
नई दिल्ली। दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में दीवारों पर विवादित नारे लिखे जाने का मामला सामने आया है। इन नारों में कश्मीर और शरजील इमाम को ‘फ्री’ करने की मांग की गई है। इसके अलावा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS), अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और विश्वविद्यालय के कुलपति (VC) के खिलाफ भी नारे लिखे जाने की जानकारी सामने आई है। मामला सामने आने के बाद विवाद शुरू हो गया है। एबीवीपी ने इन नारों पर कड़ी आपत्ति जताई है। फिलहाल, इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
दीवारों पर लिखे नारों को लेकर विवाद
जामिया मिल्लिया इस्लामिया परिसर में लिखे गए नारों को लेकर छात्र संगठनों के बीच विवाद की स्थिति बन गई है। सामने आई जानकारी के मुताबिक, दीवारों पर कश्मीर और शरजील इमाम की रिहाई की मांग से जुड़े नारे लिखे गए हैं। साथ ही आरएसएस, एबीवीपी और कुलपति के खिलाफ भी आपत्तिजनक नारे लिखे जाने की बात कही गई है।
एबीवीपी ने इन नारों पर विरोध जताते हुए कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि नारे किसने लिखे और इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से क्या कार्रवाई की गई है। प्रशासन की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
UAPA के तहत गिरफ्तार हुआ था शरजील इमाम
शरजील इमाम को दिल्ली में फरवरी 2020 में हुई हिंसा से जुड़े मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत गिरफ्तार किया गया था। अभियोजन पक्ष ने उन पर हिंसा की कथित साजिश में भूमिका निभाने और भड़काऊ भाषण देने के आरोप लगाए हैं।
फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा में 53 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 700 से अधिक लोग घायल हुए थे। हिंसा से पहले नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को लेकर विरोध प्रदर्शन चल रहे थे। प्रदर्शन के दौरान कई इलाकों में हिंसा भड़क गई थी।
शरजील इमाम पर क्या हैं आरोप?
समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, शरजील इमाम को इस मामले में 25 अगस्त 2020 को गिरफ्तार किया गया था। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि उन्होंने 13 दिसंबर 2019 को जामिया मिल्लिया इस्लामिया और 16 दिसंबर 2019 को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में दिए गए भाषणों में असम और पूर्वोत्तर भारत को देश के बाकी हिस्सों से अलग करने की बात कही थी।
ये आरोप न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं। मामले में आरोपों और न्यायालय के निष्कर्षों के बीच अंतर करना जरूरी है।
शादी में शामिल होने के लिए मिली थी अंतरिम जमानत
शरजील इमाम को हाल ही में अपने चचेरे भाई की शादी में शामिल होने के लिए 4 से 10 अक्टूबर तक सात दिन की अंतरिम जमानत दिए जाने की जानकारी सामने आई थी। यह राहत सीमित अवधि के लिए थी।
जामिया यूनिवर्सिटी की दीवारों पर लिखे गए नारों के मामले में अब तक नारे लिखने वालों की पहचान और प्रशासन की कार्रवाई को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। विश्वविद्यालय प्रशासन की प्रतिक्रिया और आगे उठाए जाने वाले कदमों पर इस मामले में नजर रहेगी।

















