
उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में मतदाता सूची में गंभीर धांधली और अनियमितता सामने आने के बाद निर्वाचन आयोग ने बेहद सख्त रुख अपनाया है. आयोग ने बड़ा कदम उठाते हुए अब पूरे प्रदेश (उत्तर प्रदेश) की मतदाता सूची की दोबारा गहन जांच कराने के निर्देश दिए हैं. चुनाव आयोग की ओर से सभी जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारियों और निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों को पूरी वोटर लिस्ट का नए सिरे से सत्यापन करने का फरमान जारी किया गया है.
फॉर्म 6, 7 और 8 के आवेदनों की होगी विशेष जांच
निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आदेशों के मुताबिक, मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान नए मतदाताओं का नाम जोड़ने, सूची से नाम हटाने और व्यक्तिगत विवरणों में संशोधन के लिए जमा किए गए फॉर्म-6, फॉर्म-7 और फॉर्म-8 की विशेष रूप से स्क्रूटनी की जाएगी. यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) को स्पष्ट हिदायत दी गई है कि मतदाता सूची में पाई गई किसी भी प्रकार की त्रुटि या धांधली को तत्काल दूर किया जाए और लापरवाही बरतने वाले किसी भी अफसर व कर्मचारी को बख्शा न जाए.
पीलीभीत के दो SDM सस्पेंड, VRC ऑपरेटर पर भी कसेगा शिकंजा
पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में गड़बड़ी की पुष्टि होने के बाद चुनाव आयोग ने एसडीएम मयंक गोस्वामी और एसडीएम हेमंत चौधरी को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का निर्देश दिया है. आयोग ने दोनों अधिकारियों को चार्जशीट सौंपने और अनुमति मिलने तक बहाली न करने के आदेश जारी किए हैं. इसके साथ ही वीआरसी (VRC) कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार की भूमिका की गहन जांच की जा रही है और उसके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में गंभीर धाराएं जोड़ी जा रही हैं.
पीलीभीत की चारों विधानसभा सीटों पर अलग से होगी स्क्रूटनी
चुनाव आयोग ने पीलीभीत जिले की चारों विधानसभा सीटों की मतदाता सूचियों की अलग-अलग और सघन जांच (स्क्रूटनी) कराने के निर्देश दिए हैं. जिला निर्वाचन अधिकारी को सात दिनों के भीतर अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट मुख्य निर्वाचन अधिकारी की संस्तुति के साथ आयोग को भेजनी होगी. इसमें यह देखा जाएगा कि नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया में नियमों का पालन हुआ है या नहीं. इसके अलावा आयोग ने जिले के पांच सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों (AERO) के खिलाफ हुई कार्रवाई की रिपोर्ट भी तीन दिनों के भीतर तलब की है.
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में यूपी में घटे 2.04 करोड़ वोटर
आगामी विधानसभा चुनावों से पहले उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में चलाए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान मतदाताओं की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है. पांचों राज्यों में कुल मतदाताओं की संख्या 18.71 करोड़ से घटकर 16.43 करोड़ (करीब 2.29 करोड़ की कमी) रह गई है. इसमें सबसे अधिक असर उत्तर प्रदेश में देखा गया है, जहां मतदाता सूची के सत्यापन और सुधार के बाद करीब 2.04 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से कम हुए हैं.















