
भास्कर समाचार सेवा
सिरसागंज। नगर के ऐतिहासिक
तीज महोत्सव में हुए अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में रातभर कविताओं का रंग बरसा। ओज और हास्य कवियों ने जमकर वाहवाही लूटी। गीतों के सुमधुर स्वर भी गुंजायमान हुए। देर रात तेज बारिश के बाद भी काव्य रसिक श्रोता सुबह तक जमे रहे। मुख्य अतिथि कोआपरेटिव बैंक अध्यक्ष अतुल प्रताप सिंह ने मां सरस्वती का पूजन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
जन सांस्कृतिक परिषद अध्यक्ष राजीव यादव वाले, कोषाध्यक्ष योगेश गुप्त, ज्ञानेंद्र सिंह, सोनी प्रधान, नितिन सिंह व अन्य पदाधिकारियों ने मुख्य अतिथि व कवियों को प्रतीक चिन्ह देकर स्वागत किया। मुख्य अतिथि ने मोती माला एवम् पटका से स्वागत किया। अखिल भारतीय कवि सम्मेलन के संयोजक कवि डॉक्टर मुकेश मणिकांचन ने कवि सम्मेलन के प्रारंभ में कवित्री डॉ. रुचि चतुर्वेदी को सरस्वती वंदना के लिए आमंत्रित किया। कमलासिनी सुन लो यह मनभावना हमारी। स्वीकार आज करलो नीराजना हमारी। फिरोजाबाद के कवि विशनू विश्व ने पढा, मैं अपने छंद गीतों में राधेश्याम लिखता हूं। रामबाबू सिकरवार ने हास्य रस की रचनाओं से लोगों को लोगों से ठहाके लगवाए, वाह रे बाबा योगी चुप कर दिये सभी विरोधी तू शेर सा जब घुराये तेरे आगे जो खड़ा हुआ वह बकरी सा मिमिआये।और जहाँ भी गडबड मिले वहां बुलडोजर चलवाऐ।
युवाओं के चहेते कवि गौरव चौहान ने पढा, भक्त होगें तो भगवान दिखाई देंगे सरहद पर देखोगे तो तुम हर फौजी में हनुमान दिखाई देंगे। कवि डॉ मुकेश मणिकांचन ने वर्तमान परिवेश को यूं बयां किया, कली और फूल पर खंजर कोई चलाता है, ऐसे हालात पे रोना मुझे तो आता है, राम के नाम से पाषाण तैरे सागर में, राम के नाम को तू आग क्यों लगाता है।

ब्रज कोकिला डॉ. रुचि चतुर्वेदी ने राधा कृष्ण के अलौकिक प्रेम की कविता सुना कर आध्यात्मिक शृंगार के सुख में डुबकी लगवाई-
मैं बिंदु से रेखा बनाने चली हूं मैं सागर से नदियां मिलाने चली हूं निकट आओ तट पर क्यों खड़े हो मैं गीतों की गंगा बहाने चली हूँ।
कवि अभिराम पाठक ने पढा, सोए हुए शेर की मूंछ पर लगाओ ना हाथ शेर जो दहाड़ा तो खानदान मिट जाए।
वहीं हास्य कवि लटूरी सिंह लट्ठ ने हास्य रचना के द्वारा मोबाइल के बारे में बताया और फूफा की परिभाषा बताते हुए लोगों को खूब हंसाया।
लाफ्टर चैंपियन हेमंत पांडे ने अपने जीवन की अधूरी प्रेम कहानियों के सहारे चटपटी गुदगुदाने वाली टिप्पणियां करते हुए पंडाल को लोटपोट कर दिया। ओज के युवा हस्ताक्षर राम भदावर ने राष्ट्रीय अस्मिता के गंभीर प्रश्नों को अपनी कविता के माध्यम से रखा। ऐतिहासिक पात्रों एवं सनातन गौरव का बखान भी उन्होंने जमकर किया। उनकी कविताएं देर तक पांडाल में तालियों की गड़गड़ाहट और वाहवाही के बीच चलती रही।
इसी बीच घनघोर बारिश शुरू हो गई लेकिन कविता का क्रम बारिश की बूंदों के बाद भी जारी रहा। अंत में कवि सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ कवि प्रशांत उपाध्याय ने व्यंग रचनाएं सुनाते हुए आयोजन को अब तक का सबसे सफल और ऐतिहासिक आयोजन बताया। डॉक्टर गुरुदत्त सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया।













