Corona Vaccine: कब, कैसे और किसको मिलेगा कोरोना का टीका, WHO ने दी ये खास जानकारी !

WHO on Coronavirus vaccine: कोरोना वायरस की वैक्‍सीन को लेकर अमीर देशों के बीच जैसी होड़ लगी है, उससे बाकी देशों के लिए संकट गहराता जा रहा है। वैक्‍सीन निर्माताओं से सीधी डील कर कई पश्चिमी देश शुरुआती डोज पर कब्‍जा करने लगे हैं। इससे कम आय वाले देशों को वैक्‍सीन न मिल पाने का डर बढ़ गया है। WHO ने इस चिंता को दूर करने के लिए जॉइंट प्रोक्‍योरमेंट प्रोग्राम COVAX चलाया है। इससे वैक्‍सीन के डेवलपमेंट, प्रॉडक्‍शन और डिस्‍ट्रीब्‍यूशन में सबकी सहभागिता सुनिश्चित होगी। वैक्‍सीन दुनिया के हर देश को मिले, इसके लिए WHO ने दो चरणों में कोरोना वैक्‍सीन अलॉट करने का प्रस्‍ताव दिया है।

WHO ने सामने रखे दो विकल्‍प

WHO चाहता है कि वैक्‍सीन किस देश को मिले, इसका फैसला दो आधार पर हो। या तो दुनिया के हर देश को उसकी आबादी के हिसाब से वैक्‍सीन की डोज दी जाएं। दूसरा रास्‍ता ये है कि देशों को उनकी आबादी को खतरे के आधार पर आंका जाए और फिर प्राथमिकता के लिहाज से वैक्‍सीन बांटी जाए।

किनको सबसे पहले मिल सकता है टीका?

WHO के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस का कहना कि फ्रंटलाइन हेल्‍थ वर्कर्स को टीकाकरण में प्राथमिकता मिलनी चाहिए। इसके अलावा 65 साल से ज्‍यादा उम्र के लोगों और ज्‍यादा खतरे वाली आबादी को वैक्‍सीन मिले। टेड्रोस के अनुसार, वैक्‍सीन अलॉकेशन के पहले चरण में 20% आबादी सुरक्षित हो सकती है। उन्‍होंने कहा कि सबसे रिस्‍क वाले लोगों को सुरक्षित किए बिना हेल्‍थ सिस्‍टम स्थिर नहीं किए जा सकते, न ही ग्‍लोबल इकनॉमी पटरी पर लौट पाएगी।

कैसे हो रहा सबको वैक्‍सीन देने का इंतजाम?

WHO ने इसी हफ्ते अमीर देशों को 31 अगस्‍त से पहले COVAX का हिस्‍सा बनने का न्‍योता दिया है। अबतक 75 देशों ने इस कार्यक्रम में भागीदारी पर हामी भरी है। यह प्रोग्राम विकसित और विकासशील देशों में वैक्‍सीन मैनुफैक्‍चरर्स के साथ मिलकर काम कर रहा है। COVAX का मकसद है कि दुनिया के हर देश को कोरोना की वैक्‍सीन बनने पर समान अधिकार मिले।

ट्रायल पूरा नहीं, हो गई डील

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वैक्‍सीन ट्रायल की रेस में आगे चल रही कंपनियों से विकसित देश सीधे सौदेबाजी कर रहे हैं। अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, यूरोपियन यूनियन के कई देश सीधे मैनुफैक्‍चरर्स से डील कर चुके हैं। अभी तक ग्‍लोबली किसी वैक्‍सीन को WHO ने अप्रूवल नहीं दिया है। इसके बावजूद AstraZeneca, Pfizer, Johnson & Johnson और Moderna वैक्‍सीन की करोड़ों डोज बुक हो चुकी हैं।

दोबारा वहीं गलती न करें कुछ देश : WHO

कोरोना के संभावित टीकों की करोड़ों डोज के सौदे हो चुके हैं। WHO इससे चिंतित है। टेड्रोस ने कहा है कि ‘वैक्‍सीन राष्‍ट्रवाद से महामारी और दुनिया की असमानता और बढ़ेगी।’ उन्‍होंने कहा कि देशों ने कोरोना महामारी की शुरुआत में जो गलतियां कीं, उसे दोहराना नहीं चाहिए। जब महामारी शुरू हुई थी तो कुछ देशों ने PPE किट्स, दवाओं और वेंटिलेटर्स वगैरह की सप्‍लाई पर कब्‍जा कर लिया था।

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