
मुजफ्फराबाद/रावलकोट। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के रावलकोट में स्थिति बेहद तनावपूर्ण और नाजुक बनी हुई है। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा कथित तौर पर की गई अंधाधुंध गोलीबारी में कम से कम 19 लोगों की मौत हो गई है। घटना के बाद पूरे इलाके में भारी तनाव है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर प्रशासन ने कई हिस्सों में इंटरनेट सेवाओं को पूरी तरह सस्पेंड कर दिया है।
19 मृतकों की सूची आई सामने, सुरक्षा बलों पर गंभीर आरोप
स्थानीय सूत्रों और प्रदर्शनकारियों के अनुसार, रावलकोट में जारी शांतिपूर्ण विरोध के दौरान सुरक्षा बलों ने अचानक गोलियां चलानी शुरू कर दीं। इस गोलीबारी में मारे गए लोगों की एक सूची भी सामने आई है। मृतकों में नईम बट, उस्मान नजीर, निसार अहमद, काशिफ याकूब, सरदार फिदा हुसैन, मुजम्मिल, बासित शाह, फहीम अफजल, कामरान मुश्ताक पनाखा, ज़रगाम खलील, साकिब हनीफ, साकिब इशाक, एरियल असगर, उस्मान गुल, जाफिर पहलवान, निसार शाहीन, अली हुसैन, ख्वाजा अबरार लतीफ डार और कामरान हफीज शामिल हैं।
52 दिनों से ठप है जनजीवन, दुकानें और परिवहन बंद
क्षेत्र में पिछले 52 दिनों से जारी व्यापक जन-आंदोलन के कारण जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुका है। रावलकोट समेत आसपास के इलाकों में दुकानें, व्यापारिक प्रतिष्ठान और सार्वजनिक परिवहन पूरी तरह बंद हैं। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच लगातार हो रही हिंसक झड़पों में अब तक दर्जनों लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें कुछ स्थानीय सुरक्षाकर्मियों के भी मारे जाने की खबर है।
मुजफ्फराबाद मार्च और अल्टीमेटम खत्म होने के बाद बिगड़े हालात
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर संयुक्त आवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने 27 जुलाई को दोपहर 1 बजे तक स्थानीय प्रशासन को अपनी मांगें मानकर आधिकारिक अधिसूचना जारी करने की अंतिम चेतावनी दी थी। समिति ने ऐलान किया था कि मांगें पूरी न होने पर रावलकोट से मुजफ्फराबाद तक विशाल विरोध मार्च निकाला जाएगा। तय सीमा तक कोई समाधान न निकलने पर जब हजारों लोग सड़कों पर उतरकर मार्च करने लगे, तभी सुरक्षा बलों ने उन्हें रोकने के लिए बल प्रयोग किया, जिससे स्थिति बेकाबू हो गई और अंधाधुंध फायरिंग की घटना हुई।
क्या हैं प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें?
PoK में जारी इस जन-आंदोलन के पीछे लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक और आर्थिक शिकायतें हैं। प्रदर्शनकारी मुख्य रूप से इन मांगों को लेकर अड़े हुए हैं:
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स्थानीय विधानसभा में 12 आरक्षित सीटों की व्यवस्था को पूरी तरह खत्म किया जाए।
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शासन और राजनीति में स्थानीय निवासियों को अधिक प्रतिनिधित्व दिया जाए।
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आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किए गए सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को तुरंत रिहा किया जाए।
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क्षेत्र में जारी गंभीर बिजली संकट का स्थायी समाधान हो और पारदर्शी शासन व्यवस्था लागू की जाए।














