
भारतीय ज्ञान परंपरा विपरीत परिस्थितियों में हमारा मार्गदर्शन और मजबूती देने का काम करता है -कुलपति
भास्कर समाचार सेवा
आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी हिंदी तथा भाषाविज्ञान विद्यापीठ में आयोजित शिक्षण उन्नयन कार्यक्रम का गुरुवार को समापन हो गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. आशु रानी ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा विपरीत परिस्थितियों में हमारा मार्गदर्शन और मजबूती देने का काम करता है। हमारा प्राचीन ज्ञान आज भी इसलिए प्रासंगिक है क्योंकि यह प्रकृति, ईश्वर और मानवता के बेहद करीब है। भारतीयता कोई धर्म नहीं, बल्कि एक संस्कृति है, जो पूरे भारत में कश्मीर से कन्याकुमारी तक नजर आती है। यही कारण है कि यहा विभिन्न परिस्थिति में भी लोग खुद को ढाल लेते हैं। आधुनिकता के दौर में पुराने को हटाने की नहीं, बल्कि उसे साथ लेकर चलने की जरूरत है, तभी हम आगे बढ़ पाएंगे। भारतीय ज्ञान परंपरा का अर्थ है ज्ञानार्जन करें, आगे बढ़े और राष्ट्र का नाम रोशन करें।
कार्यक्रम की शुरुआत ललित कला संस्थान के विद्यार्थियों द्वारा संगीत शिक्षक देवाशीष गांगुली के निर्देशन में विश्वविद्यालय का कुलगीत और राष्ट्रभक्ति गीत प्रस्तुत किया गया। इसके बाद माननीया कुलपति ने शिक्षक उन्नयन कार्यक्रम में अपने शोधपत्र प्रस्तुत करने वाले और प्रतिभाग करने वाले विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों को प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया। आयोजन को लेकर शिक्षिका डॉ. उदारता भदौरिया, शोधार्थी कृष्ण कुमार कनक और जापान से आभासी माध्यम से जुड़े डा. सूरज प्रकाश भदौरिया ने कार्यक्रम को लेकर अपने अनुभव साझा किए। कुलपति ने 11 से 17 नवंबर तक के सफल संचालन के लिए कार्यक्रम समन्वयक डॉ. नीलम यादव और सह समन्वयक डा. रणजीत भारती की तारीफ करते हुए बधाई दी। कार्यक्रम का संचालन डॉ. केशव शर्मा ने किया। इस मौके पर संस्थान निदेशक प्रो. यूसी शर्मा, हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. प्रदीप श्रीधर, प्रो. विनीता सिंह, प्रो. अचला गक्खर, डा. श्रीभगवान शर्मा, प्रो. गिरिजा शंकर शर्मा, अशोक रावत, डॉ. वर्षा रानी, डॉ. आदित्य प्रकाश, कृष्ण कुमार, डॉ. प्रदीप वर्मा आदि मौजूद रहे।













