नई दिल्ली: खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में भारतीय जहाजों पर हुई फायरिंग के बाद भारत सरकार एक्शन मोड में आ गई है। 18 अप्रैल को ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) द्वारा दो भारतीय जहाजों को निशाना बनाए जाने की घटना को केंद्र सरकार ने बेहद गंभीरता से लिया है। फंसे हुए 14 जहाजों और भारतीय चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नौसेना और विदेश मंत्रालय ने मोर्चा संभाल लिया है।
ईरानी राजदूत तलब, भारत ने दर्ज कराई कड़ी आपत्ति
जहाजों पर फायरिंग की घटना के तुरंत बाद विदेश मंत्रालय ने दिल्ली में ईरानी राजदूत को तलब किया। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने ईरानी प्रतिनिधि से मुलाकात कर साफ शब्दों में कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग में भारतीय जहाजों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पुष्टि की है कि भारत लगातार तेहरान के संपर्क में है ताकि फंसे हुए जहाजों को सुरक्षित गलियारा (Safe Passage) मिल सके।
18 अप्रैल का ‘खतरनाक’ घटनाक्रम
यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) की रिपोर्ट के अनुसार, उस दिन तीन जहाजों को निशाना बनाया गया, जिनमें से दो भारतीय थे:
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पहली घटना: एक भारतीय तेल टैंकर के पास ईरानी गनबोट्स पहुंचीं और बिना किसी चेतावनी के फायरिंग शुरू कर दी। गनीमत रही कि चालक दल सुरक्षित रहा और जहाज को केवल मामूली नुकसान (कांच टूटना) पहुंचा।
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दूसरी घटना: ओमान के तट के पास एक भारतीय सुपरटैंकर पर अज्ञात ‘प्रोजेक्टाइल’ (मिसाइल या ड्रोन) से हमला किया गया। इन हमलों ने वैश्विक व्यापारिक मार्ग की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
समुद्र में भारतीय नौसेना की घेराबंदी: 7 युद्धपोत तैनात
बिगड़ते हालात को देखते हुए भारतीय नौसेना ने खाड़ी क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बढ़ा दी है।
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एस्कॉर्ट मिशन: वर्तमान में 7 भारतीय युद्धपोत क्षेत्र में तैनात हैं, जो फंसे हुए जहाजों को सुरक्षा घेरे (Escort) में लेकर बाहर निकालेंगे।
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एडवाइजरी: जहाजों को लारक द्वीप (Larak Island) से दूर रहने और नौसेना की अनुमति मिलने पर ही आगे बढ़ने के निर्देश दिए गए हैं।
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फंसे हुए जहाज: फिलहाल 14 भारतीय जहाज सुरक्षित निकासी के इंतजार में लंगर डाले हुए हैं, जिनमें 3 बड़े तेल टैंकर और एक एलपीजी (LPG) कैरियर शामिल है।
व्यापारिक दृष्टिकोण से क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा यहीं से गुजरता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों (कच्चा तेल और गैस) के लिए इस मार्ग पर काफी निर्भर है। इससे पहले फरवरी में भी तनाव के दौरान भारत ने सफलतापूर्वक 10 जहाजों को रेस्क्यू किया था।
फिलहाल, भारत का पूरा जोर कूटनीतिक दबाव और सैन्य सतर्कता के जरिए अपने नागरिकों और व्यापारिक हितों को सुरक्षित निकालने पर है।















