
नई दिल्ली (हि.स.)। सुप्रीम कोर्ट राजनीतिक दलों को आरटीआई के दायरे में लाने की मांग पर एक अगस्त को सुनवाई करेगा। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि केंद्रीय सूचना आयोग ने 2013 में राजनीतिक पार्टियों को आरटीआई के दायरे में लाने का आदेश दिया था। इसके बाद एक और भी आदेश दिया था, जिसे आज तक लागू नहीं किया गया।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि केंद्रीय सूचना आयोग के आदेश के आधार पर विधायिका को इसे लागू करने के लिए याचिका दाखिल नहीं की जा सकती है। उन्होंने कहा कि मामले पर सुनवाई के लिए अटार्नी जनरल उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए सुनवाई की अगली तारीख तय कर दी जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने 31 जनवरी को इलेक्टोरल बांड को चुनौती देने से संबंधित याचिकाओं को तीन हिस्सों में बांटते हुए तीनों पर अलग-अलग सुनवाई करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने आदेश दिया था कि इलेक्टोरल बांड से जुड़ा पहला भाग यानी इलेक्टोरल बांड योजना को चुनौती देने के मामले पर सुनवाई होगी। दूसरे भाग में उन याचिकाओं पर सुनवाई होगी, जिसमें पड़ताल की जाएगी कि क्या राजनीतिक दलों को आरटीआई के दायरे में रखा जाना चाहिए। तीसरे भाग में 2016 एवं 2018 के फाइनेंस एक्ट के जरिए एफसीआरए में संशोधन को चुनौती देने के मुद्दे पर सुनवाई होगी। इस मुद्दे पर अप्रैल के बीच में सुनवाई होगी।














