नीट की तैयारी करने कोटा गई छात्रा की हत्या, तीन दिन से थी लापता

बिलासपुर । छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले की छात्रा की राजस्थान के कोटा में किडनैप कर हत्या कर दी गई है। छात्रा कोटा में 12वीं की पढ़ाई के साथ ही नीट की तैयारी कर रही थी। उसने एक माह पहले ही दाखिला लिया था, वह तीन दिन से लापता थी। उसका शव कोटा डैम के पास जंगल में मिला है। छात्रा के सिर को पत्थर से कुचला गया है। संदिग्ध आरोपित को गुरुवार को गांधीनगर से हिरासत में ले लिया गया है।

जानकारी के अनुसार छात्रा की दोस्ती ऑनलाइन गेम के माध्यम से गुजरात के एक युवक से हुई थी। युवक तीन दिन पहले उससे मिलने पहुंचा और घुमाने के बहाने ले गया। युवक को गांधीनगर से हिरासत में ले लिया गया है और पुलिस उससे पूछताछ कर रही है।

बिलासपुर के यदुनंदननगर की रहने वाले परिवार की इकलौती बड़ी बेटी सेंट फ्रांसिस स्कूल की छात्रा थी। यहां 11वीं कक्षा तक पढ़ाई करने के बाद वह मेडिकल की तैयारी करने के लिए राजस्थान के कोटा गई थी। पिता ने 25 अप्रैल को कोटा के न्यू राजीव गांधी नगर स्थित हॉस्टल में रहने की व्यवस्था की थी और एलन इंस्टीट्यूट में दाखिला दिलाया था। छात्रा 6 जून को हॉस्टल से कोचिंग जाने की बात कहकर निकली थी। छात्रा कोचिंग भी गई थी, लेकिन हॉस्टल नहीं लौटी।

6 जून को बेटी का मोबाइल बंद मिला। इस बीच हॉस्टल से भी पिता के पास फोन आया कि उनकी बेटी कोचिंग से हॉस्टल नहीं लौटी है। इससे परेशान होकर पिता अपने व अन्य रिश्तेदारों के साथ कोटा पहुंचे। वहां उन्होंने जवाहर नगर थाने में सूचना दी। इसके बाद पुलिस छात्रा की तलाश में जुट गई थी।

नाबालिग लड़की के गायब होने पर पुलिस अपहरण की आशंका से जांच में जुट गई थी। उसके मोबाइल का लास्ट लोकेशन रावतभाटा में जवाहर सागर डैम के पास मिली थी। पास ही जंगल भी है। लिहाजा, पुलिस के साथ परिजन देर शाम तक जंगल में उसकी तलाश कर रहे थे। तभी पुलिस ने बुधवार देर रात जंगल से छात्रा की लाश को बरामद किया।

कोटा में पिता अमीन को पुलिस अफसरों ने बताया कि पुलिस मामले की जांच कर रही है। परिजन उसके शव का पोस्टमार्टम के बाद उसे बिलासपुर लाने की तैयारी में है। उधर, पुलिस की टीम को गुजरात के युवक की जानकारी मिली। लिहाजा, टीम गुरुवार अलसुबह ही उसे पकड़ने के लिए रवाना हो गई थी।

मां की देखभाल के लिए डॉक्टर बनना चाहती थी

छात्रा के मामा ने बताया कि भांजी पढ़ाई में बहुत होशियार थी। जब वह सात साल की थी, तब उसकी मां की तबीयत खराब हो गई थी। उस समय पता चला कि उसे किडनी की बीमारी है। तब से उनका डायलिसिस चल रहा है। अपनी मां की तकलीफ को देखकर वह उनका इलाज और देखभाल करने के लिए डॉक्टर बनना चाहती थी। इसलिए, पिता ने उसकी मेहनत व लगन को देखकर कोटा में दाखिला दिलाया था।

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