
अयोध्या। अयोध्या के भव्य राम मंदिर में सामने आए चंदा चोरी मामले में हर गुजरते दिन के साथ बेहद चौंकाने वाले और बड़े खुलासे हो रहे हैं। शुक्रवार का दिन इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ, जब एक के बाद एक तीन बड़े घटनाक्रमों ने देश की राजनीति और संतों के बीच हलचल मचा दी। सबसे बड़ी खबर सुबह-सुबह आई, जब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने पदों से अचानक इस्तीफा दे दिया। इसके बाद दोपहर में पुलिस ने मामले के सभी 8 नामजद आरोपियों को कड़ी सुरक्षा के बीच कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें सीधे जेल भेज दिया गया। इसी के साथ तीसरा बड़ा खुलासा आरोपियों के पास से बरामद हुए भारी-भरकम कैश को लेकर हुआ है।
एसआईटी जांच और सीएम योगी के कड़े रुख के बाद गिरे बड़े विकेट
राम मंदिर चंदा चोरी मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट आने और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बेहद कड़े तेवरों के बाद ही चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे को जोड़कर देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुरुआत से ही साफ कर दिया था कि राम मंदिर की आस्था से खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। चंपत राय जहां ट्रस्ट के सर्वेसर्वा और महासचिव की भूमिका में थे, वहीं अनिल मिश्रा बतौर ट्रस्टी पूरी व्यवस्था देख रहे थे। इनके हटने के बाद अब अयोध्या से लेकर लखनऊ तक प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा हुआ है।
25 जून को दर्ज हुई थी पहली एफआईआर, 27 अप्रैल से चल रहा था खेल
इस पूरे महाघोटाले का पर्दाफाश तब हुआ जब ट्रस्ट की शिकायत पर 25 जून को श्रीराम जन्मभूमि कोतवाली में पहली एफआईआर दर्ज कराई गई। इस एफआईआर में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष यादव, करुणेश पाण्डेय, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू को नामजद किया गया था, जबकि कुछ अज्ञात लोग भी पुलिस के रडार पर हैं। एसआईटी ने जब मंदिर परिसर के 27 अप्रैल से 5 जून 2026 तक के करीब डेढ़ महीने के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज खंगाले, तो उनके होश उड़ गए। फुटेज में साफ दिखा कि आरोपी दान में आए कैश और जेवरातों को नोटों की गिनती के दौरान करीब 70 बार अपनी जेबों में छिपाकर बाहर ले जा चुके थे।
जेबों में भरकर ले जाते थे बाबा का चढ़ावा, चाबियों के कंट्रोल से लेकर वाउचर तक में हेराफेरी
एसआईटी की तफ्तीश में राम मंदिर की सुरक्षा और प्रबंधन से जुड़े 10 बेहद सनसनीखेज खुलासे हुए हैं:
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जेबों में नकदी का खेल: आरोपी टिन्नू, अनुकल्प, अविनाश, करुणेश, मनीष, लवकुश और रमाशंकर मिश्र नोट गिनने के बाद बड़ी चालाकी से रकम और कीमती आभूषणों को गायब कर देते थे।
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टिन्नू के पास था पूरा कंट्रोल: जांच में पता चला है कि पूरे कैश काउंटर, मुख्य दान पात्र और नोटों की गिनती वाले हॉल की चाबियां मुख्य आरोपी टिन्नू के पास ही रहती थीं।
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वाउचर सिस्टम में फर्जीवाड़ा: आरोपी अनुकल्प मिश्रा फर्जी वाउचर तैयार कर अपने सगे बहनोई लवकुश मिश्रा के साथ मिलकर दान के पैसों की बड़ी हेराफेरी को अंजाम दे रहा था।
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तलाशी न होना बनी बड़ी वजह: सबसे हैरान करने वाली लापरवाही यह रही कि नोट गिनने की ड्यूटी खत्म होने के बाद किसी भी कर्मचारी की कोई चेकिंग या तलाशी नहीं ली जाती थी।
7 आरोपियों से ₹79.85 लाख बरामद, लवकुश के घर से निकले 10 लाख रुपए
अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने बताया कि एसआईटी ने अब तक कुल 79 लाख 85 हजार रुपये की भारी-भरकम नकदी बरामद कर ली है। इसमें से अकेले आरोपी लवकुश मिश्रा के घर पर छापेमारी के दौरान करीब 10 लाख रुपये नकद मिले हैं। पुलिस ने कोर्ट को बताया कि कुल 8 आरोपियों में से 7 के पास से नकदी रिकवर हो चुकी है, जबकि आठवें आरोपी सुभाष श्रीवास्तव के पास से कोई कैश नहीं मिला है, लेकिन वह इस पूरे सुनियोजित आपराधिक षड्यंत्र (Conspiracy) का मुख्य हिस्सा रहा है।
सभी 8 आरोपी भेजे गए जेल, सोमवार को पुलिस मांगेगी रिमांड
गिरफ्तार किए गए सभी आठों आरोपियों को जिला न्यायालय के ड्यूटी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया, जहां से उन्हें रविवार तक के लिए न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। नियमित जज के उपलब्ध न होने के कारण इन्हें फिलहाल तीन दिन के लिए जेल भेजा गया है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि आरोपियों से और भी कई राज उगलवाने हैं, जिसके लिए सोमवार यानी 29 जून को रेगुलर कोर्ट खुलते ही पुलिस इन सभी आरोपियों की कस्टडी रिमांड के लिए अर्जी दाखिल करेगी।
वीएचपी ने दी प्रशासनिक सीईओ नियुक्त करने की सलाह, सीएम योगी बोले- ‘जीरो टॉलरेंस’
इस बड़े विवाद के बीच विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि राम मंदिर की वित्तीय व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी और आधुनिक (Tech-Based) बनाया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि मंदिर की सुरक्षा और प्रबंधन के लिए आईएएस स्तर के प्रशासनिक अनुभव वाले किसी सक्षम मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) को नियुक्त किया जाना चाहिए। वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देवरिया के एक कार्यक्रम में कड़ा संदेश देते हुए कहा कि अयोध्या करोड़ों लोगों की अटूट आस्था का केंद्र है। जनआस्था के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सरकार ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है और जो भी दोषी होगा, उसे पाताल से भी ढूंढकर सजा दी जाएगी।












