
समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता मोहम्मद आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान से जुड़े चर्चित कानूनी मामलों में इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ा अपडेट सामने आया है. फर्जी पैन कार्ड और दोहरे जन्म प्रमाण पत्र के जरिए धोखाधड़ी व फर्जीवाड़े से चुनाव लड़ने के मामले में उच्च न्यायालय ने दोनों की सजा को निलंबित (सस्पेंड) करते हुए उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दे दिया है. हालांकि, अदालत ने उनकी दोषसिद्धि (कनविक्शन) पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है, जिससे उनके राजनीतिक करियर पर फिलहाल अयोग्यता की तलवार लटकी रहेगी.
कितने मामलों में दर्ज हैं केस और क्या है पेंडिंग मामलों की स्थिति?
कानूनी दस्तावेजों और अदालती रिकॉर्ड के मुताबिक आजम खान और उनके परिवार पर दर्ज मुकदमों का ब्यौरा इस प्रकार है:
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कुल आपराधिक मामले: आजम खान के खिलाफ कुल 93 (लगभग 92-93) आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे, जिनमें से कई मामलों में वे बरी हो चुके हैं या उन्हें पूर्व में जमानत मिल चुकी है.
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दोषसिद्धि (सजा) की स्थिति: आजम खान को अब तक कुल 8 मामलों में दोषी ठहराया जा चुका है (2 सेशन कोर्ट और 6 मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा). मजिस्ट्रेट कोर्ट से मिली दो सजाओं के खिलाफ दायर अपीलों को उच्च अदालत ने खारिज कर दिया था. इसके अलावा रामपुर की विशेष MP/MLA कोर्ट ने फर्जी जन्म प्रमाण पत्र व पैन कार्ड मामले में उन्हें 10 साल की कठोर सजा सुनाई थी.
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लंबित (पेंडिंग) केस: आजम खान के खिलाफ विभिन्न अदालतों में अभी भी 81 से अधिक मामले पेंडिंग हैं. वहीं, उनके बेटे अब्दुल्ला आजम के खिलाफ 44 मामले अलग-अलग अदालतों में विचाराधीन हैं.
क्या सीतापुर जेल से बाहर आ पाएंगे आजम खान?
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद आजम खान के जेल से बाहर आने का रास्ता काफी हद तक साफ हुआ है, लेकिन यह पूरी तरह से कुछ कानूनी शर्तों पर निर्भर करेगा.
जस्टिस समित गोपाल की सिंगल बेंच ने क्रिमिनल रिवीजन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए टिप्पणी की कि आजम खान इस मामले में पहले ही लगभग 4 साल 1 महीना और 9 दिन की कस्टडी (सजा) पूरी कर चुके हैं, इसलिए उन्हें जमानत दी जाती है. हालांकि, यदि पुलिस या जांच एजेंसियां लखनऊ या रामपुर में पीसी एक्ट (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988) के तहत दर्ज अन्य मामलों में उनका ‘बी-वारंट’ हासिल नहीं करती हैं, तभी वे जेल की सलाखों से बाहर आ सकेंगे.
कनविक्शन पर रोक से इनकार, क्या लड़ पाएंगे चुनाव?
जमानत मिलने के बावजूद आजम खान और अब्दुल्ला आजम के चुनाव लड़ने के रास्ते फिलहाल पूरी तरह बंद रहेंगे.
जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (Representation of the People Act) की धारा 8 के तहत, 2 साल या उससे अधिक की सजा पाने वाला व्यक्ति चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य हो जाता है और यह अयोग्यता सजा खत्म होने के बाद भी अगले 6 साल तक जारी रहती है. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विक्रम सिंह सैनी और नवजोत सिंह सिद्धू केस से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि ‘दोषसिद्धि (कनविक्शन) पर स्टे केवल दुर्लभ और असाधारण मामलों में ही दिया जाता है’. चूंकि कोर्ट ने दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगाई है, इसलिए दोनों नेताओं की अयोग्यता बरकरार रहेगी. इस मुख्य मामले की अंतिम सुनवाई जनवरी 2027 के तीसरे हफ्ते में तय की गई है.


















