अयोध्या। उत्तर प्रदेश के अयोध्या में नवनिर्मित भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आ रही है। राम मंदिर में दर्शन के लिए वीआईपी (VIP) पास जारी करने की प्रक्रिया को फिलहाल अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कार्यालय प्रभारी ने इस खबर की आधिकारिक पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि जिन महत्वपूर्ण पदों पर बैठे व्यक्तियों की आईडी और संस्तुति का उपयोग वीआईपी पास जारी करने के लिए किया जाता था, उन्होंने हाल ही में अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। इसी प्रशासनिक फेरबदल के कारण वर्तमान में पास जारी करने की व्यवस्था प्रभावित हुई है। इसके साथ ही उन्होंने जानकारी दी कि संगठन के प्रमुख पदाधिकारी गोपाल राव भी इस समय सक्रिय रूप से कार्य नहीं देख रहे हैं, हालांकि ट्रस्ट के वरिष्ठ ट्रस्टी दिनेन्द्र दास के पास इस संबंध में सभी आवश्यक अधिकार सुरक्षित हैं।
पहले असीमित पास होते थे जारी, इस्तीफों पर तकनीकी पेंच बरकरार
ट्रस्ट कार्यालय के प्रभारी के अनुसार, पूर्व में वीआईपी पास जारी करने की कोई निश्चित या तय सीमा निर्धारित नहीं थी। विशिष्ट परिस्थितियों और आवश्यकता के अनुसार एक बार में 100 या उससे भी अधिक पास आसानी से जारी कर दिए जाते थे। उन्होंने बताया कि गोपाल राव लंबे समय से ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के प्रमुख सहयोगी के रूप में जुड़े थे और उनके पास महत्वपूर्ण प्रशासनिक अधिकार थे। एक तकनीकी पहलू को स्पष्ट करते हुए इंचार्ज ने कहा कि भले ही अधिकारियों ने इस्तीफे दे दिए हैं, लेकिन अब तक ट्रस्ट की किसी भी आधिकारिक बैठक में इन इस्तीफों को औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं किया गया है। ऐसे में तकनीकी और कानूनी रूप से उन अधिकारियों के अधिकार अभी भी बरकरार हैं, भले ही वे वर्तमान में व्यावहारिक रूप से काम नहीं कर रहे हों।
चढ़ावा चोरी कांड के बाद कड़े फैसले, पूर्व सैनिकों को सौंपी सुरक्षा की कमान
हाल ही में राम मंदिर परिसर में सामने आए चढ़ावा चोरी के मामले के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट बेहद कड़े और सुधारात्मक कदम उठा रहा है। मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव करते हुए ट्रस्ट ने अब सेना के रिटायर्ड सैनिकों (भूतपूर्व सैनिकों) को नियुक्त कर परिसर के विभिन्न संवेदनशील स्थानों पर तैनात किया है। राहत की बात यह है कि इस विवाद का श्रद्धालुओं की आस्था पर कोई असर नहीं पड़ा है और मंदिर में आने वाले दान में कोई कमी नहीं आई है। हालांकि, अब सुरक्षा के लिहाज से अधिकतर श्रद्धालु सीधे डोनेशन काउंटर या ट्रस्ट कार्यालय में जाकर रसीद कटवाकर ही दान देना पसंद कर रहे हैं।
तीसरी आंख का सख्त पहरा: 13 नए CCTV कैमरे और 27 अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी तैनात
चोरी की घटना की पुनरावृत्ति रोकने के लिए राम मंदिर ट्रस्ट ने चढ़ावे की गणना (गिनती) और सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बना दिया है। दान राशि की गिनती करने वाले मुख्य गणनास्थल की कड़ाई से निगरानी के लिए 13 नए अत्याधुनिक सीसीटीवी (CCTV) कैमरे लगाए गए हैं। इसके अलावा, मंदिर परिसर में रखी दान पेटियों को पूरी सुरक्षा के साथ गणना केंद्र तक पहुंचाने की जिम्मेदारी एसआईएस (SIS) के 27 अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों को सौंपी गई है। नई नियमावली के तहत अब गणनास्थल के भीतर केवल 43 अधिकृत (authorized) लोग ही मौजूद रह सकेंगे। पुलिस प्रशासन ने भी मुस्तैदी बढ़ाते हुए दान पेटी और गणना केंद्र के बीच के रास्ते पर कड़ा पहरा लगा दिया है। पिलर नंबर-34 पर, जहां मुख्य गुप्त दान पेटी रखी जाती है, वहां सुरक्षा के मद्देनजर तीन अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की स्थाई तैनाती की गई है।
बिना जेब वाली विशेष ड्रेस में नोटों की गिनती, बैंकिंग व्यवस्था में भी बड़ा बदलाव
चोरी की आशंका को पूरी तरह खत्म करने के लिए ट्रस्ट ने एक अनोखा और सख्त नियम लागू किया है। अब दान राशि की गिनती करने वाले कर्मचारियों के लिए ‘बिना जेब (Pocketless) वाली विशेष ड्रेस’ पहनना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके साथ ही नोटों की गिनती की पूरी प्रक्रिया की निरंतर वीडियोग्राफी भी कराई जा रही है। पूर्व में इस कार्य के लिए नियुक्त किए गए हाउसकीपिंग स्टाफ (जिनमें से कुछ आरोपी जेल में हैं) को छोड़कर, बाकी पुराने कर्मचारी ही कड़े नियमों के बीच गिनती का काम कर रहे हैं।
इसके अलावा, ट्रस्ट ने वित्तीय पारदर्शिता के लिए अपनी बैंकिंग व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। पहले बैंक से जुड़े सभी वित्तीय कार्य डॉ. अनिल मिश्रा डिजिटल हस्ताक्षर के माध्यम से अकेले देखते थे। लेकिन अब किसी भी प्रकार के बैंक लेनदेन और चेक पर अंतरिम महासचिव डॉ. कृष्ण मोहन, मुख्य अभियंता जगदीश आफले और चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) चंदन राय के संयुक्त हस्ताक्षर (Joint Signatures) होना अनिवार्य कर दिया गया है। अयोध्या में नए नियुक्त हुए एसपी सुरक्षा (SP Security) विजय शंकर मिश्रा ने मंदिर परिसर पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था की पूरी कमान अपने हाथों में ले ली है।









