
भास्कर समाचार सेवा
सहारनपुर। धरती को हरा-भरा बना कर पर्यावरण की सुरक्षा के लिए एक तरफ सरकार लगातार चिंतित है और इसके लिए कई तरह के प्रयास कर पर्यावरण दिवस पर करोड़ो की तादाद में वृक्षारोपण करा कर वातावरण को संतुलित करने का प्रयास कर रही है। वहीं दूसरी ओर वृक्ष माफिया वन संरक्षण के नियमों को ताक पर रखकर देहात रेंज में किसानों के खेतो से स्वस्थ हरे आम समेत कई प्रतिबंधित वृक्षो की प्रजातियो के पेड़ धड़ल्ले के काट रहे है। वन विभाग के अधिकारियो की आंखों पर भी भ्रष्टाचार का प्रदा पड़ जाता है और वृक्षों की खरीद फरोख्त करने वाले कारोबारियों कें द्वारा हरे वृक्षों को काट-काट कर योगी सरकार के इस अभियान को ठेंगा दिखा रहे है। जिला सहारनपुर का देहात क्षेत्र जो एक हरित बेल्ट और आम की बहुतायत फसल वाला क्षेत्र है वर्तमान समय मे कारोबारियों के कुल्हाड़े का शिकार हो रहा है। मामले पर जल्द ध्यान ना दिया गया तो सड़क किनारे खड़े आम के बागो सहित अन्य प्रतिबंधित संरक्षित वृक्षों का सुपड़ा साफ हो जाएगा जो पर्यावरण के लिए बहुत घातक सिद्ध होगा। जिला सहारनपुर के देहात क्षेत्र में हाइवे व हाइवे के आसपास के इलाकों में लगे हरे आम के बागो व स्वस्थ हरे वृक्षो पर पेड़ माफियाओं का कुल्हाड़ा धड़ल्ले से चल रहा है। कैबिनेट ने यूपी वृक्ष संरक्षण अधिनियम, 1976 के प्रावधानों में बदलाव करते हुए प्रतिबंधित श्रेणी के वृक्षों की संख्या बढ़ाकर 29 कर दी थी। प्रत्येक वृक्ष के काटने पर दो पौधे लगाने और उनके संरक्षण का प्रस्ताव था, लेकिन सीएम योगी आदित्यनाथ ने पौधरोपण की संख्या बढ़ाकर प्रति वृक्ष 10 कर दी। अगर काटने वाले के पास इतने पौधे लगाने के लिए जमीन नहीं है तो वह वन विभाग को इसके लिए धनराशि जमा करेगा। वन विभाग इस रकम से पौधे लगाकर उनका संरक्षण करेगा। प्रतिबंधित वृक्षो की प्रजातियों में मुख्य रूप से आम (देशी, तुकमी, कलमी), नीम, साल, महुआ, बीजा साल, पीपल, बरगद, गूलर, पाकड़, अर्जुन, पलाश, बेल, चिरौंजी, खिरनी, कैथा, इमली, जामुन, असना, कुसुम, रीठा, भिलावा, तून, सलई, हल्दू, बाकली/करधई, धौ, खैर, शीशम और सागौन आदि है। परंतु इस प्रकार के किसी भी नियम का अनुसरण ना तो वन विभाग कर रहा है न ही वन विभाग किसानों को करवा रहा है। बिना अनुमति के हरे स्वस्थ व्यक्ति को कटवा कर वन विभाग भी भ्रष्टाचार की चादर ओढ़े वृक्ष माफियाओं द्वारा दिये जाने वाल नोटों की खनखनाहट का खूब आनंद ले रहा है। कटान किये हुए सभी वृक्ष आम तौर पर गागलहेड़ी कस्बे के समीप ग्राम मक्केबास में लगने वाली लकड़ी की मंडी में खुले आम बेचे जा रहे है। और शाम ढलते ही बड़े बड़े ओवरलोड वाहनों में इन लकड़ियों को भरकर दूसरे व्यापारिक केंद्रों व प्रदेश में तस्करी की जाती है। मंडी के व्यापारियों के गोदामो पर बिकने वाले प्रबंधित लकड़ियों की जांच भी विभाग अधिकारियों द्वारा नहीं की जाती है और खुलेआम प्रतिबंधित वृक्षों की खरीद-फरोख्त कर बिना किसी डर के तस्करी की जाती है। इसी प्रकार की खरीद-फरोख्त और प्रतिबंधित वृक्षों का कटान व तस्करी होती रही तो जल्द ही देहात क्षेत्र की यह हरित बेल्ट बंजर हो जाएगी और वातावरण का इस पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
मामले को संज्ञान में लेकर उच्च अधिकारियों को मामले की जांच करनी चाहिए और वन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार भी यह जांच करनी चाहिए कि क्षेत्र में कितनी मात्रा में आम समेत अन्य प्रतिबंधित वृक्ष काटे गए हैं और क्यों काटे गए हैं वर्तमान समय में बहुत बड़ी मात्रा में बिना अनुमति के अवैध तरीके से बड़ी मात्रा में वृक्षों की कटाई की जा रही है हरे भरे बागों को उजाड़ा जा रहा है।













