TGT अंग्रेजी परीक्षा में 33 गलत सवालों पर भड़का हाईकोर्ट: चयन आयोग से पूछा- क्या 50% सवाल गलत होने पर रद्द करेंगे परीक्षा? 1 सितंबर तक मांगा जवाब

प्रयागराज: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित TGT अंग्रेजी की परीक्षा में 33 सवाल गलत और आउट ऑफ सिलेबस पूछे जाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने आयोग की कार्यप्रणाली और प्रश्नपत्रों के चयन के तरीके पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन ने आयोग के सचिव और परीक्षा नियंत्रक को तलब किया था। कोर्ट ने सख्त लहजे में पूछा कि भविष्य में ऐसी गंभीर गलतियां न हों, इसके लिए क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। कोर्ट ने इस बात पर भी गहरी हैरानी जताई कि आयोग के पास तैयार किए गए प्रश्नों की सटीकता और विश्वसनीयता जांचने के लिए कोई मैकेनिज्म ही मौजूद नहीं है।

टॉस और रैंडम तरीके से पेपर चुनने पर भड़का कोर्ट, पूछा- कैसे होती है जांच?

सुनवाई के दौरान कोर्ट में पेश हुए आयोग के अधिकारियों की ओर से दाखिल हलफनामे में प्रश्नपत्र तैयार करने की पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी गई। आयोग के वकील ने बताया कि दो अलग-अलग एजेंसियों से दो-दो सेट पेपर तैयार करवाए जाते हैं, जिसके बाद चेयरमैन उनमें से किसी एक सेट का रैंडम तरीके से चयन करते हैं। इस पर कोर्ट ने हैरानी जताते हुए कहा कि आयोग के पास प्रश्नों की सत्यता जांचने का कोई सिस्टम ही नहीं है और अध्यक्ष टॉस या रैंडम तरीके से पेपर चुन लेते हैं। कोर्ट ने साफ कहा कि आयोग के कामकाज में पारदर्शिता होनी चाहिए, क्योंकि प्रक्रिया की जानकारी न होने से छात्रों का नुकसान होता है और गलत लोग इसका फायदा उठाते हैं।

50 प्रतिशत सवाल गलत हुए तो क्या पूरी परीक्षा रद्द होगी?

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने आयोग से तीखा सवाल किया कि मौजूदा विवाद में 125 में से 33 यानी करीब 25 प्रतिशत सवाल गलत या आउट ऑफ सिलेबस हैं। अगर किसी परीक्षा में 50 प्रतिशत सवाल गलत निकल आएं तो आयोग क्या करेगा, क्या ऐसी स्थिति में परीक्षा रद्द की जाएगी? इस पर आयोग की तरफ से दलील दी गई कि गलत सवालों के अंक बाकी सही प्रश्नों में समान रूप से बांट दिए जाते हैं। साथ ही, गलत सवाल तैयार करने वाली एजेंसी पर प्रति सवाल 1 लाख रुपये जुर्माना लगाने का प्रावधान है। कोर्ट ने इस पर सवाल उठाया कि क्या आर्थिक दंड के अलावा दोषी एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट करने जैसी कोई सख्त कार्रवाई की व्यवस्था है या नहीं।

8 विवादित प्रश्नों की जानकारी 17 अगस्त तक देने का निर्देश

याचियों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राधा कांत ओझा ने कोर्ट के सामने मुद्दा उठाया कि आयोग उन 33 प्रश्नों का खुलासा नहीं कर रहा है जिन्हें गलत या आउट ऑफ सिलेबस माना गया है। इस पर आयोग ने बताया कि अभ्यर्थियों की आपत्तियों के निस्तारण के बाद 25 प्रश्न आउट ऑफ सिलेबस पाए गए हैं, जबकि 8 सवाल सही पाए गए हैं। याचियों के वकील ने मांग की कि उन 8 प्रश्नों की जानकारी भी प्रतियोगियों को दी जाए ताकि यदि वे भी आउट ऑफ सिलेबस हों तो उन पर आपत्ति जताई जा सके। कोर्ट ने आयोग को 17 अगस्त तक वे 8 प्रश्न याचियों को उपलब्ध कराने का स्पष्ट निर्देश दिया है।

1 सितंबर को होगी अगली सुनवाई, आयोग को दाखिल करना होगा हलफनामा

हाईकोर्ट ने चयन आयोग के सचिव को सख्त हिदायत दी है कि वह परीक्षा प्रणाली में सुधार लाएं और भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों को रोकने के लिए पुख्ता व्यवस्था बनाएं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आयोग क्या प्रक्रिया अपनाता है, इसमें अदालत हस्तक्षेप नहीं करेगी, लेकिन सुधार के कदम उठाना बेहद जरूरी है। अदालत ने इस पूरे मामले में आयोग को 1 सितंबर तक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है, जिस दिन इस मामले की अगली सुनवाई की जाएगी।

 

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