
नई दिल्ली/मंगलौर। पश्चिम एशिया (Middle East) में गहराते युद्ध के बाद जब पूरी दुनिया ईंधन की किल्लत और आसमान छूती कीमतों से कांप रही है, तब भारत एक ‘सुरक्षा कवच’ के साथ तैयार खड़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरगामी रणनीति का सबसे बड़ा नतीजा कर्नाटक के मंगलौर में देखने को मिल रहा है। यहाँ दक्षिण एशिया की सबसे बड़ी 80,000 मीट्रिक टन क्षमता वाली भूमिगत एलपीजी कैवर्न (Underground LPG Cavern) पूरी तरह ऑपरेशनल हो चुकी है। करीब 6 महीने पहले सितंबर 2025 में चुपचाप शुरू की गई यह परियोजना आज भारत की ऊर्जा सुरक्षा की रीढ़ बन गई है।
समुद्र तल से 156 मीटर नीचे ‘गैस का खजाना’, हमलों से भी सुरक्षित
मंगलौर की यह एलपीजी कैवर्न इंजीनियरिंग का एक अद्भुत चमत्कार है। इसे जमीन के ऊपर नहीं, बल्कि समुद्र तल से 156 मीटर नीचे ठोस चट्टानों को काटकर बनाया गया है।
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विशाल क्षमता: इसमें 80,000 मीट्रिक टन एलपीजी स्टोर की जा सकती है, जो लगभग 6 करोड़ लीटर ईंधन के बराबर है।
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अभेद्य सुरक्षा: गहराई में होने के कारण यह प्राकृतिक आपदाओं, लीकेज और युद्ध की स्थिति में बाहरी हमलों से पूरी तरह सुरक्षित है।
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वॉटर कर्टेन टेक्नोलॉजी: गैस रिसाव को रोकने के लिए इसमें अत्याधुनिक ‘वॉटर कर्टेन’ तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जो इसे पर्यावरण के अनुकूल बनाती है।
हॉर्मूज संकट में भी भारत को मिल रहा रूस और अमेरिका का साथ
दुनिया हैरान है कि जहाँ रूस और अमेरिका एक-दूसरे के धुर विरोधी हैं, वहीं भारत की कूटनीति ने दोनों को एक ही घाट पर ला खड़ा किया है। रविवार (22 मार्च 2026) को मंगलौर पोर्ट पर एक तरफ अमेरिका से एलपीजी लेकर ‘पायक्सिस पॉयनियर’ पहुंचा, तो दूसरी तरफ रूस से क्रूड ऑयल लेकर ‘एक्वा टाइटन’। हॉर्मूज जलडमरूमध्य में जारी तनाव के बावजूद भारत ने अपने एनर्जी इंपोर्ट का दायरा 27 देशों से बढ़ाकर 41 देशों तक कर लिया है, जिससे सप्लाई बाधित होने का खतरा टल गया है।
लोकसभा में पीएम मोदी का हुंकार: “हमने संकट के समय के लिए बनाए रिजर्व”
23 मार्च 2026 को लोकसभा में बोलते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने साफ किया कि भारत अपनी जरूरत की 60% एलपीजी आयात करता है, इसलिए घरेलू सप्लाई को सुरक्षित रखना उनकी प्राथमिकता है। पीएम ने कहा, “बीते 11 सालों में हमने एनर्जी इंपोर्ट का विविधीकरण (Diversification) किया है। हमारे रणनीतिक भंडार (Strategic Reserves) संकट के समय बफर का काम कर रहे हैं।”
“भारत के पास वर्तमान में रणनीतिक और कमर्शियल स्टॉक मिलाकर 74 दिनों का बफर उपलब्ध है। सरकार का लक्ष्य 2030 तक इसे बढ़ाकर 90 दिन करने का है।”
भारत के प्रमुख ‘एनर्जी बैंक’ एक नजर में
देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए मोदी सरकार ने कई स्थानों पर रणनीतिक तेल और गैस भंडार बनाए हैं:
| स्थान | क्षमता | प्रकार |
| विशाखापट्टनम | 1.33 MMT | क्रूड ऑयल |
| मंगलौर (Phase-1) | 1.50 MMT | क्रूड ऑयल |
| पाडुर | 2.50 MMT | क्रूड ऑयल |
| मंगलौर कैवर्न | 80,000 MT | एलपीजी (नया) |
| चंडीखोल (Phase-2) | 4.0 MMT | निर्माणाधीन (क्रूड) |
आत्मनिर्भर भारत की गारंटी है मंगलौर प्रोजेक्ट
हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) के लिए इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड (EIL) द्वारा तैयार यह प्रोजेक्ट ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन को साकार करता है। कम कीमतों के समय गैस स्टोर कर भारत न केवल अंतरराष्ट्रीय उतार-चढ़ाव से बच रहा है, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों की रसोई को युद्ध के साये से भी मुक्त रख रहा है।













