
उत्तर प्रदेश के जालौन जिले अंतर्गत उरई के रामपुर गांव में केंद्रीय एजेंसियों ने एक बड़े अवैध ड्रग्स गिरोह का पर्दाफाश किया है। राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) और उत्तर प्रदेश एटीएस (UP ATS) की संयुक्त टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी करते हुए खेत के बीचों-बीच चल रही एक आधुनिक ड्रग्स लैब को पकड़ा है। मौके से महाराष्ट्र निवासी संतोष और स्थानीय निवासी हेमेंद्र कुशवाहा को रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है। लैब से करोड़ों रुपये मूल्य की मेफेड्रोन (MD Drugs) बरामद की गई है।
जांच में खुलासा हुआ है कि इस गुप्त ठिकाने से तैयार की गई सिंथेटिक ड्रग्स की सप्लाई उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों के अलावा दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) और मुंबई तक की जाती थी। डीआरआई अब इस अंतरराज्यीय नेटवर्क के सभी तारों और इसमें शामिल कई रसूखदार सफेदपोशों की भूमिका की बारीकी से पड़ताल कर रही है।
गुलाब जल बनाने की आड़ में चल रहा था ‘मौत का धंधा’, 3 दिन में बनती थी 20 किलो ड्रग्स
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गुलाब जल का कवर-अप: ग्रामीणों और स्थानीय लोगों का ध्यान भटकने से बचाने के लिए आरोपियों ने वहां गुलाब जल बनाने की यूनिट लगाई हुई थी। वे दिखावे के लिए थोड़ी मात्रा में गुलाब जल भी तैयार करते थे, ताकि माल लेने आने-जाने वाले सप्लायरों को लोग गुलाब जल का व्यापारी ही समझें।
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लाखों की ड्रग्स निर्माण: जांच में सामने आया कि आरोपी महज 3 दिनों के भीतर लगभग 20 किलो एमडी ड्रग्स तैयार कर लेते थे।
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30 लाख रुपये प्रति किलो की दर: इस जहर को बाजार में 30 लाख रुपये प्रति किलोग्राम की थोक दर पर बेचा जाता था।
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सप्लाई नेटवर्क: पूर्व-निर्धारित सप्लायर खुद इस सीक्रेट लैब पर पहुंचकर माल उठाते थे, जिसके बाद इसे बड़े शहरों के महंगे क्लबों, पबों और होटलों में सप्लाई किया जाता था।
मास्टरमाइंड का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड, local पुलिस पर उठे गंभीर सवाल
जांच एजेंसियों की पूछताछ में पता चला है कि गिरोह का मुख्य आरोपी संतोष पहले भी इसी तरह के खतरनाक ड्रग्स कारोबार में जेल की हवा खा चुका है। आरोपियों ने महज एक महीना पहले ही रामपुर गांव के इस एकांत खेत में अपनी नई लैब स्थापित की थी।
इतने बड़े पैमाने पर एमडी ड्रग्स का निर्माण होने के बावजूद जालौन की स्थानीय पुलिस को इसकी भनक तक न लगना पुलिसिया तंत्र और लोकल इंटेलिजेंस की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर रहा है। आशंका जताई जा रही है कि इस अवैध कारोबार को किसी स्थानीय स्तर की शह या मिलीभगत तो हासिल नहीं थी, हालांकि डीआरआई और एटीएस की टीमें अब इस एंगल की भी गहराई से जांच कर रही हैं।
















