
मध्य प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने राज्य में सक्रिय एक बड़े और संगठित फर्जी पासपोर्ट रैकेट का पर्दाफाश किया है। शुरुआती जांच में मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों के पतों पर जारी किए गए लगभग 70 फर्जी पासपोर्ट का पता चला है। फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद अब एसटीएफ इस पूरे नेटवर्क, इसमें शामिल गिरोह के सदस्यों और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत की गहनता से जांच कर रही है।
6 संदिग्धों की गिरफ्तारी, बौद्ध मठों के पतों का हुआ गलत इस्तेमाल
मामले की जानकारी देते हुए एसटीएफ के डीआईजी ने बताया कि यह एक बहुस्तरीय फर्जीवाड़ा है, जिसमें अब तक छह संदिग्धों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें 23 सितंबर को पकड़ा गया गयाप्रसाद गौतम शामिल है। इससे पहले 25 अगस्त से 18 सितंबर के बीच रियाल चौधरी उर्फ भंते मेतानंद, विप्लब अधिकारी, प्रियन रॉय, जॉय चौधरी और नसीम अख्तर की गिरफ्तारी हुई थी। जांच में सबसे हैरान करने वाला तथ्य यह सामने आया है कि आरोपियों ने फर्जी आवेदनों में बार-बार बौद्ध मठों के पतों का इस्तेमाल किया।
फर्जी गवाहों और पतों का चौंकाने वाला पैटर्न
एसटीएफ द्वारा चिह्नित किए गए मामलों में भोपाल के अन्नानगर से जुड़े 40 मामले, डबरा से 17, बैतूल के आमला स्थित बौद्ध मठ से 11 और छिंदवाड़ा-पांडुर्ना से 2 मामले सामने आए हैं। फर्जीवाड़े का पैटर्न इतना संगठित था कि 70 में से करीब 50 पासपोर्ट आवेदनों में केवल तीन लोगों को ही गवाह के तौर पर पेश किया गया था। कई आवेदनों में इन गवाहों के मोबाइल नंबर भी एक जैसे मिले हैं। एक ही पते और गवाहों के बार-बार इस्तेमाल ने जांच एजेंसियों का ध्यान खींचा।
6 राज्यों तक पहुंची जांच, पासपोर्ट सेवा केंद्र के अधिकारी भी रडार पर
जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि पासपोर्ट प्रोसेस कराने के लिए प्रशासनिक स्तर पर भी मदद ली गई थी। एसटीएफ अब पासपोर्ट सेवा केंद्र (PSK) से जुड़े संदिग्ध अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर रही है। इस अंतरराज्यीय रैकेट की जड़ें खंगालने के लिए जांच को 6 राज्यों—मध्य प्रदेश, असम, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और पंजाब तक बढ़ा दिया गया है। एसटीएफ की विशेष टीमें इन राज्यों में दबिश दे रही हैं और अब तक इस मामले में कुल 75 आरोपियों की पहचान की जा चुकी है।















