उन्नाव : आवासीय भवनों से मानक विहीन अस्पताल हो रहे धड़ल्ले से संचालित

  • मानक विहीन अस्पताल  स्वास्थ्य  विभाग की कार्रवाई से बचें हुए आखिर कब होगी कार्यवाही
  • उन्नाव शुक्लागंज विकास प्राधिकरण (यू डी ए ) के मानकों को ताक पर रखकर आवासीय भवनों से  मानक विहीन अस्पताल  हो रहे  अवैध रूप से संचालित

उन्नाव।
जनपद उन्नाव में नोडल अधिकारी नर्सिंग होम डॉक्टर तन्मय कक्कड़ की लापरवाही के चलते हैं जिले में तमाम अवैध नर्सिंग होम अवैध रूप से संचालित हो रहे हैं यहनिजी अस्पताल व नर्सिंगहोम छोटे-छोटे घरों में संचालित हैं। जबकि अस्पताल के संचालन वाले भवन के लिए इंडियन मेडिकल कौंसिल की ओर से एक मानक निर्धारित किया गया है। अस्पताल में बने वार्ड, डॉक्टर रूम, ट्रीटमेंट रूम, ऑपरेशन रूम, डिलेवरी रूम, मरीजों व उनके तीमारदारों के लिए बैठने के लिए पर्याप्त स्थान, कैंटीन व पार्किंग, पेयजल और शौचालय की पर्याप्त स्थान निर्धारित किया गया है। जिले में कुछ अस्पतालों को छोड़ दिया जाए तो अधिक तर अस्पताल पहले से बने छोटे बड़े घरों में ही संचालित हैं। हालांकि जिले में जो अस्पताल भी बने हैं वह भी गाइड लाइन के मुताबिक नही बने हैं। उसमें भी कई तरह की खामियां हैं।

किसी के यहां पर्याप्त चिकित्सक नही हैं।शहर कोतवाली क्षेत्र के सीएमओ कार्यालय के पास स्थित   नव निष्ठा हॉस्पिटल,  संगम हॉस्पिटल, आजाद हॉस्पिटलसिविल लाइंस स्थित  निष्ठा हॉस्पिटल, पीडी नगर स्थित शुभ हॉस्पिटल  अजंता हॉस्पिटल,  आवास विकास स्थित लक्ष्मी नारायण हॉस्पिटल ,   नवजीवन हॉस्पिटल बेनीगंज ललऊ खेड़ा स्थित खुशी हॉस्पिटल,गदन खेड़ा बाईपास स्थित माँ हॉस्पिटल जो कि सीज हुआ था अब वह उसी संस्थान में न्यू माँ हॉस्पिटल के नाम से अवैध रूप से संचालित हो रहा है  वही गदन खेड़ा बाईपास  के पास आराधना हॉस्पिटल, कृष्णा हॉस्पिटल, ललऊ खेड़ा स्थित  हरवंश रॉय बच्चन कॉलेज के बगल में पड़ने वाले  पुष्पा हॉस्पिटल आदि कई मानक विहीन अस्पताल है।

जो स्वास्थ्य  विभाग की कार्रवाई से बचें हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग के सेटिंग गेटिंग के खेल  चलते इन अस्पतालों के विरुद्ध  कोई कार्यवाही नहीं होती है। निजी अस्पतालों में मरीजों को इलाज के लिए भर्ती कर लिया जाता है। भर्ती करने के बाद उन्हें जिस लायक इलाज की जरूरत है या फिर ऑपरेशन आदि किये जाना है तो ऐसे मरीजों को कुछ दिना मरीजों अस्पताल में रखा जाता है। इस दौरान दवाओं के साथ महंगा बेड चार्ज वसूल किया जाता है। कभी-कभी तो अस्पताल या फिर निजी अस्पतालों के बाहर वाले कान्ट्रैक्ट वाले डॉक्टरों के आने तक बिना किसी जरूरत के अस्पताल में लिटा कर रखा जाता है। फिर धीरे धीरे कर मरीज के तीमारदारों से मोटी रकम जमा करायी जाती है। बार बार तय रकम से अधिक की वसूली की जाती है इसी को लेकर कई। निजी अस्पताल में मारपीट की घटनाये हो चुकी है।

जिले के सभी पंजीकृत अस्पतालों में मरीजों को फीस, दवा अलग अलग कई तरह के चार्ज के नाम पर लूटा जा रहा है। जबकि इसके लिए भी मानक निर्धारित किया गया है। सभी अस्पतालों को अपने यहां दी जाने वाली सुविधाओं इलाज व उस पर आने वाले खर्च आदि का रेट निर्धारित वाला बोर्ड लगाना चाहिए। इतना ही नही उसे समय समय पर मेन टेन भी करना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। जैसा केस व मरीज उसे वैसे ही लूटा जा रहा है।धरती के भगवान कहे जाने वाले चिकित्सक व उनका निजी अस्पताल जिले में अब पूरी तरह दुकान की शक्ल लेता जा रहाहै। मरीजों से मोटी फीस के बाद भी मरीजों को मुकम्मल सुविधा नहीं मिल पा रही है। जिले में संचालित अधिकांश अस्पतालों में मानक के अनुरुप आधारभूत संरचना उपलब्ध नहीं है। मरीजों के लिए बैठने से लेकर उनके उपचार को लेकर अस्पतालों में संवेदनशीलता नहीं दिखती है। गंभीर बीमारी से ग्रस्त मरीजों को भी अस्पतालों में लगी कुर्सी पर बैठकर ही घंटों अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। यह पीड़ा गंभीर मरीज व उनके परिजनों के लिए असहनीय होती है।

मरीजों के उपचार की आस में बैठे मरीज व उनके परिजन इसका विरोध नहीं कर पाते। शहर में आज की तिथि में ऐसे लगभग साठ से सत्तर निजी क्लिनिक गरीबों की जेब कतरने की मशीन बने हैं। राजनीतिक दल के लोग भी इस अहम मसले को मुद्दा नहीं बनाते जबकि यह जिले की एक बड़ी व गंभीर समस्या है जो सीधे तौर पर हजारों आम आदमी की जिंदगी से जुड़ा सवाल है।अस्पताल के लिए जरुरी आधारभूत संरचना विरले अस्पतालों में ही दिखती है। अधिकांश अस्पतालों में दिव्यांग व गंभीर मरीजों के लिए ढ़लाईनुमा सीढ़ी तक की व्यवस्था नहीं रहने के कारण मरीज के परिजन उन्हें गोद में उठाकर भर्ती कक्ष तक ले जाते हैं। यह स्थिति स्त्री एवं प्रसूती अस्पताल से लेकर गंभीर मरीजों का इलाज करने वाले अस्पतालों की भी है। मरीजों के लिए मुकम्मल पेयजल व शौचालय की भी व्यवस्था अस्पतालों में नहीं रहने के कारण मरीज और उनके परिजन परेशान होते हैं।

काउंटर से लेकर भर्ती कक्ष और आपातकालीन विभाग में भी मुकम्मल सुविधाओं का अभाव रहने के बाद अस्पतालों का संचालन बेरोकटोक जारी है। ये मानक विहीन अस्पताल बड़ी बीमारी  बताकर अस्पताल आये हुए  मरीजों का शोषण करते है। बिना पंजीकरण के अस्पतालों का संचालन करने वाले संचालक अथवा ऐसे जगहों पर तैनात डॉक्टर गम्भीर रूप से सामान्य बीमारी से बीमार मरीजों को भी बड़ी बीमारी बताकर लम्बा इलासज करते है और शोषण करते है। साथ ही जांच आदि के नाम पर मरीजों का अलग से शोषण किया जाता है। प्रसव के आने वाली महिलाओं को बिना जांच के ही ऑपरेशन की सलाह दे जाती है। प्रसव की जटिलताओं को बताकर आनन फानन में ऑपरेशन की तैयारी  भी कर दी जाती है। जिससे कई बार महिलाओं व नवजात की जान भी चली जाती है।  जिले में दो से  से अधिक अस्पताल व नर्सिग होम का संचालन किया जा रहा है। जहां पर ओपीडी से लगात ऑपरेशन तक की सुविधा मुहैया कराई जा रही है। संसाधनों के अभाव के बीच में भी, प्रशासन की बगैर जानकारी के चल रहे है और अस्पतालों होने वाली मौतों का भी पता नहीं चल पाता है।

मनमाने तरीके से चलते वाले अस्पतालों पर होने वाली मौतों तक पता प्रशासन या लोगों को तब चलता है जब परिवार के लोग मामले की शिकायत करतें है या फिर मौत के बाद हो हल्ला करते है। अवैध रूप से संचालित हो रहे किसी भी अस्पताल के पास ऐसी सुविधाएं नही है कि  कोरोना जैसी महामारी से निपटने के लिए वह सक्षम हो और स्वास्थ्य विभाग इन अस्पतालों को आइसुलेशन सेंटर बना सके। इन मानक विहीन अस्पतालों में  अप्रशिक्षित अनट्रेंड स्टाफ द्वारा,   चिकित्सालय में आए हुए मरीजों का इलाज किया जाता है। मानक विहीन अस्पतालों मे बायोमेडिकल वेस्ट का निस्तारणगाइडलाइन के अनुसार नही  किया जाता है। नोडल अधिकारी ( नर्सिंग होम) डॉक्टर तन्मय कक्कड़  आखिर  जनपद में अवैध एवं मानकविहीन  हॉस्पिटलो  के विरुद्ध कार्यवाही करने में देर क्यों कर रहे हैं। नोडल अधिकारी ( नर्सिंग होम) डॉक्टर  तन्मय कक्कड़ अवैध मानक विहीन अस्पतालों के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही करके  कब करेंगे सील यह एक बड़ा बड़ा प्रश्न है। जब अवैध अस्पतालों के विरुद्ध कार्यवाही के सम्बंध में मुख्य चिकित्साधिकारी से बात किया तो उन्होंने इस मामले में भ्रामक उत्तर दिया  की मैं बाहर हु पता करके बताता हूं ऐसा करते-करते करीब एक महीना गुजर चुका है सीएमओं साहब नोडल अधिकारी से बात नही कर पा रहे है।

यूडीए के मानकों को धता बताकर एक दर्जन अस्पताल आवासीय भवनों से हो रहे संचालितउन्नाव शुक्लागंज विकास प्राधिकरण (यू डी ए ) में तैनात जेई आखिर इन आवासीय भवनों में अवैध रूप से संचालित हो रहे मानक विहीन  अस्पतालों के संचालित होने के बावजूद कोई कार्यवाही नही कर रहे है जिससे इन अवैध अस्पताल संचालको के हौसले बुलंद है। नगर क्षेत्र में कई दर्जन ऐसे मानक विहीन /अवैध अस्पताल है जो यूडीए के मानकों  को धता बताकर आवासीय भवनों से  बेहतर इलाज के नाम पर गरीबो की जेब काटने का काम कर रहे है । 

क्या है नर्सिंग होम एक्ट – एक्ट में प्रावधान के तहत नर्सिंग होम में आने वालों को सुविधाएं और सेवाएं देनी होती है।विशेषज्ञ चिकित्सक के अलावा निपुण स्वास्थ्य कर्मी की व्यवस्था होनी चाहिए ।लेखा-जोखा का भी हिसाब रखना होता है।स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इसके विधिवत संचालन  से लोगों को चिकित्सा क्षेत्र में बेहतर सुविधाएं मिलती हैं।लाइसेंसी नर्सिंग होम के संचालन से अवैध नर्सिंग होम पर नियंत्रण होता है। नियमों का उल्लंघन करने पर लाइसेंस रद्द करने का भी प्रावधान है।

नर्सिंग होम के लिए सुरक्षा के मानक-
नर्सिंग होम में एक्सटिंगयूशर हो ,फायर फर्स्ट एड होज रील हो  ,वेट राइजर का होना जरूरी ऑटोमैटिक स्प्रिंगकलर सिस्टम ,ऑटोमैटिक डिटेक्टर एन्ड फायर फायर अलार्म सिस्टम ,मैनुअली आपरेड फायर अलार्म सिस्टम, 10 ली0 पानी का टेरिस टैंक ,75 हजार ली0 पानी का अंडर ग्राउंड वाटर टैंक , फायर पम्प होना जरूरी, 1620 एलपीएम(लीटर पर मिनट का इलेक्ट्रिक फायर पंप ,1620 एलपीएम का डीजल पंप,180 एलपीएम का जाकी पंपकम से कम 12 मीटर चौड़ी सड़क पर हॉस्पिटल हो हॉस्पिटल का जीना कम से कम दो मीटर चौड़ा हो एवं दो जीने भी जो एक अंदर एव बाहर की ओर हो,गलियारा कम से कम 2.40 मीटर का हो,नर्सिंग होम में कम से कम दो निकास मार्ग होना जरूरी  जिसमे एक मेन गेट और एक इमरजेंसी गेट हो।

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