आखिरी 60 मिनट और… ईरान पर होने वाला घातक हमला टला, इजरायली एयरफोर्स चीफ का बड़ा खुलासा

तेल अवीव। पिछले हफ्ते मिडिल ईस्ट (Middle East) एक ऐसी भीषण जंग के मुहाने पर खड़ा था, जो पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले सकती थी। ईरान पर एक ऐसा विनाशकारी हमला होने वाला था, जिसकी तैयारी पूरी हो चुकी थी, लेकिन ऐन वक्त पर केवल 60 मिनट पहले इसे रोक दिया गया। इस बात की सनसनीखेज पुष्टि खुद इजरायल के वायुसेना प्रमुख मेजर जनरल ओमर तिश्लर (Maj. Gen. Omer Tischler) ने की है। उन्होंने बताया कि इजरायली वायुसेना का पूरा बेड़ा उड़ान भरने के लिए तैयार था, स्क्वाड्रनों में पायलटों की ब्रीफिंग चल रही थी, लेकिन आखिरी घंटे में मिले एक आदेश ने इतिहास का रुख मोड़ दिया।

‘सैकड़ों ठिकानों पर तबाही की थी तैयारी’

वायुसेना प्रमुख मेजर जनरल ओमर तिश्लर के मुताबिक, यह खौफनाक मंजर 8 जून 2026 की दोपहर का था। अप्रैल 2026 की शुरुआत में हुए सीजफायर के बाद इजरायल और ईरान के बीच यह अब तक का सबसे बड़ा और घातक टकराव था। मेजर जनरल तिश्लर ने बताया, “8 जून की दोपहर को पूरी वायुसेना एक व्यापक और बेहद आक्रामक हमले के लिए पूरी तरह तैयार थी। हमले के आधिकारिक आदेश से कुछ घंटे पहले ही अलर्ट पीरियड को बेहद कम कर दिया गया था। हमारे लड़ाकू विमानों का पूरा बेड़ा हथियारों से लैस था, प्लानिंग सटीक थी और ईरान के अंदर सैकड़ों ठिकानों को एक साथ नेस्तनाबूद करने की पूरी तैयारी थी, लेकिन जब स्क्वाड्रनों में अंतिम ब्रीफिंग चल रही थी, तभी इस ऑपरेशन को रोकने का आदेश आ गया।”

डोनाल्ड ट्रंप के एक फोन से बदला बेंजामिन नेतन्याहू का फैसला

पूरी ताकत झोंकने के बाद भी आखिर इजरायल ने अपने कदम पीछे क्यों खींचे? इसके पीछे की वजह वैश्विक कूटनीति के सबसे बड़े मंच से जुड़ी है। सूत्रों के मुताबिक, जब इजरायल के लड़ाकू विमान उड़ान भरने ही वाले थे, तब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को एक के बाद एक कई फोन किए। ट्रंप ने सख्त लहजे में नेतन्याहू को चेतावनी दी कि अगर इजरायल ने ईरान पर इस स्तर का बड़ा हमला किया और तनाव को और बढ़ाया, तो अमेरिका इस जंग में उसे अकेला छोड़ देगा। अमेरिकी महाशक्ति के पीछे हटने के खतरे को भांपते हुए नेतन्याहू ने तुरंत अपनी वायुसेना को रुकने का आदेश दिया। इसके फौरन बाद अमेरिका और ईरान के बीच परदे के पीछे एक समझौता हुआ, जिसने इस महायुद्ध को टालने का रास्ता साफ किया।

जानिए पिछले हफ्ते मैदान-ए-जंग में क्या-क्या हुआ?

इस बेहद तनावपूर्ण हफ्ते की शुरुआत तब हुई जब हिजबुल्लाह ने उत्तरी इजरायल पर ताबड़तोड़ रॉकेट दागे। इसके जवाब में इजरायली सेना ने बेरूत के दहियेह इलाके में भीषण बमबारी की। इस कार्रवाई से बौखलाए ईरान ने इजरायल पर सीधे 24 बैलिस्टिक मिसाइलें दाग दीं, जबकि यमन के हूती विद्रोहियों ने भी इस आग में घी डालते हुए इजरायल पर दो मिसाइलें चलाईं।

इजरायल ने भी चुप बैठने के बजाय पलटवार किया। इजरायली एयरफोर्स ने अपनी मुख्य सीमा से 1500 किलोमीटर दूर जाकर ईरान की हवाई सुरक्षा प्रणालियों को मटियामेट कर दिया और कुछ फैक्ट्रियों को भी निशाना बनाया। हालांकि, यह उस महाहमले के सामने कुछ भी नहीं था, जिसकी स्क्रिप्ट 8 जून को लिखी जा चुकी थी।

दो लहरों में हुआ था हमला, तबाह किए थे ईरान के मिसाइल प्लांट

भले ही 8 जून का सबसे बड़ा हमला टल गया हो, लेकिन उससे ठीक पहले इजरायली वायुसेना ने ईरान के भीतर दो अलग-अलग लहरों (Waves) में खतरनाक स्ट्राइक की थी। ऑपरेशन के पहले चरण में इजरायली विमानों ने पश्चिमी और मध्य ईरान में घुसकर वहां तैनात नौ अत्याधुनिक वायु रक्षा प्रणालियों (Air Defense Systems) को ध्वस्त कर दिया। इसके बाद दूसरी लहर में दक्षिण-पश्चिमी ईरान पर धावा बोला गया, जहां मिसाइलों के लिए कच्चा माल बनाने वाली तीन बड़ी पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स फैक्ट्रियों को मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया गया। लेकिन अगर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का दखल न होता, तो आज मध्य पूर्व की तस्वीर कुछ और ही होती।

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