शी जिनपिंग के भारत आने की चर्चा के बीच चीन के उपराष्ट्रपति से मिले डोभाल, जानिए क्यों खास है ये मुलाकात

 

भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल इन दिनों चीन के दौरे पर हैं। बीजिंग में उन्होंने चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के साथ-साथ भारत-चीन संबंधों को बेहतर बनाने के उपायों पर चर्चा हुई।

डोभाल का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब हाल के दिनों में भारत-चीन सीमा पर तनाव को लेकर खबरें सामने आई थीं। इसके अलावा चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सितंबर में भारत आने की संभावनाओं के बीच भी डोभाल की यात्रा को अहम माना जा रहा है।

शी जिनपिंग के भारत दौरे की चर्चा

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने की चर्चा है। हालांकि, उनके भारत दौरे को लेकर अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। दोनों देशों के अधिकारियों की ओर से इस दौरे को लेकर उम्मीद जताई जा रही है।

अगर शी जिनपिंग भारत आते हैं तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी मुलाकात भी हो सकती है। इस दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने और सीमा से जुड़े मुद्दों समेत कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होने की संभावना है।

25वें दौर की SR वार्ता से पहले अहम बैठक

अजीत डोभाल और चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग की मुलाकात विशेष प्रतिनिधि (Special Representatives) स्तर की बातचीत के 25वें दौर से पहले हुई। बैठक में दोनों पक्षों ने सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता को मजबूत करने के तरीकों पर विचार-विमर्श किया।

इसके अलावा भारत और चीन के बीच सहमति के मुताबिक आर्थिक, राजनीतिक और बहुपक्षीय क्षेत्रों में सहयोग और संबंधों को आगे बढ़ाने के उपायों पर भी चर्चा हुई।

डोभाल चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के पोलित ब्यूरो के सदस्य और विदेश मंत्री वांग यी के निमंत्रण पर बीजिंग पहुंचे हैं। वह वांग यी के साथ भारत-चीन सीमा विवाद को लेकर विशेष प्रतिनिधि स्तर की वार्ता में हिस्सा लेंगे।

2003 में शुरू हुई थी विशेष प्रतिनिधि प्रक्रिया

भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को व्यापक स्तर पर सुलझाने के लिए विशेष प्रतिनिधि वार्ता की प्रक्रिया साल 2003 में शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच करीब 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक सीमा से जुड़े विवाद का राजनीतिक समाधान तलाशना है।

इस बातचीत में दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधि सीमा विवाद के समाधान के साथ-साथ सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के मुद्दों पर भी चर्चा करते हैं।

एस. जयशंकर ने भी सीमा पर शांति को बताया जरूरी

भारत-चीन संबंधों को लेकर विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी हाल ही में बयान दे चुके हैं। 22 अगस्त को इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम में उन्होंने कहा कि चीन के साथ अच्छे संबंधों के लिए सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बेहद जरूरी है।

जयशंकर ने कहा कि भारत और चीन ने 2020 की गर्मियों से 2024 की ठंड के बीच एक कठिन दौर का सामना किया और इसकी मुख्य वजह सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थिति थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीमा पर शांति और स्थिरता दोनों देशों के बेहतर संबंधों के लिए जरूरी है और सीमा की स्थिति काफी हद तक द्विपक्षीय संबंधों की दिशा तय करेगी।

यह बयान ऐसे समय आया था जब अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी क्षेत्र में चीनी सैनिकों के कथित आक्रामक रवैये की खबरें सामने आई थीं।

चीन ने सीमा की स्थिति को बताया था स्थिर

वहीं, चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने 12 अगस्त को भारत-चीन सीमा की स्थिति पर कहा था कि सीमा पर हालात फिलहाल सामान्य तौर पर स्थिर हैं।

ऐसे में अजीत डोभाल की चीन यात्रा और विशेष प्रतिनिधि स्तर की बातचीत को दोनों देशों के बीच सीमा पर शांति बनाए रखने और रिश्तों को आगे बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

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