नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट चुके 105 वर्षीय रसिक चंद्र मंडल को बड़ी राहत दी है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने उनकी उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए बाकी सजा माफ कर दी। कोर्ट ने 2024 में दी गई उनकी अंतरिम जमानत को भी स्थायी कर दिया।
1994 में हत्या के मामले में हुई थी सजा
पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में 1920 में जन्मे रसिक चंद्र मंडल को 1994 में हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। उस समय उनकी उम्र करीब 68 साल थी। इसके बाद वह लंबे समय तक जेल में रहे।
2018 में कलकत्ता हाईकोर्ट ने उनकी सजा के खिलाफ दायर अपील खारिज कर दी थी। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, लेकिन वहां भी उन्हें राहत नहीं मिली।
99 साल की उम्र में मांगी थी रिहाई
रसिक चंद्र मंडल ने 99 साल की उम्र में खराब स्वास्थ्य और बढ़ती उम्र का हवाला देते हुए समय से पहले रिहाई की मांग की थी। मई 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को नोटिस जारी किया था।
बाद में 29 नवंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अंतरिम जमानत दी। अब अदालत ने उनकी उम्र, स्वास्थ्य और परिस्थितियों को देखते हुए जमानत को अंतिम रूप देते हुए उम्रकैद की बची हुई सजा भी माफ कर दी है। इसके साथ ही उन्हें दोबारा हिरासत में नहीं लिया जाएगा।