लखनऊ। उत्तर प्रदेश में उत्तर प्रदेश विधान परिषद (एमएलसी) की 11 सीटों पर होने वाले अहम चुनावों से ठीक पहले मतदाता सूची (Voter List) में सामने आई गड़बड़ियों ने सियासी गलियारों में भूचाल ला दिया है। इलाहाबाद-झांसी स्नातक एमएलसी निर्वाचन क्षेत्र की वोटर लिस्ट में ऐसे अजब-गजब और आपत्तिजनक नाम दर्ज मिले हैं, जिन्हें देखकर हर कोई दंग रह गया है। सूची में एक मतदाता का नाम ‘राम ने यादव को मारा’ और उसके पिता का नाम ‘मूर्खचंद यादव’ दर्ज पाया गया है। इसके अलावा फतेहपुर में भी मतदाता के कॉलम में ‘अली के पास है’ नाम दर्ज होने का मामला सामने आया है। चुनाव से ठीक पहले इस तरह की घोर लापरवाही ने प्रशासनिक व्यवस्था और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने लिया सख्त संज्ञान, झांसी कमिश्नर से माँगी रिपोर्ट
मामले के तूल पकड़ते ही उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने इस गंभीर चूक का कड़ा संज्ञान लिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर आधिकारिक जानकारी साझा करते हुए बताया, ‘इलाहाबाद-झांसी स्नातक खंड निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में कुछ अजीब से नामों के मिलने की सूचना सोशल मीडिया के माध्यम से मिली है। मंडलायुक्त (कमिश्नर) झांसी, जो इस निर्वाचन क्षेत्र के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी हैं, को तत्काल इस मामले की जांच कर रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दे दिए गए हैं।’
23 अक्टूबर को मतदान, 27 अक्टूबर को आएंगे नतीजे
बता दें कि राज्य की 5 स्नातक और 6 शिक्षक निर्वाचन सीटों के लिए 23 अक्टूबर को सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक वोटिंग कराई जा रही है। इन चुनावों के लिए कुल 2,697 मतदान केंद्र बनाए गए हैं, जहां 14 लाख 81 हजार 310 मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं। इन सभी सीटों पर डाले गए वोटों की गिनती 27 अक्टूबर को की जाएगी। मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 6 दिसंबर 2026 को समाप्त हो रहा है।
आंकड़ों के मुताबिक, लखनऊ स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में सबसे अधिक 3,13,531 वोटर हैं, इसके बाद वाराणसी स्नातक में 2,88,622 और इलाहाबाद-झांसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में 2,64,233 मतदाता पंजीकृत हैं।
मैदान में 152 उम्मीदवार, किन सीटों पर हो रहा है मुकाबला?
इस चुनाव में कुल 152 उम्मीदवार अपनी राजनीतिक किस्मत आजमा रहे हैं। जिन 11 सीटों पर चुनाव हो रहा है, उनमें 5 स्नातक और 6 शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं:
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5 स्नातक निर्वाचन सीटें: लखनऊ मंडल, वाराणसी मंडल, आगरा मंडल, मेरठ मंडल और इलाहाबाद-झांसी मंडल।
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6 शिक्षक निर्वाचन सीटें: लखनऊ मंडल, वाराणसी मंडल, आगरा मंडल, मेरठ मंडल, बरेली-मुरादाबाद मंडल और गोरखपुर-फैजाबाद मंडल।
बीजेपी और सपा के बीच नाक की लड़ाई, मंत्रियों ने झोंकी ताकत
विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हो रहे इन एमएलसी चुनावों को दोनों प्रमुख दलों—भारतीय जनता पार्टी (BJP) और समाजवादी पार्टी (SP) के लिए ‘सेमीफाइनल’ और नाक की लड़ाई माना जा रहा है। यही वजह है कि प्रचार थमने से पहले योगी सरकार के एक दर्जन से अधिक मंत्रियों, 100 से ज्यादा सांसदों और विधायकों ने मैदान में पूरी ताकत झोंक रखी थी।
पिछली बार के चुनावों में सपा ने बाजी मारते हुए 6 सीटें जीती थीं, जबकि भाजपा के खाते में 5 सीटें आई थीं। इस बार भाजपा की नजरें ‘डबल डिजिट’ (10 या उससे अधिक सीटें) हासिल करने पर हैं, जिसके लिए खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मोर्चा संभालते हुए कई जिलों में ताबड़तोड़ जनसभाएं कीं। हालांकि, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कोई जनसभा तो नहीं की, लेकिन पार्टी के सांसदों, विधायकों और स्थानीय कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर चुनावी माहौल मजबूत करने की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी थी। बहरहाल, वोटिंग से ठीक पहले सामने आए इस वोटर लिस्ट विवाद ने चुनाव को और अधिक दिलचस्प बना दिया है।


















