पश्चिम एशिया (West Asia) से इस वक्त की सबसे बड़ी और खौफनाक खबर सामने आ रही है। खाड़ी क्षेत्र में पिछले कुछ समय से छाई खामोशी अब हमेशा-हमेशा के लिए टूट चुकी है। पिछले 24 घंटों के दौरान ईरान की धरती पर 170 से ज्यादा भीषण धमाके हुए हैं, जिससे आसमान में सिर्फ आग की लपटें और जमीन पर बारूद का धुआं नजर आ रहा है। दुनिया के सामने इस समय सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच हुआ युद्धविराम (Ceasefire) अब इतिहास के पन्नों में दफन हो चुका है?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर दोबारा अत्यंत घातक प्रहार कर शांति समझौते के तमाम रास्तों पर पूरी तरह से पूर्ण विराम लगा दिया है। सनसनीखेज बात यह है कि अमेरिका का यह भीषण हमला उस वक्त हुआ, जब ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई को उनके पैतृक शहर मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जा रहा था। इस अपमान से भड़के ईरान ने अब ‘इंतकाम का महाप्रण’ लिया है और सीधे राष्ट्रपति ट्रंप के खात्मे की प्लानिंग शुरू कर दी है। खुफिया रिपोर्ट लीक होने के बाद वॉशिंगटन से लेकर तेहरान तक हड़कंप मच गया है।
ट्रंप का कबूलनामा: 20 गुना ताकत से किया प्रहार, वजूद मिटाने की दी चेतावनी
जिस खामोशी को दुनिया एक नए शांति युग की शुरुआत समझ रही थी, वह वास्तव में तूफान से पहले की भयानक शांति थी। समंदर में तैनात अमेरिकी युद्धपोतों (Warships) से अचानक गगनभेदी गर्जना के साथ फाइटर जेट्स ने उड़ान भरी और ईरान के कोने-कोने में मिसाइलों की विनाशकारी बारिश कर दी। इस अप्रत्याशित हमले ने ईरान के सैन्य ठिकानों और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर को पूरी तरह तबाह कर दिया है।
इस महाविध्वंस की पुष्टि खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने बयान में की है। ट्रंप ने गरजते हुए कहा, “हमने ईरान पर बेहद जोरदार और निर्णायक हमला किया है। हमने उन्हें 20 गुना ज्यादा ताकत से जवाब दिया है। ईरान ने हमारे दो नहीं, बल्कि तीन जहाजों को निशाना बनाने की हिमाकत की थी। सैन्य मोर्चे पर अमेरिका पहले ही जीत चुका है और अब ईरान के पास कोई ताकत नहीं बची है।” ट्रंप ने इन हमलों को महज एक ‘ट्रेलर’ करार देते हुए चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने अपनी युद्ध वाली जिद नहीं छोड़ी, तो उसका वजूद हमेशा के लिए मिटा दिया जाएगा।
अमेरिका के 19 युद्धपोत तैनात; चाबहार, बुशहर और तेहरान एयरपोर्ट दहल उठे
पेंटागन (Pentagon) के मुताबिक, वैश्विक खतरों और समुद्री व्यापारिक मार्गों को सुरक्षित करने के लिए यह बड़ी सैन्य कार्रवाई बेहद जरूरी थी। अमेरिका ने जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास अपने 19 अत्याधुनिक युद्धपोत और अरब सागर में 20 वॉरशिप तैनात कर दिए हैं। बीते 24 घंटे में अमेरिकी बमवर्षकों ने ईरान के 10 प्रमुख शहरों और 5 रणनीतिक द्वीपों पर स्थित 150 से अधिक ठिकानों को मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया।
इस अमेरिकी हमले में भारत के सहयोग से बने सामरिक रूप से महत्वपूर्ण चाबहार पोर्ट (Chabahar Port), बुशहर पोर्ट और बंदर अब्बास पोर्ट को भारी नुकसान पहुंचने की खबर है। अमेरिकी मिसाइलों ने तेहरान इंटरनेशनल एयरपोर्ट के मुख्य रनवे को भी क्षतिग्रस्त कर दिया है, जबकि तेहरान और मशहद को जोड़ने वाला विशाल रेल व पुल नेटवर्क पूरी तरह नेस्तनाबूद हो गया है। प्राथमिक दावों के मुताबिक, इन हवाई हमलों में अब तक 14 लोगों की मौत हो चुकी है। दूसरी ओर, ईरान ने झुकने से साफ इनकार करते हुए पलटवार किया है और कुवैत व बहरीन में स्थित 4 अमेरिकी सैन्य बेसों (जैसे जुफैर, शेख ईसा और अली अल सलेम बेस) पर मिसाइलें दागकर उन्हें दहला दिया है।
खामेनेई के अंतिम सफर के बीच हमला, मशहद के होटलों में लगे ट्रंप की मौत के पोस्टर
यह हमला रणनीतिक के साथ-साथ ईरान को मानसिक रूप से तोड़ने के लिए किया गया था। जब लाखों की संख्या में ईरानी नागरिक अपने दिवंगत सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए मशहद शहर पहुंच रहे थे, ठीक उसी वक्त अमेरिका ने मशहद जाने वाले रेलवे रूट के दो बड़े पुलों को उड़ा दिया। इस कारण 50 हजार से अधिक जायरीन (यात्री) भीषण गर्मी और तनाव के बीच रास्ते में ही फंस गए।
भले ही खामेनेई को सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया हो, लेकिन इस पवित्र घड़ी में हुए हमले ने ईरानी जनता और वहां की सेना के भीतर अमेरिका और विशेषकर डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ प्रतिशोध की ज्वाला को भड़का दिया है। मशहद के बड़े होटलों और चौराहों पर विशाल बैनर टांग दिए गए हैं, जिन पर साफ अक्षरों में लिखा है—“हम तुम्हें मार देंगे ट्रंप!” अमेरिकी खुफिया एजेंसियों (CIA) के लिए यह बैनर बेहद चिंताजनक हैं क्योंकि मशहद वही पवित्र शहर है जहां से खामेनेई आते थे।
आखिर ट्रंप क्यों हैं ईरान की हिटलिस्ट में नंबर-1? ये हैं 5 बड़ी वजहें
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों के मुताबिक, ईरान के भीतर डोनाल्ड ट्रंप को लेकर जो नफरत है, उसके पीछे गहरे ऐतिहासिक और सैन्य कारण हैं:
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कासिम सुलेमानी की हत्या: यह डोनाल्ड ट्रंप ही थे, जिनके सीधे आदेश पर ईरान के सबसे लोकप्रिय जनरल कासिम सुलेमानी को बगदाद में ड्रोन हमले से उड़ाया गया था।
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सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत: बीते 28 फरवरी को अमेरिकी-इजरायली संयुक्त एयरस्ट्राइक का आदेश भी ट्रंप ने दिया था, जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की जान चली गई थी।
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मासूम बच्चों की मौत: ईरान का आरोप है कि मीनाब प्रांत में एक स्कूल पर हुए अमेरिकी मिसाइल हमले में कई बेगुनाह बच्चों की मौत के जिम्मेदार भी ट्रंप ही हैं।
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कड़े आर्थिक प्रतिबंध: ट्रंप ने अपने पिछले और वर्तमान कार्यकाल में ईरान की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से तबाह करने के लिए उस पर सबसे कड़े प्रतिबंध (Economic Sanctions) थोपे हैं।
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परमाणु संधि का टूटना: ईरान के साथ बरसों की मेहनत के बाद हुई ऐतिहासिक न्यूक्लियर डील (JCPOA) को एकतरफा तोड़ने वाले नेता भी डोनाल्ड ट्रंप ही थे।
जान का खतरा: तुर्किये नाटो समिट से लौटते वक्त ट्रंप ने अचानक बदला अपना विमान
ईरानी खतरे की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि खुद राष्ट्रपति ट्रंप ने स्वीकार किया है कि वह इस समय ईरान की हिटलिस्ट में पहले पायदान पर हैं और उनकी हत्या का प्रयास किया जा सकता है। इसका एक जीवंत उदाहरण तुर्किये में आयोजित नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन से वापसी के दौरान देखने को मिला।
ट्रंप इस समिट में शामिल होने के लिए कतर की सरकार से तोहफे में मिले $400 मिलियन (40 करोड़ डॉलर) के चमचमाते अत्याधुनिक विमान से पहुंचे थे। लेकिन वापसी के वक्त अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों के इनपुट पर उन्होंने कतर वाले विमान को छोड़ दिया और तीन दशक पुराने, बेहद सुरक्षित ‘एयर फोर्स वन’ (Air Force One) विमान से उड़ान भरी। जब वह ईरान की मिसाइल रेंज से सुरक्षित बाहर निकल गए, तब ब्रिटेन (UK) में रुककर वह दोबारा अपने नए विमान में सवार होकर वॉशिंगटन पहुंचे।
पुराने ‘एयर फोर्स वन’ की वो अभेद्य सुरक्षा तकनीक, जिसने टाला बड़ा खतरा
अमेरिकी सीक्रेट सर्विस ने ट्रंप को कतर वाले नए प्लेन की जगह पुराने ‘एयर फोर्स वन’ में बैठने की सलाह क्यों दी, इसके पीछे विमान की सुरक्षा से जुड़ी यह पांच बड़ी खूबियां हैं:
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एडवांस मिसाइल डिफेंस सिस्टम: इस विमान में दुनिया का सबसे बेहतरीन और अचूक एंटी-मिसाइल डिफेंस सिस्टम लगा हुआ है।
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विशेष इलेक्ट्रॉनिक सेंसर: विमान के चारों ओर लगे सेंसर किसी भी दिशा से आ रही मिसाइल या रडार लॉक का पलक झपकते ही पता लगा लेते हैं।
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फ्लेयर्स और जैमर्स तकनीक: यह विमान दुश्मन की मिसाइलों के नेविगेशन सिस्टम को जाम करने और उनका रास्ता भटकाने (Chaff and Flares) में सक्षम है।
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परमाणु हमले से सुरक्षा: यह उड़ता हुआ किला परमाणु विस्फोट से निकलने वाले इलेक्ट्रोमैग्नेटिक पल्स (EMP) के प्रभाव को भी झेल सकता है।
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अपूर्ण अपग्रेडेशन: कतर से मिले नए विमान का अपग्रेडेशन बहुत जल्दबाजी में हुआ था और उसमें कई अहम मिलिट्री डिफेंस सिस्टम इंस्टॉल होना बाकी थे।
‘मुख्तार यूनिट’ का गठन: मेक्सिकन ड्रग कार्टेल और हैकर्स के साथ मिलकर रची साजिश
वॉशिंगटन में इस समय हाई अलर्ट घोषित है और व्हाइट हाउस के चारों तरफ सुरक्षा की कई परतें बढ़ा दी गई हैं। इजराइल के प्रतिष्ठित सुरक्षा चैनल ‘C 14’ की एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के मुताबिक, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की कुद्स फोर्स ने ट्रंप के खात्मे के लिए एक बेहद गुप्त और खतरनाक ‘मुख्तार यूनिट’ (Mukhtar Unit) का गठन किया है।
यह एक हाईटेक हाइब्रिड स्पेशल ऑपरेशन यूनिट है, जिसे अमेरिका के भीतर मौजूद ईरान के स्लीपर सेल्स को एक्टिवेट करने की जिम्मेदारी दी गई है। यह यूनिट मेक्सिकन ड्रग कार्टेल्स (Mexican Drug Cartels) और विदेशों में फैले अपराधियों के नेटवर्क से संपर्क साध रही है ताकि अमेरिका की सीमा में घुसकर सीधे राष्ट्रपति की सुरक्षा में सेंध लगाई जा सके।
स्नाइपर्स, टॉप जासूस और टेक इंजीनियर्स से लैस है ईरान की यह डेथ स्क्वाड
‘मुख्तार यूनिट’ को हर मोर्चे पर अजेय और अचूक बनाने के लिए इसमें ईरान के सबसे घातक मिलिट्री माइंड्स को शामिल किया गया है। इस डेथ स्क्वाड की संरचना बेहद खौफनाक है:
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लॉजिस्टिक एक्सपर्ट्स: इसमें ईरान के सबसे अनुभवी लॉजिस्टिक मास्टर शामिल हैं, जिनका काम शूटरों को बिना किसी सुराग के अमेरिका में दाखिल कराना और ऑपरेशन के बाद सुरक्षित बाहर निकालना है।
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टॉप स्नाइपर्स: यूनिट में देश के सबसे काबिल और अचूक निशाना लगाने वाले स्नाइपर्स को भर्ती किया गया है, जो लंबी दूरी से टारगेट को ढेर कर सकते हैं।
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हाई-लेवल हैकर्स: ईरान के चोटी के साइबर हैकर्स इस टीम का हिस्सा हैं, जो सैटेलाइट और डिजिटल डेटा की मदद से ट्रंप के पल-पल के लाइव लोकेशन की जानकारी जुटा रहे हैं।
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अनुभवी जासूस और कमांडर: इस पूरी टीम का नेतृत्व आईआरजीसी के उन खूंखार कमांडरों को सौंपा गया है जो दशकों से अंडरकवर ऑपरेशंस चला रहे हैं।
दिवंगत नेता खामेनेई के जनाजे पर उनके बेटे मुज्तबा खामेनेई और पूरी आईआरजीसी सेना ने ट्रंप को मौत के घाट उतारने की कसम खाई है। अमेरिका में एक्टिव हो चुके इन स्लीपर सेल्स के चलते दुनिया के सबसे शक्तिशाली राष्ट्रपति के चारों ओर इस वक्त मौत का साया मंडरा रहा है।















