
मेरठ। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक मेरठ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान गरीबी पर बात करते हुए भावुक हो गए। मंच से संबोधन के दौरान उन्होंने अपने जीवन के संघर्ष साझा किए और इस दौरान उनकी आंखें भर आईं।
यह कार्यक्रम मेरठ के बच्चा पार्क स्थित पीएल शर्मा स्मारक सभागार में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के पूर्व दिवस पर आयोजित कवि सम्मेलन में हुआ, जहां उपमुख्यमंत्री मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे। अपने भाषण में उन्होंने कहा कि बचपन में साधनों की भारी कमी थी। “कभी चप्पल होती थी तो जूता नहीं होता था। गर्मी में चप्पल और सर्दी में जूता मिलना मुश्किल था। आज भी जब सड़क पर किसी गरीब को दुखी देखता हूं तो खुद भी दुखी हो जाता हूं,” यह कहते हुए वे भावुक हो गए और मंच पर आंसू पोंछते नजर आए।
डिप्टी सीएम ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया कि आटा गूंधते समय कभी आटा ज्यादा हो जाता था तो कभी पानी। उन्होंने कहा कि लखनऊ आने के बाद भी शुरुआती दिनों में स्टोव पर रोटी बनाकर जीवन यापन किया।
डिप्टी सीएम बृजेश पाठक का ये वीडियो भावुक कर देगा। मेरठ के पीएल शर्मा स्मारक में पहुंचे बृजेश पाठक अपने संघर्ष के दिनों को याद कर मंच पर भावुक हो गए। कहा चप्पल होते थे तो जूता नहीं होता यह। जब एक गरीब व्यक्ति को देखता हूं तो मैं दुखी होता हूं। सुनिए.. pic.twitter.com/GaET2ejAfp
— shalu agrawal (@shaluagrawal3) January 22, 2026
उन्होंने कहा, “मैं अपने आप को इस लायक नहीं समझता कि आज जिस पद पर हूं, उसके योग्य हूं। मैं उस गरीब आदमी को अपना मानता हूं, जिस तरह की परिस्थितियों में मैं खुद पला-बढ़ा हूं।”
इस दौरान उन्होंने डॉक्टर हरिओम पवार का भी उल्लेख किया और उन्हें पिता व अभिभावक समान बताया। साथ ही कहा कि डॉक्टर पवार ने मां भारती के तिरंगे को दुनिया तक पहुंचाया है, इसलिए वे उनका विशेष सम्मान करते हैं।
कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत में उपमुख्यमंत्री ने राजनीतिक सवालों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जाति और धर्म के आधार पर वोट मांगते हैं और यदि ऐसा न करें तो वे प्रधान का चुनाव भी नहीं जीत सकते।











