Acid Sale Rules: एसिड हमलों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र को फटकार; कहा- गाइडलाइंस पूरी तरह से विफल, चार हफ्ते में मांगी रिपोर्ट

देशभर में तेजाब (एसिड) की खुलेआम बिक्री और एसिड हमलों की बढ़ती घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद गंभीर टिप्पणी की है। शीर्ष अदालत ने इस स्थिति को प्रशासनिक और नीतिगत विफलता करार देते हुए केंद्र सरकार को कड़े कदम उठाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि केवल कागजी सर्कुलर या सहानुभूतिपूर्ण भाषा में दिशानिर्देश जारी करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि बाजार में एसिड की अवैध बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध और कड़ा नियमन सुनिश्चित करना होगा।

‘बाजारों में तेजाब की आसान उपलब्धता हमारे आदेशों की विफलता’, सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी

सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ने एसिड हमलों के पीड़ितों के पुनर्वास और बिक्री नियमन से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि 2013 और 2015 में जारी ऐतिहासिक निर्देशों के बावजूद आज भी एसिड खुलेआम बिक रहा है। फोटो पहचान पत्र, पते का सत्यापन, खरीदने की वजह बताने और नाबालिगों को बिक्री पर रोक जैसे सख्त नियम होने के बाद भी तेजाब का बाजारों में आसानी से मिलना सुप्रीम कोर्ट के पिछले आदेशों के मूल उद्देश्य को ही खत्म कर रहा है।

केंद्र सरकार का पक्ष: सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने राज्यों की जवाबदेही बताई

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को सूचित किया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से सभी राज्यों को समय-समय पर एडवाइजरी और ‘मॉडल रूल्स’ भेजे गए हैं। हालांकि, इन नियमों को जमीनी स्तर पर लागू करने और निगरानी रखने की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है। उन्होंने शीर्ष अदालत को आश्वस्त किया कि केंद्र सरकार अब सख्त सजा के प्रावधानों के साथ नई और बेहद कड़ी गाइडलाइंस लाने पर गंभीरता से विचार कर रही है।

4 हफ्ते के भीतर मांगा विस्तृत हलफनामा, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर कार्रवाई का हिसाब तलब

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को चार सप्ताह के भीतर एक विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) और राज्यवार आंकड़ों के साथ हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने साफ तौर पर पूछा है कि:

  • देश भर में लाइसेंस प्राप्त एसिड विक्रेताओं की कुल संख्या कितनी है?

  • दुकानों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स का कितनी बार औचक निरीक्षण किया गया?

  • अवैध बिक्री के मामलों में कितनी FIR दर्ज की गईं और ई-कॉमर्स कंपनियों के खिलाफ क्या दंडात्मक कार्रवाई हुई?

पीड़ितों का मुफ्त इलाज और मुआवजा सुनिश्चित करे सरकार, 3 दिसंबर को होगी अगली सुनवाई

अदालत ने पीड़ितों के पुनर्वास पर चिंता जताते हुए स्पष्ट किया कि संविधान के तहत ‘सम्मान के साथ जीने के अधिकार’ में पीड़ितों का समुचित इलाज और पुनर्वास शामिल है। कोर्ट ने केंद्र से मुआवजा वितरण, CrPC की धारा 357C के तहत अस्पतालों में मुफ्त इलाज की स्थिति, और पीड़ितों के रोजगार व शिक्षा के लिए उठाए गए कदमों की पूरी जानकारी मांगी है। याचिकाकर्ताओं द्वारा इलाज से मना करने के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख 3 दिसंबर तय की है।

खबरें और भी हैं...

Leave a Comment

Are you human? Please solve:Captcha