
नई दिल्ली
बागी नेता सचिन पायलट पर कार्रवाई करते हुए कांग्रेस ने उन्हें सभी पदों से हटा दिया है। राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार में उप-मुख्यमंत्री रहे पायलट से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का जिम्मा भी ले लिया गया है। कांग्रेस के कई नेताओं ने पायलट को मनाने की बहुत कोशिश मगर वह नहीं माने। जिसके बाद कांग्रेस आलाकमान ने यह फैसला किया। दिल्ली से जयपुर गए रणदीप सुरजेवाला ने पायलट को हटाने का ऐलान किया। उनकी जगह पर ओबीसी नेता गोविंद सिंह डोटासरा को प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया है। सुरजेवाला ने यह ऐलान करते हुए पायलट को खूब कोसा। उन्होंने यह जता दिया कि पार्टी ने पायलट को मनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
सुरजेवाला ने कहा- हम मनाते रहे वो माने ही नहीं
मीडिया के सामने सुरजेवाला ने कहा, ‘सचिन पायलट और कांग्रेस के कुछ मंत्री और विधायक साथी भाजपा के षडयंत्र में उलझकर कांग्रेस की सरकार को गिराने की साजिश में शामिल हो गए।’ उन्होंने कहा, “पिछले 72 घंटे से सोनिया गांधी, राहुल गांधी समेत कांग्रेस के आला नेतृत्व ने सचिन पायलट से, साथी मंत्रियों से, विधायकों से संपर्क करने की कोशिश की। कांग्रेस आलाकमान ने सचिन पायलट से खुद आधा दर्जन बात की। कांग्रेस कार्यसमिति के वरिष्ठ सदस्यों ने दर्जनों बार बात की। हमने अपील की कि पायलट और बाकी विधायकों के लिए दरवाजे खुले हैं, वापस आइए। मतभेद दूर करेंगे।”
छोटी उम्र में दी राजनीतिक ताकत
रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सचिन पायलट को कांग्रेस में दी गई जिम्मेदारियों का भी हवाला किया. उन्होंने कहा, ”सचिन पायलट को छोटी उम्र में जो राजनीतिक ताकत दी गई, शायद किसी को नहीं दी गई. 2003 में सचिन पायलट राजनीति में आए, इसके बाद 26 साल की उम्र में 2004 में उन्हें कांग्रेस ने सांसद बनाया. 32 साल की उम्र में केंद्र में मंत्री बनाया. 34 साल की उम्र में प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी. 40 साल की उम्र में उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी दी है. सोनिया और राहुल गांधी का व्यक्तिगत आशीर्वाद उनके साथ था, इसलिए इतना दिया गया.”
ये तमाम बातें रखते हुए रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि सचिन पायलट ने इतना सबकुछ मिलने के बावजूद कांग्रेस सरकार गिराने की साजिश में हिस्सा लिया, जो बर्दाश्त नहीं किया जा सकता. इसीलिए सचिन पायलट को उपमुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने का निर्णय लिया गया है.















