
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की आहट के साथ ही राज्य की सियासत में एक बड़ा भूचाल आ गया है। पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में एक ऐसा कथित फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसने चुनाव आयोग से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हड़कंप मचा दिया है। दावा किया जा रहा है कि वोटर आईडी का EPIC नंबर, उम्र और लिंग सब कुछ वही रहा, लेकिन मतदाता का नाम और उसके पिता का नाम रातों-रात बदल दिया गया।
हैरान करने वाली बात यह है कि इस गड़बड़ी का शिकार बने सभी 13,150 मतदाता एक ही समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। इसके अलावा सैकड़ों वोटरों के नाम काटने और हजारों नए नाम संदिग्ध तरीके से जोड़ने के आरोप लगे हैं। मामला सामने आने के बाद चुनाव आयोग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित अधिकारियों को काम से हटा दिया है और अब पूरे उत्तर प्रदेश की वोटर लिस्ट की गहन जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं।
एक वायरल वीडियो से सुलझी धांधली की गुत्थी
इस पूरे मामले के खुलासे की कहानी बेहद दिलचस्प है। 13 अक्टूबर को पीलीभीत के एक स्थानीय नागरिक अपना EPIC नंबर लेकर जनसेवा केंद्र पर नया वोटर आईडी कार्ड निकलवाने पहुंचे। जैसे ही कार्ड प्रिंट होकर बाहर आया, उनके होश उड़ गए। कार्ड पर फोटो और नंबर तो उनका ही था, लेकिन नाम और पिता का नाम किसी दूसरे व्यक्ति का दर्ज था। जबकि 10 अप्रैल 2026 को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में उनका विवरण बिल्कुल सही था।
इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसके बाद कांग्रेस नेता कुमुद गंगवार ने इसकी पड़ताल करने का फैसला किया। शुरुआती जांच में जब और भी गड़बड़ियां मिलने लगीं, तो मामले की गहराई तक जाने के लिए 53 लोगों की एक विशेष टीम गठित की गई।
53 लोगों की टीम और 96 घंटे का नॉन-स्टॉप ऑपरेशन
कांग्रेस नेताओं का दावा है कि इस टीम ने लगातार 96 घंटे तक दिन-रात काम किया और पीलीभीत सदर सीट के सभी 419 बूथों पर दर्ज कुल 3,48,937 मतदाताओं के डेटा की स्क्रूटनी की। इस मैराथन जांच के बाद कुल 16,554 मतदाताओं से जुड़ी तीन बड़ी विसंगतियां सामने आईं:
-
13,150 वोटरों के नाम बदले: EPIC नंबर और क्रम संख्या वही रही, लेकिन नाम और पिता का नाम बदल दिया गया। पार्टी का आरोप है कि ये सभी 13,150 मतदाता मुस्लिम समुदाय के हैं।
-
804 मतदाताओं के नाम कटे: आरोप है कि इन वोटरों के नाम सूची से गायब कर दिए गए, जिनमें से अधिकतर एक खास वर्ग के हैं।
-
2,600 नए नाम जुड़े: कई बूथों पर अचानक बड़ी संख्या में नए मतदाता पंजीकृत कर दिए गए।
बिना OTP और बिना फॉर्म-8 के कैसे बदल गए रिकॉर्ड?
पड़ताल में यह बात सामने आई कि ये बदलाव मुख्य रूप से जुलाई से सितंबर 2026 के बीच किए गए। कुछ रिकॉर्ड्स में तो 2 सितंबर 2026 को रात 9 बजकर 26 मिनट पर एंट्री दर्ज पाई गई है।
इस पर सवाल उठाते हुए कुमुद गंगवार ने कहा कि 600 से अधिक प्रभावित मतदाताओं ने बाकायदा शपथपत्र देकर यह पुष्टि की है कि उन्होंने नाम संशोधन के लिए कोई ‘फॉर्म-8’ नहीं भरा था। इसी तरह, जिनका नाम काटा गया उन्होंने भी ‘फॉर्म-7’ जमा नहीं किया था।
ऑनलाइन रिकॉर्ड में मतदाताओं के मोबाइल नंबर के आखिरी चार अंक भी बदले हुए मिले हैं। सवाल यह उठ रहा है कि जब किसी भी बदलाव के लिए पंजीकृत मोबाइल पर OTP की आवश्यकता होती है, तो मतदाताओं के पास कोई मैसेज क्यों नहीं आया? आशंका जताई जा रही है कि प्रशासनिक लॉगिन (Administrative Login) का गलत इस्तेमाल करके सीधे डेटाबेस में हेरफेर किया गया है।
नए नामों का फर्जीवाड़ा और ग्राउंड वेरिफिकेशन की हकीकत
आरोप यह भी हैं कि जिन 2,600 नए नामों को जोड़ा गया है, उनमें से कई जमीनी स्तर पर मौजूद ही नहीं हैं। टीम ने दावा किया कि जब जोड़े गए 500 नए नामों की भौतिक जांच की गई, तो वे दिए गए पते पर नहीं मिले।
वहीं, हटाए गए 804 नामों में से जिन 25 प्रतिशत लोगों से संपर्क किया गया, उन्होंने साफ कहा कि उन्होंने नाम हटाने के लिए कभी कोई आवेदन नहीं दिया था। नियमानुसार, किसी अन्य व्यक्ति की आपत्ति पर नाम हटाने से पहले संबंधित मतदाता को नोटिस देकर अपना पक्ष रखने का अवसर देना अनिवार्य होता है, जिसका पालन नहीं किया गया।
FIR दर्ज कराने की तैयारी, हाईकोर्ट जाएगा मामला
इस कथित घोटाले के उजागर होने के बाद कांग्रेस ने कड़ा रुख अपनाया है। कुमुद गंगवार ने तत्कालीन एसडीएम, जिलाधिकारी और संबंधित निर्वाचन अधिकारियों के खिलाफ प्रशासनिक स्तर पर तहरीर दी है।
पार्टी का कहना है कि अगर स्थानीय पुलिस इस मामले में कानूनी कार्रवाई नहीं करती है, तो वे सत्र न्यायालय (Sessions Court) का दरवाजा खटखटाएंगे और जरूरत पड़ने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट तक लड़ाई लड़ेंगे। इसके अलावा, राज्यभर में इस तरह की वोटर लिस्ट विसंगतियों की जांच के लिए अभियान चलाया जाएगा।
चुनाव आयोग का बड़ा एक्शन: पूरे यूपी की वोटर लिस्ट होगी स्कैन
मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नवदीप रिणवा ने देर रात बड़ा एक्शन लिया। उन्होंने बताया कि पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र के संबंधित निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) और मतदाता पंजीकरण केंद्र (VTEC) के ऑपरेटर को तुरंत प्रभाव से मतदाता सूची के काम से हटा दिया गया है।
दोनों जिम्मेदार कर्मियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है और उनके खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके साथ ही, चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों की मतदाता सूची में EPIC नंबर, नाम और अन्य विवरणों की गहन जांच करें और 2 दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपें।
















