
अल्मोड़ा। उत्तराखंड के पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं का एक और बेहद दर्दनाक और शर्मनाक मामला सामने आया है। अल्मोड़ा जिले के सल्ट ब्लॉक स्थित इनोलू गांव में समय पर सही इलाज न मिलने के कारण एक 24 वर्षीय गर्भवती महिला और उसके दो मासूम नवजात जुड़वा बच्चों की जान चली गई। इस हृदयविदारक घटना ने प्रदेश में बेहतर स्वास्थ्य ढाँचे और सुविधाओं के दावों की जमीनी हकीकत उजागर कर दी है।

सांस फूलने पर अस्पताल-दर-अस्पताल भटकते रहे बेबस परिजन प्राप्त जानकारी के मुताबिक, इनोलू गांव की रहने वाली निशा (24 वर्ष) को अचानक सांस लेने में गंभीर समस्या हुई। स्थिति बिगड़ते देख परिजन उन्हें तुरंत रामनगर अस्पताल लेकर पहुंचे। हालांकि, वहाँ समुचित व्यवस्था न होने के कारण डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें हायर सेंटर हल्द्वानी के लिए रेफर कर दिया। इसके बाद बेबस परिजन निशा को लेकर हल्द्वानी और काशीपुर के कई सरकारी व निजी अस्पतालों के चक्कर काटते रहे, लेकिन किसी भी जगह समय पर वेंटिलेटर या जरूरी आपातकालीन इलाज नहीं मिल सका।
काशीपुर में टूटी सांसें, पेट में पल रहे जुड़वा मासूमों ने भी तोड़ा दम घंटों के भटकाव और मशक्कत के बाद परिजन आखिरकार निशा को काशीपुर के एक निजी अस्पताल ले गए, लेकिन तब तक स्थिति बेहद नाजुक हो चुकी थी। इलाज के दौरान निशा ने दम तोड़ दिया। इसके बाद डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर गर्भ में पल रहे जुड़वा बच्चों को बाहर निकाला, जिनमें से एक बच्चे की मौत पेट के अंदर ही हो चुकी थी, जबकि दूसरे बच्चे ने जन्म के कुछ ही घंटों बाद दम तोड़ दिया। एक साथ तीन-तीन मौतों से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है।
“सड़ चुकी है स्वास्थ्य व्यवस्था”: रोते हुए ससुर ने लगाए गंभीर आरोप मृतका के ससुर राजू टम्टा ने प्रदेश के लचर स्वास्थ्य तंत्र पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया। रोते हुए उन्होंने कहा कि यदि समय रहते सही अस्पताल में स्टेबल इलाज मिल जाता, तो उनका परिवार इस तरह नहीं उजड़ता। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य की स्वास्थ्य प्रणाली लापरवाही की शिकार हो चुकी है और पहाड़ों पर रहने वाले गरीब नागरिकों को अपनी जान देकर इस बदहाली की कीमत चुकानी पड़ रही है।















