
मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच अमेरिका ने ईरान के खिलाफ बहुआयामी घेराबंदी तेज कर दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान के खिलाफ कड़े आर्थिक कदम उठाने के संकेत देते हुए इसे इतिहास की सबसे बड़ी आर्थिक लड़ाई करार दिया है। हालांकि, अभी तक इस संबंध में कोई नया आधिकारिक कार्यकारी आदेश जारी नहीं हुआ है, जिससे यह स्पष्ट होना बाकी है कि अमेरिका के इस अगले सख्त कदम की जद में कौन-कौन से देश, बहुराष्ट्रीय कंपनियां और वित्तीय संस्थान आएंगे।
तेहरान तक पहुंचने वाले वित्तीय स्रोतों पर नकेल कसने की तैयारी
राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा दिए गए संकेतों के मुताबिक, अमेरिका का मुख्य उद्देश्य ईरान के आर्थिक संसाधनों और राजस्व के स्रोतों को पूरी तरह से ठप करना है। वाशिंगटन ने उन सभी देशों और संस्थाओं को कड़ी चेतावनी दी है जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से तेहरान को आर्थिक या व्यापारिक सहयोग प्रदान कर रहे हैं। हालांकि, प्रस्तावित कार्रवाई की पूरी सूची, नए प्रतिबंधों का खाका और लक्षित किए जाने वाले प्राथमिक देशों की आधिकारिक घोषणा का इंतजार किया जा रहा है।
समुद्र में अमेरिकी सेंट्रल कमांड की सख्त नाकाबंदी
ईरान पर अमेरिकी दबाव केवल बयानों और आर्थिक रणनीतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि समुद्री मोर्चे पर भी नौसैनिक गतिविधियां बढ़ा दी गई हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (US CENTCOM) के अनुसार, 20 अगस्त तक ईरान की समुद्री नाकाबंदी के दौरान 67 व्यापारिक जहाजों को अपना मार्ग बदलने पर मजबूर होना पड़ा है। इसके अतिरिक्त, तीन जहाजों को निष्क्रिय किया गया और दो पर चढ़कर तलाशी ली गई। अरब सागर में ‘USS Boxer’ से ‘MV-22B Osprey’ विमानों की नियमित उड़ानें जारी हैं, जो इस नाकाबंदी अभियान को पूरी तरह से अंजाम दे रहे हैं।
हिज्बुल्लाह और कुद्स फोर्स के वित्तीय नेटवर्क पर नए प्रतिबंध
ईरान पर रणनीतिक शिकंजा कसने के साथ ही अमेरिका ने आतंकी संगठन हिज्बुल्लाह के खिलाफ भी नए वित्तीय प्रतिबंधों की घोषणा की है। अमेरिकी अधिकारियों ने हिज्बुल्लाह और ईरान की ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) की ‘कुद्स फोर्स’ के बीच मजबूत गठजोड़ का हवाला दिया है। इन प्रतिबंधों का सीधा उद्देश्य हिज्बुल्लाह तक पहुंचने वाली विदेशी फंडिंग की सप्लाई चेन को पूरी तरह से ध्वस्त करना है।
अंतरिक्ष क्षेत्र में भी अमेरिका बढ़ाएगा रफ्तार: 2030 तक 1000 स्पेस मिशन का लक्ष्य
एक तरफ जहां मध्य पूर्व में सैन्य और आर्थिक मोर्चे पर हलचल तेज है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका ने अंतरिक्ष क्षेत्र में भी अपनी तकनीकी श्रेष्ठता बढ़ाने का फैसला किया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने एक नए विशेष मेमोरेंडम पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसका उद्देश्य अमेरिकी स्पेस मिशन्स की गति को कई गुना बढ़ाना है। नए निर्धारित लक्ष्य के तहत साल 2030 तक अमेरिका प्रति वर्ष 1000 से अधिक रॉकेट लॉन्च और री-एंट्री मिशन संचालित करने की क्षमता हासिल करेगा। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक जगत की नजरें ट्रंप के अगले आधिकारिक आदेश पर टिकी हुई हैं।














