी में किए गए बड़े संगठनात्मक बदलाव के बाद सूबे की राजनीति में जुबानी जंग छिड़ गई है। पार्टी ने आराधना मिश्रा ‘मोना’ को उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है, जबकि सहारनपुर से सांसद इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। कांग्रेस के इस फैसले पर योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर का तीखा बयान सामने आया है। राजभर ने कांग्रेस और सपा दोनों को खुली चुनौती देते हुए किसी मुस्लिम नेता को मुख्यमंत्री पद का प्रत्याशी घोषित करने की मांग कर डाली है।
‘सपा और कांग्रेस ने मुस्लिम समाज के वोटों का सिर्फ इस्तेमाल किया’
शनिवार (3 अक्टूबर, 2026) को मीडिया से बात करते हुए मंत्री ओपी राजभर ने कांग्रेस के इस नए संगठन विस्तार को पूरी तरह बेअसर करार दिया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में आराधना मिश्रा या इमरान मसूद को पद देने से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है। राजभर ने तंज कसते हुए कहा, “अगर कांग्रेस वास्तव में अल्पसंख्यकों की हितैषी है, तो उसे आगामी चुनाव में किसी मुस्लिम नेता को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करना चाहिए।” यही सलाह उन्होंने अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी को भी दी। राजभर ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और सपा दोनों ही राजनीतिक दलों ने दशक दर दशक मुस्लिम समुदाय का भारी वोट हासिल किया है, लेकिन जब नेतृत्व और सत्ता सौंपने की बात आती है तो वे पीछे हट जाते हैं।
महिला आरक्षण बिल के मुद्दे पर सपा और कांग्रेस को घेरा
आराधना मिश्रा ‘मोना’ को यूपी कांग्रेस की कमान सौंपे जाने पर महिला राजनीति के संदर्भ में हमला बोलते हुए राजभर ने अतीत की घटनाओं को याद दिलाया। उन्होंने कहा कि यह वही कांग्रेस और समाजवादी पार्टी हैं, जिन्होंने संसद में महिलाओं को अधिकार देने वाले ‘महिला आरक्षण बिल’ का पुरजोर विरोध किया था। उन्होंने सवाल खड़ा किया कि जब इन दलों ने संवैधानिक रूप से महिलाओं को आरक्षण देने की नीति का विरोध किया, तो अब ये किस मुंह से महिलाओं के बीच जाकर अपने लिए वोट मांगेंगे?
‘जागरूक महिलाएं मांगेंगी जवाब, चुनाव में उठेगा यह मुद्दा’
कैबिनेट मंत्री ने कहा कि आज देश और प्रदेश की महिलाएं पूरी तरह जागरूक हो चुकी हैं और वे इन राजनीतिक दलों के दोहरे चरित्र को अच्छी तरह समझती हैं। चुनाव प्रचार के दौरान महिलाएं खुद इनसे सवाल करेंगी कि जब सदन में महिला आरक्षण का बिल पारित हो रहा था, तब इन्होंने समर्थन करने के बजाय विरोध क्यों किया था। राजभर ने स्पष्ट किया कि भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी दल आगामी चुनावों में महिला आरक्षण बिल के विरोध को जनता और महिला मतदाताओं के बीच एक प्रमुख मुद्दा बनाकर उठाएंगे।














