‘जब दादा की पेंशन आएगी तब नई पैंट लूंगा…’ मासूम का जवाब सुन रो पड़े टीचर; फिर जो हुआ उसने जीत लिया करोड़ों का दिल!

नई दिल्ली: सोशल मीडिया की दुनिया में रोज़ाना हज़ारों वीडियो वायरल होते हैं, लेकिन कुछ वीडियो सीधे रूह को छू जाते हैं। इन दिनों एक सरकारी स्कूल के कमरे से निकला एक भावुक वीडियो करोड़ों लोगों की आंखों में आंसू ला रहा है। यह कहानी एक ऐसे मासूम की है जिसके पास पहनने को पूरी ड्रेस नहीं थी और एक ऐसे शिक्षक की, जिसने किताबी ज्ञान से परे जाकर ‘मानवता’ का सबसे बड़ा पाठ पढ़ाया।

“जब दादा की पेंशन आएगी तब पहनूंगा…”

वायरल क्लिप की शुरुआत एक सरकारी स्कूल की क्लास से होती है, जहाँ शिक्षक शुभम शेरवाल अपने छात्र ‘राज’ से प्यार से सवाल करते हैं कि उसने स्कूल ड्रेस की पैंट क्यों नहीं पहनी? मासूम राज ने जो जवाब दिया, उसने क्लास में सन्नाटा पसरा दिया। डबडबाई आंखों के साथ बच्चे ने बताया कि उसकी इकलौती पैंट फट गई है। उसने बड़ी मासूमियत से कहा कि जब उसके दादाजी की पेंशन आएगी, तब वह नई पैंट खरीदेगा।

माता-पिता का साया नहीं, आंखों में गहरा दर्द

बातों ही बातों में जब टीचर शुभम को पता चला कि राज के माता-पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं, तो वहां मौजूद हर शख्स का दिल पसीज गया। अपनी आपबीती सुनाते हुए बच्चे का उदास चेहरा और उसकी खामोश चीख ने शिक्षक को भीतर तक झकझोर दिया। शुभम ने तुरंत उस मासूम को गले लगा लिया और उसे ढांढस बंधाया। इंस्टाग्राम पर @shubham_sherwal अकाउंट से शेयर किए गए इस वीडियो के कैप्शन में टीचर ने लिखा— “कितना दर्द है इस मासूम की आंखों में।”

अगले दिन शिक्षक ने पेश की ‘सच्चे गुरु’ की मिसाल

कहानी सिर्फ सांत्वना देने तक सीमित नहीं रही। अगले दिन शिक्षक शुभम शेरवाल जब स्कूल पहुंचे, तो उनके हाथ में एक नया पैकेट था। वे राज के लिए अपनी तरफ से नई शर्ट और पैंट खरीदकर लाए थे। वीडियो के दूसरे हिस्से में टीचर खुद अपने हाथों से राज को नई ड्रेस पहनाते नजर आ रहे हैं। नई और साफ-सुथरी ड्रेस पहनने के बाद राज के चेहरे पर जो सुकून और मुस्कान दिखी, उसने करोड़ों नेटिजन्स का दिन बना दिया।

करोड़ों व्यूज और दुआओं का सैलाब

इस दिल छू लेने वाले वीडियो को अब तक 2.6 करोड़ (26 Million) से ज्यादा बार देखा जा चुका है और करीब 31 लाख लोगों ने इसे लाइक किया है। कमेंट सेक्शन में लोग टीचर शुभम की जमकर तारीफ कर रहे हैं। यूज़र्स उन्हें ‘असली हीरो’ और ‘युग का सच्चा गुरु’ बता रहे हैं। लोगों का कहना है कि एक शिक्षक कभी माता-पिता की कमी तो पूरी नहीं कर सकता, लेकिन मुश्किल वक्त में एक मजबूत सहारा जरूर बन सकता है। शुभम ने साबित कर दिया कि शिक्षा का असली उद्देश्य केवल साक्षर बनाना नहीं, बल्कि संवेदनशील इंसान बनाना भी है।

 

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