
उत्तर प्रदेश में मकान, दुकान या गोदाम किराये पर लेने और देने वालों के लिए एक बड़ी और राहतभरी खबर है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में प्रदेश की किरायेदारी व्यवस्था को बेहद आसान, पारदर्शी और किफायती बनाने के लिए महत्वपूर्ण फैसला लिया गया है। सरकार ने 10 वर्ष तक की अवधि वाले किरायेदारी विलेखों (Rent Agreements) पर लागू होने वाले स्टांप शुल्क और पंजीयन (रजिस्ट्रेशन) फीस को संशोधित करते हुए फ्लैट (निर्धारित) दरों की घोषणा कर दी है।
सर्किल रेट का झंझट खत्म, अब देना होगा तय शुल्क
स्टांप तथा न्यायालय शुल्क एवं पंजीयन मंत्री रवींद्र जायसवाल ने कैबिनेट फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि अब तक किरायानामा का पंजीकरण कराने पर स्टांप शुल्क की गणना प्रॉपर्टी के ‘सर्किल रेट’ के आधार पर की जाती थी। इस जटिल व्यवस्था के कारण आम लोगों पर भारी वित्तीय बोझ पड़ता था और वे बिना रजिस्ट्रेशन के ही रेंट एग्रीमेंट बनाने पर मजबूर होते थे। योगी सरकार द्वारा इस पुरानी व्यवस्था को खत्म कर अब सालाना किराये के हिसाब से बेहद मामूली और सरल शुल्क तय कर दिया गया है।
जानिए किस किराये पर कितना लगेगा रजिस्ट्रेशन फीस
सरकार द्वारा लागू की गई नई स्लैब दरों के तहत 10 लाख रुपये तक के सालाना किराये पर निम्नलिखित शुल्क लगेगा:
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2 लाख रुपये तक सालाना किराया: 1,000 रुपये निर्धारित शुल्क
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2 लाख से 6 लाख रुपये तक सालाना किराया: 3,000 रुपये निर्धारित शुल्क
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6 लाख से 10 लाख रुपये तक सालाना किराया: 4,500 रुपये निर्धारित शुल्क
योगी कैबिनेट के इस कदम से राज्य में रेंट एग्रीमेंट का कानूनी पंजीकरण कराना बेहद सुलभ हो जाएगा, जिससे मकान मालिकों और किरायेदारों के बीच होने वाले कानूनी विवादों में कमी आएगी तथा सरकार के राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी।











