उप सेना प्रमुख बोले-सेना के पास स्वदेशी उपकरणों की कमी, आयात मजबूरी

– ‘आत्मनिर्भर भारत’ ​के दृष्टिकोण से सेना के लिए होने चाहिए सहयोगी प्रयास 

नई दिल्ली,। ​उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एसके सैनी ने कहा है कि पूर्वी लद्दाख में चीन से मोर्चा लेने के लिए ​हमारे सैनिकों की तैनाती उन सुपर हाई एल्टीट्यूड क्षेत्रों में की गई है जहां का तापमान -50 डिग्री सेल्सियस छूता है। ​​भारतीय सेना आधुनिक हथियारों, गोला-बारूद, सुरक्षा, किटिंग और कपड़ों के मामले में काफी विकसित हुई है। हालांकि अभी भी नवाचार की बहुत गुंजाइश है​​। नाइट-विजन चश्मे, लड़ाकू हेलमेट, बुलेटप्रूफ जैकेट, हल्के पोर्टेबल संचार सेट और कई अन्य चीजों पर ध्यान देने की आवश्यकता है​​​।​ ​वास्तव में सभी प्रकार के मौसम और सभी क्षेत्रों में ऑपरेशन को अंजाम देने वाले सैनिकों के पूरी तरह से नेटवर्क निकायों पर काम करना चाहिए।​


​​​​उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एसके सैनी ​शनिवार को ​सेंटर फॉर जॉइंट वारफेयर स्टडीज​ की ओर से ‘फोर्स प्रोटेक्शन इंडिया 2020​’​ विषय पर ​आयोजित ​एक वेबिनार ​को संबोधित कर रहे थे​। ​वेबिनार का उद्देश्य डिफेंस फोर्सेज, इंडियन इंडस्ट्री, साइंटिस्ट्स और एंटरप्रेन्योर्स को एक कॉमन प्लेटफॉर्म पर लाना था, ताकि फोर्स प्रोटेक्शन के लिए डिफेंस फोर्सेज की जरूरतों को समझा जा सके और इसके समाधान खोजने में मदद की जा सके।  उन्होंने जवानों के लिए ​ठंड के मौसम के लिहाज से उपकरण बनाने में ‘स्वदेशी समाधानों की कमी’ को उजागर ​करते हुए कहा कि ​इसमें सैनिकों के लिए हेलमेट, बॉडी आर्मर और ​गर्म कपड़े भी आते हैं। ​​​​फोर्स प्रोटेक्शन का मतलब सैनिक की शारीरिक सुरक्षा से लेकर महत्वपूर्ण और संवेदनशील सैन्य संपत्तियों की सुरक्षा और व्यापक खतरों के खिलाफ बुनियादी ​ढांचे की सुरक्षा से है।

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​उन्होंने दोहराया कि युद्ध का चरित्र तेजी से बदल रहा है। नवीनतम तकनीकों द्वारा संचालित घातकता और तीव्रता, दोस्तों और दुश्मनों, लड़ाकों और नागरिकों के बीच की ​रेखाएं धुंधली पड़ रही हैं, इसलिए सेनाओं के लिए खुद को सुरक्षित रखने और संचालन में सफल होने के लिए सुरक्षा को नए सिरे से देखने की जरूरत है।​​ सैनी ने कहा​ कि ​​​ठंड से बचने के लिए सैनिकों को दिए जाने वाले विशेष कपड़ों और उपकरणों की कमी को देखते हुए हम अभी भी स्वदेशी समाधानों की कमी के कारण ​ठंड से बचाव के सामानों का आयात कर रहे हैं। ​उन्होंने यह भी कहा कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ ​के दृष्टिकोण से सेना की जरूरतों को पूरा करने के लिए सहयोगी प्रयास किए जाने की आवश्यकता है। 


​​उप सेना प्रमुख​ सैनी ने इस बात पर चिंता जताई कि ​इंप्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइसेज टेररिस्ट और एंटी नेशनल एलिमेंट्स के लिए ​मुफीद हथियार बनते जा रहे हैं। रोबोटिक्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और बिग डेटा एनालिसिस का संयोजन ​इसका ​एक संभावित ​उपाय हो सकता है​​।​​​​​ अन्य खतरों के बीच ड्रोन और यूएवी अपने अभिनव रोजगार और विनाशकारी क्षमता में खड़े हैं। उनकी कम लागत, बहु-उपयोग और घने प्रसार को देखते हुए आने वाले वर्षों में यह खतरा कई गुना बढ़ जाएगा। इस संदर्भ में​ ​हमें अभी ​से ​योजना बनाने की आवश्यकता है।

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