
- नगर निगम मुख्यालय और हजरतगंज थाने के सामने अतिक्रमण, जिम्मेदार मौन
- अभी ठंडी भी नहीं पड़ी अलीगंज अग्निकांड की आग, फिर शुरू हुई लापरवाही
- नियम-कानूनों को दरकिनार कर चलाया जा रहा अतिक्रमण का सिंडिकेट
- आखिर क्यों इन अतिक्रमणकारियों के आगे नतमस्तक है सरकारी तंत्र?
Lucknow : अलीगंज अग्निकांड की आग अभी ठंडी भी नहीं पड़ी कि विभागों ने एक बार फिर लापरवाह और गैर-जिम्मेदाराना रवैया अपना लिया है। जब भी कहीं अग्निकांड होता है, तो सभी चाहते हैं कि अग्निशमन वाहन जल्द से जल्द मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाए। लेकिन लापरवाह सिस्टम ने मानो अग्निशमन वाहनों को हेलीकॉप्टर समझ लिया है, क्योंकि अलीगंज अग्निकांड के बाद भी शहर को अतिक्रमण मुक्त नहीं कराया जा सका है। ऐसा प्रतीत होता है कि यह मान लिया गया है कि आपात स्थिति में अग्निशमन वाहन हेलीकॉप्टर में तब्दील होकर मौके पर पहुंच जाएंगे।
मामला राजधानी लखनऊ के हजरतगंज का है, जहां फायर स्टेशन के ठीक सामने एक बार फिर कार सजावट और मरम्मत के नाम पर अतिक्रमण कर लिया गया है। बता दें कि हजरतगंज फायर स्टेशन में मुख्य अग्निशमन अधिकारी का कार्यालय भी है और ठीक बगल में हजरतगंज थाना स्थित है, जहां डीसीपी सेंट्रल का कार्यालय भी है। हैरानी की बात यह है कि महज कुछ ही दूरी पर नगर निगम मुख्यालय भी स्थित है। शहर को अतिक्रमण मुक्त रखने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी नगर निगम की होती है, लेकिन न जाने क्यों इन अतिक्रमणकारियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि पूरा सरकारी तंत्र इनके आगे नतमस्तक नजर आ रहा है।
नगर निगम के पास फिर फैला अतिक्रमण का मकड़जाल
दैनिक भास्कर में खबर प्रकाशित होने के बाद नगर निगम प्रशासन हरकत में आया था और 20 जून को संबंधित क्षेत्र में अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया था। लेकिन हैरानी की बात यह है कि एक महीना भी नहीं बीता और अतिक्रमणकारियों ने फिर कार सजावट और मरम्मत के नाम पर सड़कों पर कब्जा जमा लिया। नतीजतन, उक्त क्षेत्र में आए दिन भीषण जाम की समस्या बनी रहती है। स्थिति जस की तस है और लापरवाही का आलम यह है कि स्वयं नगर निगम मुख्यालय के आसपास अतिक्रमण का मकड़जाल फैला हुआ है।

महापौर के आदेशों को गंभीरता से नहीं लेते जोनल अधिकारी
महापौर सुषमा खर्कवाल के सख्त निर्देश हैं कि शहर में अतिक्रमण किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। खासतौर पर अलीगंज अग्निकांड के बाद महापौर ने सभी जोनल अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में सघन अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। लेकिन न जाने ऐसी क्या मजबूरी है कि जोन-1 के जोनल अधिकारी महापौर के आदेशों को दरकिनार करते हुए इन अतिक्रमणकारियों को मौन स्वीकृति देते नजर आ रहे हैं। आलम यह है कि नगर निगम मुख्यालय के पास, नावेल्टी चौराहा, हजरतगंज फायर स्टेशन के ठीक सामने और लालबाग स्थित डीएम कंपाउंड तक अतिक्रमण का जाल फैला हुआ है, जिससे आपात सेवाओं के साथ-साथ आम जनमानस भी भीषण जाम की समस्या झेल रहा है।
क्या कहते हैं नियम?
स्ट्रीट वेंडर्स (आजीविका संरक्षण और विनियमन) अधिनियम, 2014 के तहत आपातकालीन सेवाओं से जुड़े स्थानों को हमेशा ‘नॉन-वेंडिंग जोन’ या ‘नो-पार्किंग जोन’ रखा जाता है, ताकि वहां किसी प्रकार का अतिक्रमण न हो। भीड़-भाड़ को नियंत्रित करने और दुर्घटनाओं से बचने के लिए इन सेवाओं के आसपास सुरक्षित दूरी बनाए रखना अनिवार्य है। अस्पताल, फायर स्टेशन और पुलिस स्टेशन जैसी आपात सेवाओं के ठीक बाहर या उनके पहुंच मार्ग पर वेंडिंग जोन बनाना प्रतिबंधित है। यहां वेंडर्स के होने से एंबुलेंस और दमकल जैसे आपातकालीन वाहनों की आवाजाही बाधित हो सकती है, जिससे जान-माल के नुकसान का खतरा बढ़ जाता है।

अब बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर इन नियम-कानूनों की धज्जियां क्यों उड़ाई जा रही हैं? क्या इस बड़े अतिक्रमण के पीछे कोई संगठित सिंडिकेट काम कर रहा है? कहीं संबंधित विभागों के अधिकारी और कर्मचारी घूसखोरी या कमीशनखोरी में लिप्त तो नहीं हैं? और सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इन अतिक्रमणकारियों के हौसले इतने बुलंद कैसे हो गए कि उन्होंने नगर निगम मुख्यालय और हजरतगंज थाने के सामने तक अतिक्रमण कर रखा है और दोनों ही विभाग मौन बने हुए हैं? ये ऐसे गंभीर सवाल हैं, जिनके उत्तर मिल जाएं तो भविष्य में आपात सेवाएं बाधित नहीं होंगी और संकट की स्थिति में राहत एवं बचाव दल समय पर मौके पर पहुंच सकेंगे।








