यूसुफ पठान को बड़ा तोहफा: टीएमसी से अलग होने के दो महीने बाद गुजरात सरकार ने दी विवादित जमीन, जानें पूरा मामला

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) से अलग होने के महज दो महीने के भीतर ही पूर्व भारतीय क्रिकेटर और सांसद यूसुफ पठान को एक बड़ा राजनीतिक तोहफा मिला है। अंग्रेजी अखबार में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, गुजरात सरकार ने पूर्व क्रिकेटर को वह बहुचर्चित और विवादित 978 वर्ग मीटर जमीन देने का फैसला किया है, जिसके संबंध में उन्हें दो साल पहले अतिक्रमण का नोटिस थमाया गया था। यह पूरी जमीन वडोदरा नगर निगम (VMC) के अधिकार क्षेत्र में आती है, जिस पर वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार का नियंत्रण है।

वडोदरा नगर निगम (VMC) की स्टैंडिंग कमेटी में पास हुआ प्रस्ताव

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वडोदरा नगर निगम के भूमि संपदा विभाग द्वारा तैयार किया गया जमीन आवंटन से जुड़ा यह प्रस्ताव सोमवार को सिविक बॉडी की स्टैंडिंग कमेटी के एजेंडा में आधिकारिक तौर पर पारित कर दिया गया।

  • सरकारी प्रस्ताव का आधार: VMC का यह नया प्रस्ताव पूरी तरह से गुजरात सरकार के एक पिछले प्रस्ताव पर आधारित है, जिसमें यूसुफ पठान को यह जमीन सौंपने की मंजूरी दी गई थी।

  • हाईकोर्ट से अपील वापस लेना: राज्य सरकार का यह प्रस्ताव 13 अगस्त का था जो 29 अगस्त को VMC के पास पहुंचा। दिलचस्प बात यह है कि इसके ठीक दो दिन पहले ही यूसुफ पठान ने अपने मालिकाना हक के दावे को खारिज किए जाने के खिलाफ गुजरात हाईकोर्ट में दायर अपनी अपील वापस ले ली थी।

जमीन के बंटवारे और आवंटन का पूरा गणित

सरकारी और निगम के प्रस्ताव के मुताबिक, इस 978 वर्ग मीटर की कुल जमीन को दो हिस्सों में बांटा गया है:

  • तोहफे में मिला हिस्सा: जमीन का 500 वर्ग मीटर हिस्सा यूसुफ पठान को बिना किसी लागत के ‘तोहफे’ के तौर पर दिया जाएगा।

  • रियायती दर वाला हिस्सा: बाकी बचे 478 वर्ग मीटर हिस्से को 55 प्रतिशत की भारी रियायती दर पर उन्हें आवंटित किया जाएगा।

प्रस्ताव में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इस विशेष व्यवस्था को भविष्य के लिए ‘एक मिसाल’ (Precedent) के तौर पर नहीं गिना जाएगा। इसके बदले में राज्य का राजस्व विभाग, सिविक बॉडी (VMC) को उतनी ही कीमत के बराबर की दूसरी जमीन आवंटित करेगा। यह विवादित जमीन वडोदरा के तंडालजा इलाके में पठान परिवार के प्रसिद्ध ‘सफेद बंगले’ के बिल्कुल पास स्थित है।

जमीन विवाद का पुराना इतिहास और राजनीतिक गलियारों में चर्चा

यह पूरा कानूनी और प्रशासनिक मामला साल 2012 का है, जब यूसुफ पठान ने वडोदरा नगर निगम से 99 साल की लंबी लीज पर इस जमीन की मांग की थी। शुरुआत में निगम ने इसे मंजूरी भी दे दी थी, लेकिन साल 2014 में सरकार ने इस फैसले को पूरी तरह निरस्त कर दिया था।

इसके बावजूद पठान ने उस जमीन पर कब्जा बनाए रखा। जब उन्हें प्रशासन की तरफ से अतिक्रमण का नोटिस मिला, तो वह कानूनी लड़ाई लड़ते हुए गुजरात हाईकोर्ट पहुंच गए। साल 2025 में हाईकोर्ट से झटका मिलने के बाद वह सुप्रीम कोर्ट का रुख कर चुके थे।

इस बीच, राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदले और साल 2024 में यूसुफ पठान टीएमसी के टिकट पर सांसद चुने गए। हालांकि, साल 2026 में उनके टीएमसी से अलग होने के बाद से ही गुजरात सरकार के उनके प्रति नरम रुख अपनाने को लेकर राजनीतिक हलकों में तरह-तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

 

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