
प्रयागराज (उत्तर प्रदेश): अयोध्या को प्रभु श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट से जोड़ने वाले महत्वाकांक्षी ‘राम वनगमन पथ’ के निर्माण के कुछ ही समय बाद सड़क पर बड़ी-बड़ी दरारें आने से निर्माण की गुणवत्ता और भ्रष्टाचार पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त नाराजगी जताई है। सीएम के कड़े निर्देशों के बाद शनिवार को जिम्मेदार फर्म और विभागीय अफसरों पर बड़ी कार्रवाई की गाज गिरी है। वहीं, अब इस पूरे मामले की गोपनीय जांच कराने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
407 करोड़ की लागत से बनी 14 किमी सड़क, 350 मीटर हिस्से में बड़ी दरारें
राम वनगमन पथ परियोजना के दूसरे पैकेज के तहत प्रतापगढ़ के अवतारपुर से प्रयागराज के श्रृंगवेरपुर तक 14 किलोमीटर से अधिक लंबे मार्ग का निर्माण लगभग 407 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से कराया गया था। हालांकि, निर्माण कार्य पूरा होने के कुछ ही दिनों भीतर लखनऊ राजमार्ग के क्रॉस पॉइंट से ऐतिहासिक श्रृंगवेरपुर धाम स्थित गंगा पुल तक करीब 350 मीटर के हिस्से में भयंकर दरारें उभर आईं। इसके अलावा 2 किलोमीटर के दायरे में कई जगहों पर सड़कें धंस गई हैं और आरई वॉल (RE Wall) भी क्षतिग्रस्त हो गई है।
कंस्ट्रक्शन फर्म डिबार, अधीक्षण और अधिशासी अभियंता निलंबित
मामले की गंभीरता को देखते हुए लोक निर्माण विभाग (PWD) राष्ट्रीय मार्ग के मुख्य अभियंता एके जैन ने दिल्ली की कार्यदायी संस्था एसएंडपी इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपर्स और स्वतंत्र परामर्शदाता फर्म एलएन मालवीय इन्फ्रा प्रोजेक्ट को डिबार (Debar) करने के लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) को पत्र भेजा था।
इसके साथ ही, लापरवाही बरतने के आरोप में पीडब्ल्यूडी राष्ट्रीय मार्ग (प्रयागराज) के अधीक्षण अभियंता ओंकार भारतीय और अधिशासी अभियंता रवींद्र पाल सिंह के निलंबन की संस्तुति की गई थी, जिस पर शासन द्वारा शनिवार को कार्रवाई की मुहर लगा दी गई।
गोपनीय जांच की तैयारी, 10 से अधिक अभियंताओं पर लटकी तलवार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्त हिदायत के बाद अब पूरी परियोजना की उच्चस्तरीय गोपनीय जांच कराई जा रही है। जांच में इस बात की पड़ताल की जाएगी कि निर्माण सामग्री के चयन में कोई समझौता तो नहीं हुआ और तकनीकी निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने लापरवाही क्यों बरती। सूत्रों की मानें तो इस जांच की जद में 10 से अधिक छोटे-बड़े इंजीनियर और तकनीकी अधिकारी आ सकते हैं।
दूसरी तरफ, विवाद बढ़ने के बाद कार्यदायी संस्था द्वारा क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत का काम युद्धस्तर पर शुरू करा दिया गया है। विभागीय अधिकारियों का दावा है कि तीन से चार दिनों के भीतर दरारों की मरम्मत का कार्य पूरा कर लिया जाएगा।









