
Pakdi,Maharajganj :बरवा फहीम ड्रेन पर पीडब्ल्यूडी द्वारा निर्माणाधीन पुल अब लोगों के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। महज 10 दिनों के भीतर एक ही स्थान पर दूसरा ट्रेला पलटने की घटना ने निर्माण कार्य की सुरक्षा व्यवस्था, अस्थायी डायवर्जन की गुणवत्ता और विभागीय लापरवाही पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। राहत की बात यह रही कि दोनों हादसों में किसी की जान नहीं गई, लेकिन लगातार हो रही घटनाओं ने साफ संकेत दे दिया है कि यदि समय रहते व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
गुरुवार को पकड़ी की ओर से बरवा फहीम स्थित मिक्सर प्लांट जा रहा मोरंग-बालू से लदा एक भारी ट्रेला निर्माणाधीन पुल के पास बनाए गए कच्चे लिंक मार्ग पर अचानक असंतुलित होकर पलट गया। ट्रेला पलटते ही मौके पर अफरा-तफरी मच गई। आसपास मौजूद लोग दौड़कर चालक की मदद के लिए पहुंचे। सौभाग्य से चालक सुरक्षित बाहर निकल आया और किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। कुछ समय तक मार्ग पर आवागमन भी प्रभावित रहा।
इससे पहले 29 जून की सुबह भी इसी स्थान पर गिट्टी से लदा ट्रेला (संख्या BR-44 GA-9369) पलट गया था। उस समय सड़क पर गिट्टी फैल जाने से घंटों तक यातायात बाधित रहा और दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई थी। उस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने अस्थायी मार्ग की मजबूती और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए थे, लेकिन हालात जस के तस बने रहे। अब दूसरी घटना ने लोगों की आशंकाओं को और गहरा कर दिया है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पुल निर्माण के कारण बनाया गया कच्चा डायवर्जन भारी वाहनों के लिए सुरक्षित नहीं है। हाल की बारिश से मार्ग कई जगह धंस गया है और उसका भराव भी कमजोर हो चुका है। ऐसे में रोजाना गिट्टी, मोरंग और अन्य निर्माण सामग्री से लदे भारी वाहन इसी रास्ते से गुजर रहे हैं, जिससे हर समय दुर्घटना का खतरा बना रहता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार संबंधित विभाग को मार्ग की खराब स्थिति से अवगत कराया गया, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। लोगों का कहना है कि हादसे लगातार हो रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग की ओर से सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है।
क्षेत्रवासियों ने प्रशासन और पीडब्ल्यूडी से मांग की है कि निर्माणाधीन स्थल पर मजबूत डायवर्जन बनाया जाए, सड़क की तत्काल मरम्मत कराई जाए, बैरिकेडिंग और चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं तथा भारी वाहनों की आवाजाही को सुरक्षित ढंग से संचालित किया जाए। उनका कहना है कि अभी तक दोनों घटनाओं में चालक सुरक्षित बच गए, लेकिन हर बार किस्मत साथ दे, इसकी कोई गारंटी नहीं है।
लगातार दो घटनाओं के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या विभाग किसी बड़े हादसे के बाद जागेगा, या फिर समय रहते सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त कर लोगों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा?








