बड़ी खबर: मानहानि मामले में राहुल गांधी को मिली बड़ी राहत, सुलतानपुर कोर्ट ने किया बरी; जानिए 6 साल पुराने केस की पूरी टाइमलाइन

कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बड़ी कानूनी राहत मिली है। सुलतानपुर की विशेष एमपी-एमएलए (MP-MLA) अदालत ने साल 2018 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के खिलाफ की गई आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़े मानहानि के एक मामले में राहुल गांधी को पूरी तरह से बरी (दोषमुक्त) कर दिया है। इस केस के बहुचर्चित फैसले के वक्त राहुल गांधी खुद सुलतानपुर की विशेष अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित थे।

राहुल गांधी के अधिवक्ता काशी प्रसाद शुक्ला ने अदालत के फैसले की पुष्टि करते हुए बताया कि कोर्ट ने सुनवाई और साक्ष्यों के आधार पर कांग्रेस नेता को सभी आरोपों से दोषमुक्त करार दिया है।

अमित शाह पर टिप्पणी से शुरू हुआ था विवाद

यह पूरा विवाद साल 2018 में कर्नाटक विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान शुरू हुआ था। बेंगलुरु में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने बीजेपी के तत्कालीन अध्यक्ष अमित शाह को लेकर टिप्पणी की थी। इसके बाद यूपी के सुलतानपुर में बीजेपी नेता व जिला सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष विजय मिश्रा ने राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मुकदमा दायर किया था।

मानहानि केस की पूरी टाइमलाइन (2018 से 2026 तक)

  • साल 2018:

    • 8 मई: राहुल गांधी ने बेंगलुरु में चुनाव प्रचार के दौरान अमित शाह पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी की।

    • 4 अगस्त: बीजेपी नेता विजय मिश्रा ने सुलतानपुर की अदालत में राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि की परिवाद शिकायत दर्ज कराई।

  • साल 2023:

    • 27 नवंबर: सुलतानपुर की अदालत ने राहुल गांधी को मुकदमे का सामना करने के लिए समन जारी कर तलब किया।

  • साल 2024:

    • 20 फरवरी: राहुल गांधी अदालत में पेश हुए और सरेंडर के बाद उन्हें जमानत मिल गई।

    • 26 जुलाई: राहुल गांधी ने कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना बयान दर्ज कराया।

    • 9 अक्टूबर: शिकायतकर्ता बीजेपी नेता विजय मिश्रा की अदालत में गवाही दर्ज की गई।

  • साल 2025:

    • 28 फरवरी: शिकायतकर्ता के पहले गवाह अनिल मिश्रा की गवाही दर्ज हुई।

    • 8 दिसंबर: दूसरे गवाह रामचंद्र दुबे की गवाही कोर्ट में दर्ज की गई।

  • साल 2026 (निर्णायक मोड़):

    • 20 फरवरी: सीआरपीसी (CrPC) की धारा 313 के तहत राहुल गांधी का अंतिम बयान दर्ज किया गया।

    • 12 मार्च: शिकायतकर्ता ने राहुल गांधी के वॉयस सैंपल के मिलान कराने की अर्जी कोर्ट में लगाई।

    • 21 मई: मजिस्ट्रेट कोर्ट से अर्जी खारिज होने के बाद शिकायतकर्ता ने इसे सेशन कोर्ट में चुनौती दी।

    • 15 जुलाई: एडीजे (ADJ) कोर्ट ने भी वॉयस सैंपल वाली निगरानी अर्जी खारिज कर दी।

    • 10 सितंबर: हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की बेंच ने भी वॉयस सैंपल की याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया।

    • 6 अक्टूबर: मामले में अंतिम बहस शुरू हुई।

    • 12 अक्टूबर: अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद केस की सुनवाई पूरी की।

    • 26 अक्टूबर: सुलतानपुर की विशेष MP-MLA कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए राहुल गांधी को बरी कर दिया।

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