वाशिंगटन/तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच बीते 28 फरवरी से जारी भीषण युद्ध भले ही इस समय सीजफायर की नाजुक डोर से बंधा हो, लेकिन पर्दे के पीछे बारूद की गंध एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को बेहद कड़े लहजे में अंतिम चेतावनी जारी कर दी है। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रूथ सोशल’ पर एक पोस्ट के जरिए ट्रंप ने तेहरान को सीधे शब्दों में ललकारते हुए लिखा, “ईरान के लिए समय बहुत तेजी से बीत रहा है, और उन्हें जल्द से जल्द कदम उठाने होंगे, वरना उनका कुछ भी शेष नहीं बचेगा। समय अत्यंत महत्वपूर्ण है!” ट्रंप के इस बयान से साफ है कि वाशिंगटन अब किसी भी तरह के समझौते के मूड में नहीं है और वह ईरान को पूरी तरह घुटनों पर देखना चाहता है।
कूटनीति फेल हुई तो पेंटागन शुरू करेगा महाविनाशकारी एयर स्ट्राइक्स
ट्रंप की इस खुली धमकी के बीच वैश्विक मीडिया में भी हलचल तेज हो गई है। प्रतिष्ठित अमेरिकी अखबार ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ की एक खोजी रिपोर्ट के मुताबिक, अगर मौजूदा कूटनीतिक रास्ते और बातचीत के प्रयास बंद होते हैं, तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सैन्य ताकत का इस्तेमाल करने से रत्ती भर भी पीछे नहीं हटेंगे। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ट्रंप ईरान पर फिर से बड़े पैमाने पर हवाई हमले (एयर स्ट्राइक्स) शुरू करने का आदेश दे सकते हैं। इस संभावित सैन्य कार्रवाई के लिए पेंटागन के शीर्ष जनरल और सैन्य प्लानर्स बेहद मुस्तैदी से खाका और रणनीति तैयार करने में जुट गए हैं, ताकि आदेश मिलते ही ईरान के सैन्य ठिकानों को नेस्तनाबूद किया जा सके।
ईरान ने किया खुलासा: बातचीत के टेबल पर अमेरिका ने थोपीं ये 5 कठोर शर्तें
इस तनाव के बीच आज ही ईरान की सरकारी ‘फार्स न्यूज एजेंसी’ ने उन 5 शर्तों का खुलासा किया है, जो अमेरिका ने ईरान के बातचीत के प्रस्तावों के जवाब में उसके सामने रखी हैं। इन शर्तों से साफ है कि अमेरिका इस युद्ध को पूरी तरह अपने मुताबिक खत्म करना चाहता है। अमेरिका की ये 5 बड़ी शर्तें इस प्रकार हैं:
-
कोई मुआवजा नहीं: अमेरिका युद्ध के एवज में ईरान को किसी भी तरह के मुआवजे या हर्जाने का भुगतान नहीं करेगा।
-
यूरेनियम सरेंडर: ईरान को अपना 400 किलोग्राम एनरिच्ड (संवर्धित) यूरेनियम पूरी तरह से अमेरिका को सौंपना होगा।
-
परमाणु कार्यक्रम पर लगाम: ईरान की केवल एक ही न्यूक्लियर फैसेलिटी (परमाणु संयंत्र) एक्टिव मोड में रहेगी, बाकी सब बंद करनी होंगी।
-
फ्रीज संपत्ति पर नो रिलीफ: ईरान की विदेशों में जब्त की गई संपत्तियों को बिल्कुल भी रिलीज नहीं किया जाएगा, यहां तक कि उसका 25 फीसदी हिस्सा भी वापस नहीं मिलेगा।
-
पूर्ण युद्धविराम: ईरान को सिर्फ अपने मोर्चे पर नहीं, बल्कि सभी सहयोगी मोर्चों पर युद्ध को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए बातचीत करनी होगी।
ईरान की 5 शर्तों को ट्रंप पहले ही बता चुके हैं ‘बकवास’
इस अमेरिकी दबाव से पहले ईरान ने भी अपनी तरफ से युद्ध समाप्ति के लिए अमेरिका को 5 शर्तों का एक मसौदा भेजा था। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की इन मांगों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें पूरी तरह ‘बकवास’ करार दे दिया था। ईरान ने अपनी शर्तों में मांग की थी कि लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध तुरंत खत्म किया जाए, उस पर लगे सभी आर्थिक प्रतिबंध हटाए जाएं, उसकी फ्रीज की गई संपत्तियां बहाल हों, युद्ध से हुए भारी नुकसान का मुआवजा अमेरिका दे और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) पर ईरान की संप्रभुता को अंतरराष्ट्रीय मान्यता दी जाए। ट्रंप के इनकार और नई धमकी के बाद अब ईरान की ये तमाम शर्तें ठंडे बस्ते में जाती दिख रही हैं।
सीजफायर के साये में बारूद का ढेर, कभी भी भड़क सकती है दोबारा जंग
गौरतलब है कि 28 फरवरी से शुरू हुआ अमेरिका-ईरान युद्ध इस समय केवल एक अस्थायी सीजफायर की वजह से रुका हुआ है। हालांकि, जमीन पर शांति होने के बावजूद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और मनोवैज्ञानिक युद्ध चरम पर है। यह युद्धविराम कब टूट जाए और खाड़ी देश कब दोबारा भीषण जंग की आग में झुलसने लगें, इसकी भविष्यवाणी कोई नहीं कर सकता। दोनों ही महाशक्तियां कूटनीतिक तरीके से एक-दूसरे पर लगातार मनोवैज्ञानिक दबाव बनाए हुए हैं और अपनी-अपनी शर्तों पर इस युद्ध का अंत चाहती हैं, लेकिन ट्रंप के ताजा रुख ने दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है।














